देश की खबरें | न्यायालय बायजू के खिलाफ दिवाला कार्यवाही से संबंधित याचिका को सूचीबद्ध करने पर सहमत
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. उच्चतम न्यायालय राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण (एनसीएलएटी) के एक फैसले के खिलाफ अमेरिकी ऋणदाता कंपनी ‘ग्लास ट्रस्ट कंपनी एलएलसी’ की अपील को शीघ्र सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने पर शुक्रवार को सहमत हो गया।
नयी दिल्ली, छह सितंबर उच्चतम न्यायालय राष्ट्रीय कंपनी विधि अपीलीय न्यायाधिकरण (एनसीएलएटी) के एक फैसले के खिलाफ अमेरिकी ऋणदाता कंपनी ‘ग्लास ट्रस्ट कंपनी एलएलसी’ की अपील को शीघ्र सुनवाई के लिए सूचीबद्ध करने पर शुक्रवार को सहमत हो गया।
एनसीएलएटी ने वित्तीय संकट से घिरी शिक्षा-प्रौद्योगिकी कंपनी बायजू के खिलाफ दिवाला कार्यवाही पर रोक लगा दी थी और बीसीसीआई के साथ 158.9 करोड़ रुपये के बकाये के निपटान को मंजूरी दी थी।
प्रधान न्यायाधीश डी वाई चंद्रचूड़, न्यायमूर्ति जे बी पारदीवाला और न्यायमूर्ति मनोज मिश्रा की पीठ से बायजू की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता एन के कौल ने अनुरोध किया कि मामले की जल्द सुनवाई किए जाने की जरूरत है।
कौल ने कहा, ‘‘ केवल प्रवर्तकों द्वारा ही फंडिंग की गई और आज किसी ने कोई बाहरी उधार नहीं लिया है। हमें आज यह दिखाना होगा कि याचिका (अमेरिकी फर्म की)कितनी दुर्भावनापूर्ण है।’’
इस पर प्रधान न्यायाधीश चंद्रचूड़ ने कहा, ‘‘मैं इसे जल्द से जल्द सूचीबद्ध करवाता हूं।’’
अमेरिकी ऋणदाता कंपनी की ओर से पैरवी वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने की और कहा कि वे भी जल्द सुनवाई चाहते हैं।
इससे पहले 22 अगस्त को पीठ ने वित्तीय संकट से घिरी शिक्षा-प्रौद्योगिकी कंपनी बायजू के खिलाफ दिवाला कार्यवाही जारी रखने के लिए कर्जदाताओं की समिति (सीओसी) को कोई बैठक नहीं आयोजित करने का अंतरिम आदेश देने से इनकार कर दिया था।
पीठ ने कहा था कि वह 27 अगस्त को इस मामले में अंतिम सुनवाई करेगी। पीठ ने कहा था कि अगली सुनवाई तक होने वाले घटनाक्रमों को वह नकार सकती है अगर उसे यह लगता है कि एनसीएलएटी के फैसले के खिलाफ अमेरिका की कर्जदाता ग्लास ट्रस्ट कंपनी की तरफ से दायर अपील में कोई दम नहीं है।
बायजू को झटका देते हुए शीर्ष अदालत ने 14 अगस्त को एनसीएलएटी के फैसले पर रोक लगा दी थी। इससे पहले दो अगस्त का अपीलीय न्यायाधिकरण का फैसला बायजू के लिए बड़ी राहत लेकर आया था क्योंकि इसने प्रभावी रूप से संस्थापक बायजू रवींद्रन को फिर से नियंत्रण में ला दिया था।
यह मामला बीसीसीआई के साथ एक प्रायोजन सौदे से संबंधित 158.9 करोड़ रुपये के भुगतान में बायजू की चूक से जुड़ा है।
शीर्ष अदालत ने बीसीसीआई को निर्देश दिया था कि वह बायजू से समझौते के बाद प्राप्त 158 करोड़ रुपये की राशि को अगले आदेश तक एक अलग खाते में रखे।
बायजू ने 2019 में बीसीसीआई के साथ ‘टीम प्रायोजक समझौता’ किया था। कंपनी ने 2022 के मध्य तक अपने दायित्वों को पूरा किया, लेकिन 158.9 करोड़ रुपये के बाद के भुगतानों में चूक कर गई।
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(The above story first appeared on LatestLY on Sep 06, 2024 12:58 PM IST. For more news and updates on politics, world, sports, entertainment and lifestyle, log on to our website latestly.com).

