ताजा खबरें | कांग्रेस का जम्मू कश्मीर के विकास के अश्चासन पूरे नहीं होने का आरोप, भाजपा का धरातल पर विकास का दावा

Get latest articles and stories on Latest News at LatestLY. कांग्रेस सहित कुछ विपक्षी दलों ने बृहस्पतिवार को आरोप लगाया कि जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने से इस केंद्रशासित प्रदेश में विकास एवं स्थिति में सुधार से संबंधित केंद्र सरकार के आश्वासन पूरे नहीं हुए हैं।

नयी दिल्ली, 18 मार्च कांग्रेस सहित कुछ विपक्षी दलों ने बृहस्पतिवार को आरोप लगाया कि जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने से इस केंद्रशासित प्रदेश में विकास एवं स्थिति में सुधार से संबंधित केंद्र सरकार के आश्वासन पूरे नहीं हुए हैं।

विपक्षी दलों ने मांग की कि जम्मू कश्मीर में विधानसभा बहाल करके पुन: पूर्ण राज्य बनाना चाहिए।

वहीं, भाजपा ने आरोप लगाया कि पूर्व में केंद्र से जम्मू कश्मीर के लिये भेजे गए धन का दुरूपयोग किया जाता था और लोगों तक इसका लाभ नहीं पहुंचता था। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बजट का जम्मू कश्मीर में पूरा उपयोग हो रहा है तथा लोगों का सामाजिक-आर्थिक विकास, रोजगार, बुनियादी ढांचे के विकास समेत अन्य क्षेत्रों के लिए ध्यान दिया जा रहा है।

वर्ष 2020-21 के लिए जम्मू-कश्मीर संघ राज्यक्षेत्र तथा पुडुचेरी संघ क्षेत्र के संबंध में अनुदानों की अनुपूरक मांगों, वर्ष 2021-22 के लिए जम्मू-कश्मीर संघ राज्यक्षेत्र के लिए अनुदानों की मांगों तथा वर्ष 2021-22 के लिए पुडुचेरी संघ क्षेत्र के संबंध में लेखानुदानों की मांगों पर चर्चा में हिस्सा लेते हुए कांग्रेस सदस्य ए. रेवंत रेड्डी ने कहा कि केंद्र सरकार को जम्मू-कश्मीर एवं पुडुचेरी के विकास लिए पूरा ध्यान देना चाहिए।

रेड्डी ने कहा कि जम्मू-कश्मीर से जबसे अनुच्छेद 370 हटा, उसके बाद से वहां अर्थव्यवस्था की स्थिति ठीक नहीं है और ऐसे में केंद्र सरकार को मदद करनी होगी।

उन्होंने कहा, ‘‘प्रधानमंत्री डिजिटल इंडिया की बात करते हैं, लेकिन अनुच्छेद 370 हटाने के बाद जम्मू-कश्मीर में 72 दिनों तक कोई मोबाइल नेटवर्क नहीं था, इसके बाद कई महीने तक 4जी नेटवर्क उपलब्ध नहीं था।’’

कांग्रेस सांसद ने कहा कि केंद्रशासित प्रदेश बनाने के समय सरकार ने शांति बहाल होने और स्थिति में सुधार होने का जो आश्वासन किया था वो पूरा नहीं हुआ।

चर्चा में हिस्सा लेते हुए भाजपा के जामयांग सेरिंग नामज्ञाल ने कहा कि इस बजट में जम्मू कश्मीर और पुडुचेरी में सुशासन, लोगों का सामाजिक-आर्थिक विकास, रोजगार, बुनियादी ढांचे के विकास समेत अन्य क्षेत्रों के लिए ध्यान रखा किया है।

उन्होंने आरोप लगाया कि ‘‘पहले केंद्र से एक परिवार धन भेजता था और जम्मू कश्मीर में दो परिवार बांटते थे। लेकिन आज केंद्र सरकार से बजट जा रहा है और धरातल पर उतर रहा है।’’

उन्होंने हाल ही में जम्मू कश्मीर में हुए जिला विकास परिषद के चुनावों का जिक्र करते हुए कहा कि चुनाव में कश्मीर में महिलाओं की भागीदारी का भी ध्यान रखा गया। उन्होंने कहा कि इन चुनाव में एक भी गोली नहीं चली, इससे बढ़िया कश्मीर में शांति की हम और क्या अपेक्षा कर सकते हैं।

