नयी दिल्ली, चार मई एक नए अध्ययन में पाया गया है कि जलवायु परिवर्तन का पक्षियों की छोटी व स्थानीय प्रजातियों की तुलना में बड़े और प्रवासी पक्षियों पर अधिक चिंताजनक प्रभाव पड़ता है।
इस अंतरराष्ट्रीय अध्ययन के शोधकर्ताओं ने सभी महाद्वीपों में पक्षियों की 104 प्रजातियों की 201 मादा पक्षियों में 1970 से 2019 के बीच वार्षिक प्रजनन में आए बदलाव का आकलन किया। शोधकर्ताओं ने पाया कि जलवायु परिवर्तन पक्षियों की प्रजातियों के पारिस्थितिकी और जीवन इतिहास लक्षणों पर मिश्रित प्रभाव के माध्यम से संतानोत्पत्ति को प्रभावित करता हैं।
उन्होंने ‘प्रोसीडिंग्स ऑफ द नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज’ (पीएनएएस) पत्रिका में अपने निष्कर्ष प्रकाशित किए हैं।
उन्होंने अध्ययन में कहा, कुल मिलाकर हाल के दशकों में औसत संतानोत्पत्ति में गिरावट आई है। 56.7 प्रतिशत आबादी में गिरावट की प्रवृत्ति देखी गई तो वहीं 43.3 प्रतिशत में वृद्धि देखी गई है। हालांकि, प्रजातियों और आबादी के बीच काफी अंतर पाया गया।
शोधकर्ताओं ने पाया कि प्रवासी और बड़े शरीर वाली प्रजातियों ने चूजों को पालने की अवधि के दौरान बढ़ते तापमान के साथ संतान उत्पादन में कमी का अनुभव किया, जबकि छोटे शरीर वाली, गतिहीन प्रजातियों में अधिक संतान पैदा करने की प्रवृत्ति थी। तमिलनाडु के अंबनथपुरम बैहिरा चैरिटीज कॉलेज के प्राणी एवं वन्यजीव विज्ञान विभाग के सहायक प्रोफेसर जे पांडियन ने कहा, “अध्ययन में सामने आया कि शरीर का भार जलवायु परिवर्तन के प्रति अनुकूलन क्षमता के प्रमुख कारकों में से एक है, जिसमें बड़े शरीर के आकार की प्रजातियां छोटी और सुस्त प्रजातियों की तुलना में मौसम की विसंगतियों के साथ तालमेल बिठाने के लिए संघर्ष कर रही हैं।”
शोधकर्ताओं ने कहा कि इसके अलावा ज्यादा अंडे सेने वाली प्रजातियों ने बढ़ते तापमान के साथ प्रजनन में वृद्धि देखी है, जबकि बढ़ते तापमान में एक बार में एक अंडे देने वाले पक्षियों की प्रजातियों में प्रजनन दर में वृद्धि नहीं पायी गयी।
अध्ययन में बताया गया है कि ‘क्लच’ का आकार (प्रति घोंसले में अंडों की संख्या) और सफलता (अंडों से बाहर निकले बच्चे और चूजे) विभिन्न पारिस्थितिकीय कारकों से सकारात्मक रूप से प्रभावित होते हैं।
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