जरुरी जानकारी | परविहन क्षेत्र से उत्सर्जन पर काबू पाये बिना जलवायु परिवर्तन को नहीं रोक जा सकता: कांत

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on Information at LatestLY हिन्दी. नीति आयोग के मुख्य कार्यपालक अधिकारी अमिताभ कांत ने बुधवार को कहा कि पिछले 30 साल में परिवहन क्षेत्र से उत्सर्जन किसी भी अन्य क्षेत्रों के मुकाबले तेजी से बढ़ा है। उन्होंने कहा कि परिवहन क्षेत्र में कार्बन उत्सर्जन पर लगाम लगाये बिना जलवायु परिवर्तन को नहीं रोका जा सकता।

नयी दिल्ली, 24 जून नीति आयोग के मुख्य कार्यपालक अधिकारी अमिताभ कांत ने बुधवार को कहा कि पिछले 30 साल में परिवहन क्षेत्र से उत्सर्जन किसी भी अन्य क्षेत्रों के मुकाबले तेजी से बढ़ा है। उन्होंने कहा कि परिवहन क्षेत्र में कार्बन उत्सर्जन पर लगाम लगाये बिना जलवायु परिवर्तन को नहीं रोका जा सकता।

उन्होंने वीडियो कांफ्रेन्सिंग के जरिये ‘डिकार्बोनाइजिं ट्रांसपोर्ट इन एमर्जिंग एकोनॉमिज’ (उभरती अर्थव्यवस्थाओं में परिवहन क्षेत्र में कार्बन उत्सर्जन पर लगाम- डीटीईई) परियोजना की शुरूआत करते हुए यह बात कही।

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कांत ने कहा कि कोविड-19 की मौजूदा स्थिति को देखते हुए परियोजना खासा महत्वपूर्ण है क्योंकि आने वाले वर्ष में सार्वजनिक परिवहन से लोगों का ध्यान हटेगा।

उन्होंने कहा, ‘‘परिवहन क्षेत्र से उत्सर्जन पर जबतक लगाम नहीं लगायाा जाता, तबतक जलवायु परिवर्तन को नहीं रोका जा सकता। वैश्विक स्तर पर परिवहन क्षेत्र ऊर्जा संबंधित कार्बन डाईआक्साइड (सीओ2) करीब 23 प्रतिशत उत्सर्जित करता है।’’

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कांत ने कहा, ‘‘तत्काल कदम उठाये बिना यह हिस्सेदारी बढ़कर 2030 तक 40 प्रतिशत पर पहुंच सकती है। पिछले 30 साल में परिवहन क्षेत्र से उत्सर्जन किसी भी अन्य क्षेत्रों के मुकाबले तेजी से बढ़ा है।’’

उन्होंने कहा कि देश में वायु प्रदूषण गंभीर चुनौती है और देश की हवा गुणवत्ता समस्या में परिवहन क्षेत्र की भूमिका महत्वपूर्ण है।

कांत ने उत्सर्जन के संदर्भ में बड़ी चुनौती का जिक्र करते हुए कहा कि कुल वाहनों की बिक्री (मोटरसाइकिल समेत) 2007 में 1 करोड़ से बढ़कर 2019 में 3 करोड़ पहुंच गयी। 2030 तक सड़कों पर वाहनों की संख्या दोगुनी होकर करीब 20 करोड़ पहुंच जाने का अनुमान है।’’

नीति आयोग के सीईओ ने कहा कि परिवहन क्षेत्र से उत्सर्जन पर लगाम लगने से सभी के लिये स्वच्छ, स्वास्थ्यवर्धक और बेहतर भविष्य सृजित होगा।

उन्होंने कहा कि डीटीईई परियोजना से देश जलवायु संबंधी लक्ष्यों को पूरा कर सकेगा।

कार्यक्रम में शामिल इंटरनेशनल ट्रांसपोर्ट फोरम (आईटीएफ) के महासचिव यंग ते किम ने कहा कि डिजिटलीकरण, संपर्क, सुरक्षा, सार्वभौमिक पहुंच और कार्बन उत्सर्जन को काबू में करना पांच चीजें हैं जिससे आईटीएफ सदस्य देशों के साथ गठजोड़ से निपटा जा सकेगा।

आवास एवं शहरी मामलों के सचिव दुर्गा शंकर मिश्रा ने कहा कि कोविड-19 महामारी के दौरान सार्वजनिक परिवहन के समक्ष बड़ी चुनौती आयी है।

उन्होंने कहा, ‘‘ऐसे में वाहनों के पंजीकरण में बड़ी वृद्धि की संभावना है जो जनसंख्या वृद्धि से भी अधिक होगी। यह पर्यावरण के लिये खतरनाक हो सकता है।’’

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