नामज्ञाल ने कहा कि पहले जम्मू कश्मीर भ्रष्टाचार के मामले में ऊपर रहता था क्योंकि वहां भ्रष्टाचार निरोधक एजेंसियों का अधिकार क्षेत्र नहीं था लेकिन अनुच्छेद 370 समाप्त होने के बाद वहां एजेंसियों का अधिकार क्षेत्र लागू हुआ।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जम्मू कश्मीर और लद्दाख को एक राज्य की अनुभूति कराई है।

उन्होंने कहा कि जम्मू कश्मीर के लिए सरकार ने राजनीतिक परिदृश्य बदला है, वहां कुछ दलों का राजनीतिक एकाधिकार समाप्त किया है और ऐसे अनगिनत कदम उठाये हैं। साथ ही लद्दाख को लेकर भी बहुत अच्छे अच्छे कदम उठाये गये हैं।

नामज्ञाल ने कहा कि पुडुचेरी के लिए भी इस बार अच्छा बजट रखा गया है। वहां पूर्ववर्ती राज्य सरकार ने राशन दुकानें बंद करके रखीं, कर्मचारियों को वेतन नहीं मिल रहा था, इन सब कारणों से वहां अस्थिरता रही और सरकार गिर गयी।

तृणमूल कांग्रेस के सौगत राय ने आरोप लगाया कि पुडुचेरी की उपराज्यपाल का व्यवहार खराब रहा, इसलिए सरकार अस्थिर रही।

उन्होंने ऐतिहासिक तथ्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि अगर पंडित जवाहरलाल नेहरू जम्मू कश्मीर में सेना नहीं भेजते तो वह पाकिस्तान के कब्जे में चला जाता।

उन्होंने कहा कि जम्मू कश्मीर में शेख अब्दुल्ला की भूमिका भी प्रशंसनीय थी, लेकिन उन्हें कैद में डालना गलत था।

राय ने कहा कि जनसंघ के संस्थापक श्यामा प्रसाद मुखर्जी की गिरफ्तारी भी गलत थी और उनका जेल में देहांत होना भी दु:खद था।

तृणमूल कांग्रेस नेता ने कहा कि 2019 में जम्मू कश्मीर को केंद्रशासित प्रदेश बनाने और लद्दाख को अलग करने का इस सरकार का फैसला गलत था। इसके साथ ही फारूक अब्दुल्ला और महबूबा मुफ्ती आदि नेताओं को लंबे समय तक नजरबंद रखना भी गलत था।

उन्होंने कहा कि गृह मंत्री अमित शाह ने सदन में आश्वासन दिया था कि कश्मीर में शांति आएगी और राज्य का उत्थान होगा, लेकिन अभी तक ऐसा कुछ नहीं हुआ है।

हालांकि उन्होंने कहा कि कश्मीर में डीडीसी और शहरी निकाय के चुनाव होना अच्छा कदम था और नजरबंद किये गये नेताओं को छोड़ना भी अच्छा निर्णय था।

साथ ही राय ने कहा कि जम्मू कश्मीर में विधानसभा बहाल करके पुन: पूर्ण राज्य बनाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि कश्मीरी पंडितों को घाटी में वापस भेजने, आतंकवाद समाप्त करने और पर्यटन बढ़ाने की दिशा में भी सरकार सक्रिय नहीं दिखाई दे रही।

बीजद के भर्तृहरि महताब ने कहा कि जम्मू कश्मीर में स्थिति सामान्य करने के लिए उसे पूरी तरह समर्थन चाहिए होगा। उन्होंने कहा कि राज्य को जो भी धन दिया जा रहा है, उसमें पारदर्शिता होनी चाहिए और जवाबदेही तय होनी चाहिए।

तेलंगाना राष्ट्र समिति के के. प्रभाकर रेड्डी ने कहा कि जम्मू कश्मीर में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए काम किया जाए और सभी वर्गों के लोगों को इसमें भूमिका निभाने का अवसर मिले।

जारी वैभव दीपक

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