देश की खबरें | न्यायालय ने मीडिया कर्मियों के इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त करने पर केंद्र को दिशानिर्देश जारी करने कहा
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नयी दिल्ली, सात नवंबर उच्चतम न्यायालय ने मंगलवार को केंद्र से कहा कि वह लोगों, विशेषकर मीडिया कर्मियों के मोबाइल फोन और लैपटॉप जैसे इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त किये जाने पर दिशानिर्देश जारी करे।
न्यायालय ने इसे गंभीर विषय करार दिया।
न्यायमूर्ति संजय किशन कौल और न्यायमूर्ति सुधांशु धूलिया की पीठ ने केंद्र का प्रतिनिधित्व कर रहे अतिरिक्त सॉलिसीटर जनरल (एएसजी) एस वी राजू को ‘‘जांच एजेंसियों की व्यापक शक्तियों’’ के बारे में अपनी ‘चिंता’ से अवगत कराया।
पीठ दो याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है, जिनमें से एक याचिका फाउंडेशन फॉर मीडिया प्रोफेशेनल्स ने दायर कर जांच एजेंसियों द्वारा तलाशी एवं डिजिटल उपकरणों की जब्ती के लिए व्यापक दिशानिर्देश का अनुरोध किया है।
एक याचिकाकर्ता की ओर से पेश हुए वकील ने कहा कि उठाया गया मुद्दा काफी महत्वपूर्ण है क्योंकि इस बारे में कोई दिशानिर्देश नहीं है कि कब और क्यों जांच एजेंसियां इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त करेंगी।
राजू ने कहा कि विषय में जटिल कानूनी मुद्दा उठाया गया है और उन्हें इसके लिए तैयारी करने के वास्ते कुछ समय चाहिए।
उन्होंने कहा कि ऐसे लोग हैं जिन्होंने बार-बार अपराध किये हैं या राष्ट्र विरोधी तत्व हैं, जो महत्वपूर्ण डेटा चुरा सकते हैं और इसलिए कुछ संतुलन बनाने की जरूरत है।
न्यायालय ने कहा, ‘‘समस्या यह है कि ये मीडिया कर्मी हैं। उनके खुद के स्रोत हैं और अन्य पहलू हैं। यह एक गंभीर विषय है। अब, यदि आप सबकुछ ले लेंगे, तो फिर समस्या है।’’
न्यायालय ने कहा, ‘‘कुछ दिशानिर्देश अवश्य होने चाहिए।’’
राजू ने कहा कि इस विषय में कई कानूनी पहलू शामिल हैं और वह इन पहलुओं की पड़ताल करेंगे।
पीठ ने कहा, ‘‘मुझे लगता है कि यह समय आप लोगों के लिए खुद से यह सुनिश्चित करने का है कि इसका दुरूपयोग नहीं हो। यह एक ऐसा देश नहीं हो सकता जो केवल एजेंसियों के जरिये चलता हो। ऐसा नहीं किया जा सकता।’’
पीठ ने राजू से कहा कि सरकार को अवश्य ही यह विश्लेषण करना चाहिए कि किस तरह के दिशानिर्देश दोनों पक्षों के हितों की रक्षा के लिए जरूरी हैं।
याचिकाकर्ता के वकील ने सरकार की शक्ति और निजता का अधिकार सहित व्यक्ति के अधिकारों का मुद्दा उठाया।
उन्होंने कहा कि आजकल, जांच एजेंसियां लोगों को अपनी बायोमेट्रिक जानकारी मुहैया करने के लिए मजबूर कर रही हैं, और सभी राजनीतिक दलों की सरकारों ने इसका अनुसरण किया है।
पीठ ने विषय की अगली सुनवाई दिसंबर के लिए स्थगित कर दी।
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