देश की खबरें | हिंसा प्रभावित लोगों के लिये अस्थायी उपाय के तौर पर प्री-फैब्रिकेटेड घरों का निर्माण : मणिपुर के मुख्यमंत्री

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. मणिपुर के मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह ने बुधवार को कहा कि हिंसा से प्रभावित लोगों के लिए बनाए गए पूर्व-निर्मित (प्री-फैब्रिकेटेड) घर कोई स्थायी व्यवस्था नहीं है और राहत शिविरों में रहने वाले लोगों की कठिनाई को कम करने के लिए उनका निर्माण किया गया था।

इंफाल, 23 अगस्त मणिपुर के मुख्यमंत्री एन. बीरेन सिंह ने बुधवार को कहा कि हिंसा से प्रभावित लोगों के लिए बनाए गए पूर्व-निर्मित (प्री-फैब्रिकेटेड) घर कोई स्थायी व्यवस्था नहीं है और राहत शिविरों में रहने वाले लोगों की कठिनाई को कम करने के लिए उनका निर्माण किया गया था।

उन्होंने यह भी कहा कि पूर्वोत्तर राज्य की स्थिति में धीरे-धीरे सुधार हो रहा है।

सिंह एक कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे जहां इंफाल पूर्वी जिले के सजीवा जेल परिसर में 300 से अधिक परिवारों को अस्थायी आश्रय गृह सौंपे गए। ये लोग उसी क्षेत्र में विभिन्न राहत शिविरों में रह रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा, “ये अस्थायी उपाय हैं। हमारी पहली प्राथमिकता पहाड़ियों और घाटी दोनों में प्रभावित लोगों का पुनर्वास करना है। आठ जगहों पर प्री-फैब्रिकेटेड घर बनाए जा रहे हैं।”

प्री-फैब्रिकेटेड घर तैयार ढांचे हैं जिनका निर्माण कहीं और किया जाता है तथा इन्हें फिर उस स्थान पर इकट्ठा किया जाता है जहां घर स्थापित करना होता है।

सिंह ने कहा कि बिष्णुपुर जिले के क्वाक्टा में 320, सजीवा में 400 और इंफाल पूर्व के सॉओमबुंग में 200 घर बनाए गए हैं, जबकि थाऊबल जिले के येइथिबी लोकोल में 400 ऐसे घर बनाए गए हैं।

उन्होंने कहा, “घाटी में अगले 10-15 दिनों में इन्हें पहुंचा दिया जाएगा। हमने कई इलाकों में स्थायी ढांचों के निर्माण के लिए एक सर्वेक्षण भी शुरू कर दिया है।”

मुख्यमंत्री ने कहा कि कांगपोकपी और चुराचांदपुर जिलों में इसमें थोड़ी देरी होगी।

सिंह ने कहा, “कांगपोकपी जिले में 700 परिवारों के लिए दो स्थलों पर विचार किया गया है। एक जगह की पहचान कर ली गई है और वहां जमीन का समतलीकरण लगभग पूरा हो चुका है। चुराचांदपुर में भी, निर्माण के लिए एक स्थल की लगभग पहचान कर ली गई है।”

उन्होंने कहा कि राज्य में स्थिति में सुधार हो रहा है।

मुख्यमंत्री ने कहा, “यह आशंका अब खत्म हो गई है कि बंदूक से हमले हो सकते हैं। हमारा मानना है कि सामान्य स्थिति बहाल हो जाएगी। यह सामूहिक प्रयासों के कारण संभव हुआ है।”

मेइती समुदाय की अनुसूचित जनजाति (एसटी) दर्जे की मांग के विरोध में पहाड़ी जिलों में “आदिवासी एकजुटता मार्च” आयोजित किए जाने के बाद मई की शुरुआत में राज्य में हिंसा भड़क उठी थी।

तब से, मणिपुर में जातीय संघर्षों में 160 से अधिक लोग मारे गए हैं और सैकड़ों लोग घायल हुए हैं।

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