देश की खबरें | न्यायालय ने केंद्र, मणिपुर से विद्यार्थियों की शिकायत पर विचार करने को कहा
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को केंद्र और मणिपुर सरकार से कहा कि वे अन्य केंद्रीय विश्वविद्यालयों में स्थानांतरण की मांग कर रहे मणिपुर विश्वविद्यालय के 284 छात्रों की शिकायत का समाधान करें, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि राज्य में हिंसा के कारण उन्हें पढ़ाई का कोई नुकसान न हो।
नयी दिल्ली, 28 नवंबर उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को केंद्र और मणिपुर सरकार से कहा कि वे अन्य केंद्रीय विश्वविद्यालयों में स्थानांतरण की मांग कर रहे मणिपुर विश्वविद्यालय के 284 छात्रों की शिकायत का समाधान करें, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि राज्य में हिंसा के कारण उन्हें पढ़ाई का कोई नुकसान न हो।
शीर्ष अदालत ‘मणिपुर यूनिवर्सिटी ईआईएमआई वेलफेयर सोसाइटी’ की ओर से दायर उस याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें कहा गया है कि ये विद्यार्थी पहले ही लगभग छह महीने की पढ़ाई से वंचित हो चुके हैं और उन्हें अन्य केंद्रीय विश्वविद्यालयों में स्थानांतरित किया जाना चाहिए।
याचिकाकर्ता के वकील ने कहा कि इनमें से अधिकतर विद्यार्थी दिल्ली, पश्चिम बंगाल और महाराष्ट्र सहित विभिन्न स्थानों पर चले गए हैं।
प्रधान न्यायाधीश डी. वाई. चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति जे. बी पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की पीठ ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और राज्य के महाधिवक्ता से पूछा कि क्या इन विद्यार्थियों को उनके पाठ्यक्रम के अनुरूप केंद्रीय विश्वविद्यालयों में स्थानांतरित किया जा सकता है।
पीठ ने कहा, "याचिकाकर्ताओं ने अनुरोध किया है कि इन विद्यार्थियों को अन्य केंद्रीय विश्वविद्यालयों में स्थानांतरित किया जा सकता है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि उनकी पढ़ाई का कोई नुकसान न हो।"
इसने कहा, "हमने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता और मणिपुर के महाधिवक्ता से इस मामले को (क्रमश: केंद्र एवं राज्य सरकार) के समक्ष उठाने का अनुरोध किया है, ताकि इसका उचित समाधान किया जा सके।"
पीठ ने शुरू में याचिकाकर्ता का प्रतिनिधित्व करने वाले अधिवक्ता से अपनी शिकायत के साथ मणिपुर उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाने को कहा।
जब अधिवक्ता ने कहा कि शीर्ष अदालत मणिपुर में हिंसा से संबंधित मामले पर विचार कर रही है, तो पीठ ने कहा, "हम मणिपुर के बारे में हर चीज पर विचार नहीं करना चाहते हैं। आप उच्च न्यायालय का रुख करें।"
याचिकाकर्ता के वकील ने कहा, ‘‘बस हमें प्रवेश की अनुमति दें। हम पहले ही अपनी छह महीने की पढ़ाई गंवा चुके हैं। मई के बाद से हमें इम्फाल से बाहर निकलना पड़ा। हमें अपनी रिट के लिए वहां लौटना होगा और यह बहुत आसान काम नहीं है।
पीठ ने मामले की अगली सुनवाई चार दिसंबर को तय की है।
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