देश की खबरें | जमानत मामलों में जेल अधीक्षक की स्थिति रिपोर्ट की प्रति आरोपी को भी दी जाएः उच्च न्यायालय
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. दिल्ली उच्च न्यायालय ने साफ किया है कि जब भी अदालत जमानत के आवेदन पर पुलिस या जेल अधिकारियों से कोई रिपोर्ट मांगती हैं तो इसकी प्रति आरोपी को भी दी जानी चाहिए क्योंकि इंसाफ तक पहुंचने और जनता को न्याय प्रदान करने के लिए यह एक बुनियादी जरूरत है।
नयी दिल्ली, 30 जून दिल्ली उच्च न्यायालय ने साफ किया है कि जब भी अदालत जमानत के आवेदन पर पुलिस या जेल अधिकारियों से कोई रिपोर्ट मांगती हैं तो इसकी प्रति आरोपी को भी दी जानी चाहिए क्योंकि इंसाफ तक पहुंचने और जनता को न्याय प्रदान करने के लिए यह एक बुनियादी जरूरत है।
अदालत ने कहा कि अगर स्थिति रिपोर्ट की प्रति आरोपी को नहीं दी जाती है तो अदालत को अपने आदेश में इसके कारणों को दर्ज करना चाहिए।
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मुख्य न्यायाधीश डीएन पटेल और न्यायमूर्ति प्रतीक जालान की पीठ ने कहा कि मुकदमे के जांच अधिकारी और जेल अधीक्षक को जितना मुमकिन हो, रिपोर्ट को अग्रिम में ही अदालत को देनी चाहिए।
पीठ ने कहा कि इसी तरह से इन रिपोर्टों की प्रतियां आरोपियों को भी अग्रिम में दी जानी चाहिए ताकि वे अदालत में अपने मामलों का प्रभावी तरीके से बचाव कर सकें।
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पीठ ने कहा, “ यह इंसाफ तक पहुंच और लोगों को व्यापक रूप से न्याय प्रदान करने के लिए बुनियादी जरूरत है। “
पीठ ने कहा, “आमतौर पर, सामान्य नियम के तहत, अदालतों को यह ध्यान में रखना चाहिए कि जब भी जेल अधीक्षक से कोई रिपोर्ट मांगी जाती है और यह सीधे या अभियोजन के जरिए दी जाती है तो इसकी प्रति जमानत का आवेदन दायर करने वाले आवेदक को दी जानी चाहिए। “
उन्होंने कहा, “ जब भी आवेदक को आपराधिक संहिता प्रक्रिया, खासकर धारा 437,438 और 439 (जमानत) के तहत इसकी प्रति नहीं दी जाती है तो अदालतों को इसके कारण आदेशों में दर्ज करने चाहिए। “
अदालत ने यह आदेश चिराग मदन की याचिका पर पारित किया किया है। मदन ने याचिका दायर कर निर्देश मांग की थी कि मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट और सत्र न्यायाधीश के समक्ष जमानत के आवेदन पर सुनवाई के समय जेल अधीक्षक द्वारा दायर स्थिति रिपोर्ट या अभियोजन की तरफ से दायर जवाबों की प्रति आरोपी या उसके वकील को दी जाए।
उच्च न्यायालय ने कहा कि हर नियम के अपने अपवाद होते हैं और मामले के तथ्यों और परिस्थितियों के हिसाब से, कुछ मामलों में रिपोर्ट नहीं दी जा सकती है।
पीठ ने कहा कि इस आदेश की एक प्रति दिल्ली सरकार के मुख्य सचिव, महानिदेशक (कारावास), सभी जिलों के जिला एवं सत्र न्यायाधीशों, दिल्ली राज्य विधि सेवा प्राधिकरण और सभी जेल अधिकारियों को भेजी जाए ताकि इसका आगे से अनुपालन हो।
सुनवाई के दौरान, मदन की ओर से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता सिद्धार्थ लथूरा ने कहा कि जमानत के मामलों में जेल अधिकारियों से रिपोर्ट मांगी जाती है और उन रिपोर्टों पर अदालतें विश्वास करती हैं, लेकिन उसकी प्रतियां आरोपियों को नहीं दी जाती हैं।
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