जरुरी जानकारी | न्यायालय ने गोवा-तमनार परियोजना के लिए सीईसी की सिफारिश स्वीकार की

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on Information at LatestLY हिन्दी. उच्चतम न्यायालय ने गोवा-तमनार पारेषण परियोजना के हिस्से के रूप में 400 किलोवॉट (केवी) की एक नई लाइन बिछाने के लिए वन क्षेत्र काटने के बजाय गोवा में 220 केवी की मौजूदा पॉवर लाइन के समानांतर लाइन बिछाने की सिफारिश स्वीकार कर ली है।

नयी दिल्ली, नौ अप्रैल उच्चतम न्यायालय ने गोवा-तमनार पारेषण परियोजना के हिस्से के रूप में 400 किलोवॉट (केवी) की एक नई लाइन बिछाने के लिए वन क्षेत्र काटने के बजाय गोवा में 220 केवी की मौजूदा पॉवर लाइन के समानांतर लाइन बिछाने की सिफारिश स्वीकार कर ली है।

केंद्रीय अधिकारप्राप्त समिति (सीईसी) ने वन-क्षेत्र को बचाने के लिए 23 अप्रैल 2021 को सौंपी अपनी रिपोर्ट में यह सुझाव दिया था। इस प्रस्ताव को न्यायमूर्ति एल नागेश्वर राव और न्यायमूर्ति बी आर गवई की पीठ ने स्वीकार कर लिया।

सीईसी के मुताबिक, गोवा-तमनार पारेषण परियोजना लिमिटेड (जीटीटीपीएल) ने जो लाइन बिछाने का प्रस्ताव रखा है वह पश्चिमी घाटों की संवदेनशील पारिस्थितिकी के लिहाज से नुकसानदायक हो सकता है।

पीठ ने अपनी टिप्पणी में कहा, ‘‘सीईसी का मानना है कि गोवा में 10.50 किलोमीटर लंबे गलियारे में से वन क्षेत्र को हटाने के बजाय प्रस्तावित 400 केवी की लाइन को गोवा राज्य में मौजूदा 220 केवी की कॉरिडोर लाइन के समानांतर बनाया जाए। इससे पहले मापुसा और सांगोड़ के बीच 400 केवी की कॉरिडोर कनेक्टिविटी तथा सांगोड और जेल्देम के बीच 220 केवी की लाइन स्थापित की जाए।’’

न्यायालय ने कहा कि सीईसी का यह प्रस्ताव पारिस्थितिकी रूप से संवदेनशील और जैव विविधता वाले इन क्षेत्रों में वन एवं वन्यजीवों के हित में होगा।

न्यायालय ने कहा, ‘‘रिपोर्ट देखने और संबद्ध पक्षों की दलीलें सुनने के बाद हम सीईसी के सुझावों को मंजूर करते हैं और निर्देश देते हैं कि इनके अनुरूप उचित कदम उठाए जाएं।’’

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