पुलिस ने बताया कि प्रदर्शनकारियों ने पथराव किया और दर्जनों कारों को आग के हवाले कर दिया। उसने बताया कि यह घटनाक्रम रविवार को शुरू हुआ और हिंसक झड़पें बीती रात तक जारी रहीं।
पुलिस ने बताया कि इस्लाम विरोधी एक कार्यकर्ता ने रविवार को कुरान की एक प्रति जला दी, जिसके बाद झड़पें शुरू हुईं। गुस्साई भीड़ ने उसे (कार्यकर्ता को) रोकने की कोशिश की।
उसने बताया कि कम से कम तीन लोगों को हिरासत में लिया गया है।
सोमवार तड़के एक भीड़ ने टायर जलाए और उनमें से कुछ युवाओं को माल्मो के रोजेनगार्द इलाके में उपद्रव करते देखा गया, जहां पहले भी इस तरह की झड़पें हुई हैं। वहां कुरान की प्रति जलाये जाने से संबंधित कई बैनर लगे हुए थे।
मालमो के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी पेत्रा स्तेंकुला ने कहा, ‘‘मैं समझता हूं कि इस तरह की भीड़ भावना में बह जाती है, लेकिन हम उपद्रव और रविवार को हुई हिंसा जैसे कृत्यों को बर्दाश्त नहीं कर सकते।’’
उन्होंने कहा, ‘‘रोजेनगार्द में एक बार फिर से हिंसा और तोड़फोड़ की गतिविधियां देखना अफसोसजनक है।’’
मोमिका नाम के इराकी शरणार्थी ने इस्लाम विरोधी सिलसिलेवार प्रदर्शनों के दौरान कई बार कुरान की बेअदबी की है। इस तरह के ज्यादातर कृत्य स्टॉकहोम में किये गए। इससे मुस्लिम देशों में रोष है। स्वीडिश पुलिस ने अभिव्यक्ति की आजादी का हवाला देते हुए उसे ऐसा करने दिया।
हाल में, कुरान की प्रति जलाये जाने के विरोध में स्वीडिश राजनयिक मिशनों पर हमले किये गये और इस्लामी चरमपंथियों ने धमकियां दीं।
स्वीडन ने 1970 के दशक में अपने अंतिम ईशनिंदा कानून को समाप्त कर दिया था और सरकार ने कहा कि इसे फिर से लागू करने का उसका कोई इरादा नहीं है।
हालांकि, सरकार ने राष्ट्रीय सुरक्षा की चिंताओं को लेकर प्रदर्शनों की अनुमति खारिज करने के लिए पुलिस को सक्षम बनाने की खातिर कानूनी संभावनाएं तलाशने की घोषणा की है।
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