विदेश की खबरें | कोविड के बढ़ते मामलों के बीच इस साल भी सादे तरीके से मना क्रिसमस

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on world at LatestLY हिन्दी. कोरोना वायरस के नए स्वरूप ओमीक्रोन की वजह से एशिया के कुछ देशों ने संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए पाबंदी लगाई थी जबकि यूरोप और अन्य स्थानों पर सरकारों ने अपने नागरिकों को मास्क पहनने और स्वेच्छा से कार्यक्रमों में लोगों की संख्या सीमित करने की सलाह दी थी और मामले बढ़ने के बावजूद लोगों से स्वयं स्थिति का आकलन करने की अपील की थी।

कोरोना वायरस के नए स्वरूप ओमीक्रोन की वजह से एशिया के कुछ देशों ने संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए पाबंदी लगाई थी जबकि यूरोप और अन्य स्थानों पर सरकारों ने अपने नागरिकों को मास्क पहनने और स्वेच्छा से कार्यक्रमों में लोगों की संख्या सीमित करने की सलाह दी थी और मामले बढ़ने के बावजूद लोगों से स्वयं स्थिति का आकलन करने की अपील की थी।

फ्रांस के शहर मर्से के अस्पताल में गहन चिकित्सा इकाई की प्रमुख डॉ. जूलियन कार्वेली ने बताया कि अधिकतर मरीज वे हैं जिन्होंने कोविड-19 का टीका नहीं लगवाया है और उसके सहकर्मी थक चुके हैं या स्वयं संक्रमित होने की वजह से काम नहीं कर सकते हैं। उन्होंने बताया कि एक और क्रिसमस की पूर्व संध्या हमारे कर्मी मशीन से कोविड-19 मरीजों की सांसे बचाते हुए गुजारे। ‘‘ हमें भय है कि यहां पर पर्याप्त जगह नहीं होगी।’’

ब्रिटेन में दैनिकों मामलों की संख्या एकबार और रिकॉर्ड तोड़कर 1,22,186 पहुंचने के बाद हजारों लोग पूरे इंग्लैंड में क्रिसमस से पहले टीके की बूस्टर खुराक लगवाते नजर आए।

पोप फ्रांसीस ने अपने क्रिसमस संबोधन का इस्तेमाल गरीब देशों के लोगों तक टीके की खुराक पहुंचाने की प्रार्थना करने के लिए किया। अमीर देशों में जहां 90 प्रतिशत लोगों का पूर्ण टीकाकरण हो चुका है। वहीं अफ्रीका में अबतक महज 8.9 प्रतिशत लोगों को टीके की दोनों खुराक मिली है। इस प्रकार अफ्रीका सबसे कम टीकाकरण वाला महाद्वीप है।

इस बार क्रिसमस के दिन दोपहर को होने वाले पोप के संबोधन में कुछ हजार लोग ही शामिल हो सके। इटली द्वारा क्रिसमस लॉकडाउन लगाने की वजह से पोप का वार्षिक ‘‘ उरबी एत ओरबी’’संबोधन बंद स्थान में हुआ।

कैमरून से साइप्रस शरण की आस में आई कैथोलिक महिला ने कहा कि उनकी क्रिसमस के लिए कोई विशेष योजना नहीं है क्योंकि जश्न का कोई महौल नहीं है। छह साल का बच्चा उनके पास नहीं है जिसे वह घर छोड़कर आई हैं।

वहीं, एशियाई में कैथोलिक ईसाई की सबसे बड़ी आबादी वाले देश फिलीपीन में हजारों लोगों ने बिना आवास, बिजली या पर्याप्त भोजन के क्रिसमस मनाया क्योंकि पिछले हफ्ते आए शक्तिशाली तूफान ने मध्य प्रांत में भारी तबाही मचाई है और 375 लोगों की इसमें जान गई है।

बहोल प्रांत के गर्वनर आर्थर याप ने बताया कि तूफान में करीब 100 लोगों की मौत हुई है और करीब 1.5 लाख मकान क्षतिग्रस्त हुए हैं। अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों से मदद मांगी गई है।

दक्षिण कोरिया में सामाजिक दूरी के नियमों की वजह से गिरिजाघरों की क्षमता से 70 प्रतिशत कम श्रद्धालु ही प्रार्थना में शामिल हो सके और इसके लिए भी पूर्ण टीकाकरण की शर्त थी। दक्षिण कोरिया में संक्रमण और मौतों के मामले लगातार बढ़ रहे हैं जिसके बाद उसे कड़े प्रतिबंध लगाने पड़े हैं।

ऑस्ट्रेलिया में भी कोविड-19 के बढ़ते मामलों के मद्देनजर राज्यों को मास्क और अन्य उपायों को अनिवार्य करना पड़ा है। भारत में भी सादे तरीके से क्रिसमस मनाया गया और भीड़ से ज्यादा सजावट को प्रमुखता से की गई। अधिकारियों ने दिल्ली- मुंबई सहित पांच बड़े शहरों में रात का कर्फ्यू और अन्य पाबंदियां लगाई है। मुंबई में लोगों ने मध्य रात्रि की प्रार्थना में हिस्सा लिया लेकिन उनकी संख्या सीमित थी।

क्रिसमस की छुट्टियों में यात्रा करने वालों को भी परेशानी का सामना करना पड़ा क्योंकि दुनियाभर की विमानन कंपनियों ने ओमीक्रोन और कर्मियों की कमी के चलते सैकड़ों उड़ाने रद्द की।

फ्लाइट वेयर के मुताबिक शुक्रवार और शनिवार को निर्धारित 3900 से अधिक उड़ाने रद्द की गई जिनमें से आधी उड़ाने चीनी विमानन कंपनियों की थी। अमेरिका में करीब 1100 उड़ाने रद्द हुईं।

गत दो साल से महामारी का कहर पूरी दुनिया पर है लेकिन न्यूजीलैंड ने अलग-थलग अपनी भौगोलिक स्थिति का इस्तेमाल इससे बचने के लिए किया और इसका नतीजा है कि यहां पर सीमित पाबंदियों के बीच लोगों ने क्रिसमस मनाया। हालांकि, यहां भी दूसरे देशों से आने वाले परिवार के सदस्यों की कुर्सियां खाली देखी गई।

फीजी में लोगों ने धार्मिक हर्षोल्लास के साथ क्रिसमस मनाया।

(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)

Share Now