बेंगलुरु, 19 मई कांग्रेस की नयी सरकार कर्नाटक में क्या उन ‘पांच गारंटी’ को लागू करेगी, जिनकी मदद से उसने भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को मात देकर सत्ता हासिल की या अब वह इसमें ‘शर्तें लागू’ वाली बात जोड़ देगी? सिद्धरमैया के नेतृत्व वाली सरकार के शनिवार को कार्यभार संभालने के बाद सभी की निगाहें इस पर टिकी होंगी।
दस मई को हुए विधानसभा चुनाव के लिए प्रचार के दौरान राहुल गांधी सहित कांग्रेस नेताओं ने मतदाताओं को बार-बार आश्वासन दिया कि सत्ता में आने के पहले दिन कैबिनेट की पहली बैठक में इन ‘पांच गारंटी’ को मंजूरी दी जाएगी।
राजनीतिक विश्लेषकों ने कहा है कि ‘गारंटी’ को मतदाताओं, विशेष रूप से महिलाओं का पूरा समर्थन मिला और इसने पार्टी की शानदार जीत में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। राज्य की 224 सदस्यीय विधानसभा में 135 सीटें हासिल करने वाली कांग्रेस ने भाजपा को सत्ता से बेदखल कर दिया। भाजपा ने 66 निर्वाचन क्षेत्रों में जीत हासिल की जबकि जनता दल (सेक्युलर) केवल 19 सीटें जीतने में सफल रही।
कुछ भाजपा नेताओं ने आरोप लगाया है कि ‘गारंटी’ को लागू करने से राज्य दिवालिया हो जाएगा, और यह भी दावा किया कि कांग्रेस अपने चुनाव-पूर्व वादों को नहीं निभाएगी।
इन वादों में सभी घरों (गृह ज्योति) को 200 यूनिट मुफ्त बिजली, हर परिवार की महिला मुखिया (गृह लक्ष्मी) को 2,000 रुपये मासिक सहायता, गरीबी रेखा से नीचे (बीपीएल) के परिवार (अन्न भाग्य) के प्रत्येक सदस्य को 10 किलोग्राम मुफ्त चावल, बेरोजगार स्नातक युवाओं के लिए हर महीने 3,000 रुपये और बेरोजगार डिप्लोमा धारकों (दोनों 18-25 आयु वर्ग में) को दो साल के लिए 1,500 रुपये (युवा निधि) और सार्वजनिक परिवहन बसों (शक्ति) में महिलाओं के लिए मुफ्त यात्रा शामिल हैं।
कांग्रेस के प्रमुख नेताओं ने इस हफ्ते की शुरुआत में कहा था कि ‘पांच गारंटी’ को लागू करने से सरकारी खजाने पर सालाना 50,000 करोड़ रुपये का बोझ पड़ सकता है। भाजपा और जद (एस) के नेताओं ने भी कहा है कि वे उत्सुकता से देख रहे हैं कि क्या कांग्रेस अपने वादों को पूरा करेगी।
शुक्रवार को दिल्ली के लिए उड़ान भरने से पहले पत्रकारों से बातचीत में कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष डी के शिवकुमार ने कहा, ‘‘पहले ही दिन पहली कैबिनेट बैठक में हम अपनी सभी गारंटी योजनाओं को लागू करने जा रहे हैं। हम अपने वादों को पूरा करेंगे। आपको इस महान ऐतिहासिक पल का साक्षी बनना चाहिए।’’
यह पूछे जाने पर कि क्या कोई शर्तें जुड़ी होंगी, शिवकुमार ने कहा कि वह अभी नहीं बोलेंगे, लेकिन फैसला लागू होने के बाद लोगों को इसकी जानकारी दी जाएगी। उन्होंने जोर दिया, ‘‘यह डी के शिवकुमार या सिद्धरमैया की गारंटी नहीं है। यह कांग्रेस पार्टी की गारंटी है...हमने जो कहा है, हम उसे करेंगे।’’
पूर्व केंद्रीय मंत्री एम वीरप्पा मोइली ने ‘पीटीआई-’ से बातचीत में कहा, ‘‘हम एक जिम्मेदार पार्टी हैं। जिम्मेदार कांग्रेस नेताओं ने उन्हें (गारंटी) तैयार किया है, उनके प्रभाव से वे पूरी तरह वाकिफ होंगे। हम उन्हें लागू करने की स्थिति में होंगे।’’
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