विदेश की खबरें | भारत के साथ प्रस्तावित करार के खिलाफ कोलंबो बदंरगाह के कर्मचारियों ने हड़ताल वापस ली

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on world at LatestLY हिन्दी. रणनीतिक रूप से अहम कोलंबो बंदरगाह के कर्मचारियों ने प्रधानमंत्री महिंदा राजपक्षे से रविवार को मुलाकात के बाद अपनी हड़ताल वापस ले ली। इससे एक दिन पहले उन्होंने श्रीलंका के राष्ट्रपति से लिखित में भरोसा देने की मांग की थी कि देश के बड़े ईस्टर्न कंटेनर टर्मिनल को भारत को नहीं सौंपा जाएगा।

कोलंबो, दो अगस्त रणनीतिक रूप से अहम कोलंबो बंदरगाह के कर्मचारियों ने प्रधानमंत्री महिंदा राजपक्षे से रविवार को मुलाकात के बाद अपनी हड़ताल वापस ले ली। इससे एक दिन पहले उन्होंने श्रीलंका के राष्ट्रपति से लिखित में भरोसा देने की मांग की थी कि देश के बड़े ईस्टर्न कंटेनर टर्मिनल को भारत को नहीं सौंपा जाएगा।

उल्लेखनीय है कि कम से कम 23 मजदूर संघों ने शुक्रवार को हड़ताल पर जाते हुए मांग की थी कि ईस्टर्न कंटेनर टर्मिनल (ईसीटी) को भारत को बेचने के समझौते को रद्द किया जाए और परिचालन श्रीलंका बंदरगाह प्राधिकरण को सौंपा जाए।

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पूर्ववर्ती सिरिसेना सरकार ने भारत और जापान के साथ ईसीटी को विकसित करने के लिए त्रिपक्षीय सहमति पत्र पर दस्तखते किए थे। ईसीटी चीन द्वारा 50 करोड़ डॉलर की लागत से बनाए गए कोलंबो इंटरनेशनल कंटेनर टर्मिनल (सीआईसीटी) के करीब है।

हालांकि, सहमति पत्र की मियाद पिछले साल ही पूरी हो गई थी और टर्मिनल के लिए औपचारिक समझौते पर हस्ताक्षर किए जाने बाकी हैं। मजदूर संघ सरकार पर सहमति पत्र से हटने और शत प्रतिशत श्रीलंकाई संपत्ति के रूप में इस टर्मिनल को विकसित करने के लिए दबाव डाल रहे हैं।

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डेली मिरर की खबर के अनुसार हड़ताल कर रहे मजदूर संघों के प्रतिनिधियों के साथ टांगले स्थत कार्लटन हाउस में प्रधानमंत्री महिंदा राजपक्षे की विशेष चर्चा हुई। मजदूर संघों ने कहा कि बातचीत सफल होने की वजह से उन्होंने प्रदर्शन स्थगित करने का फैसला किया है।

हालांकि, उन्होंने इस बारे में नहीं बताया कि क्या सहमति बनी जिसकी वजह से प्रदर्शन स्थगित किया गया है।

इससे पहले मंत्री विमल वीरवानसा और पूर्व सांसद उदया गम्मनपिला ने शुक्रवार को प्रदर्शनकारियों से मुलाकात की थी जो बेनतीजा रही।

शनिवार को प्रदर्शनकारियों ने कहा था कि वे तब तक प्रदर्शन जारी रखेंगे जब तक स्वयं राष्ट्रपति गोटबाया राजपक्षे उनसे मुलाकात नहीं करते।

उल्लेखनीय है कि इस महीने प्रधानमंत्री ने कहा था कि ईसीटी के विकास का काम भारत को सौंपने पर अभी तक कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है। उन्होंने कहा, ‘‘यह भारत के साथ हुआ राजनयिक समझौता है जो पिछली सरकार में - राष्ट्रपति सिरिसेना और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच हुआ था।’’

मजदूर संघ भारत के कथित दबाव के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। उनका आरोप है कि इसकी वजह से श्रीलंका खुद ईसीटी का विकास नहीं कर पा रहा है।

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