विदेश की खबरें | कई देशों में सैन्य अड्डे स्थापित करने की योजना बना रहा है चीन : पेंटागन

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वाशिंगटन, दो सितम्बर भारत के तीन पड़ोसी देशों समेत करीब एक दर्जन देशों में चीन मजबूत ठिकाना स्थापित करने का प्रयास कर रहा है ताकि उसकी पीएलए लंबी दूरी तक अपना सैन्य दबदबा बनाये रख सके । पेंटागन की एक रिपोर्ट में यह दावा किया गया है।

पेंटागन ने मंगलवार को इस रिपोर्ट में दावा किया कि भारत के तीन पड़ोसी देशों--पाकिस्तान, श्रीलंका और म्यामां के अलावा चीन थाईलैंड, सिंगापुर, इंडोनेशिया, संयुक्त अरब अमीरात, केन्या, सेशल्स, तंजानिया, अंगोला और तजाकिस्तान में अपने सैन्य ठिकाने बनाने पर विचार कर रहा है।

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पेंटागन ने अपनी वार्षिक रिपोर्ट ‘मिलिट्री एंड सिक्योरिटी डेवलप्मेंटस इंवॉल्विंग द पीपल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना (पीआरसी) 2020’ में यह जानकारी दी। उसने यह रिपोर्ट मंगलवार को अमेरिकी कांग्रेस को सौंपी थी।

पेंटागन ने कहा कि चीन के ये संभावित चीनी ठिकाने जिबूती में चीनी सैन्य अड्डे के अतिरिक्त हैं, जिसका उद्देश्य नौसेना, वायु सेना और जमीनी बल की कार्यों को और मजबूती प्रदान करना है।

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पेंटागन ने रिपोर्ट में कहा, ‘‘ वैश्विक पीएलए (पीपल्स लिबरेशन आर्मी) के सैन्य अड्डों का नेटवर्क अमेरिकी सैन्य अभियानों में हस्तक्षेप कर सकता है और पीआरसी के वैश्विक सैन्य उद्देश्यों के तहत अमेरिका के खिलाफ आक्रामक अभियानों में सहयोग पहुंचा सकता है।’’

उसने कहा कि चीन ने संभवत: पहले ही नामीबिया, वनुआटू और सोलोमन द्वीपों पर अपना कब्जा जमा लिया है।

उसका कहना है कि पीएलए की योजना के अनुसार उसके लिए ज्ञात संभावित महत्वपूर्ण क्षेत्र चीन से लेकर होर्मुज की खाड़ी, अफ्रीका और प्रशांत द्वीपों तक गुजरने वाले उसके समुद्री मार्ग से सटे हुए हैं।

पेंटागन ने कहा कि बीजिंग अपने विकास के लिए वैश्विक परिवहन और व्यापार संबंधों का विस्तार करने और अपनी परिधि तथा उसके बाहर देशों के साथ अपने आर्थिक एकीकरण को गहरा करने की राष्ट्रीय कायाकल्प की अपनी रणनीति को सफल बनाने के लिए ‘एक सीमा एक सड़क’ (ओबीओआर) का सहारा लेता है।

पहली बार 2013 में घोषित चीन की ओबीओआर पहल राष्ट्रपति शी जिनपिंग की अहम विदेशी और आर्थिक नीति है।।

पेंटागन ने विदेशों में चीन के सैन्य अड्डों के संबंध में कहा, ‘‘ मेजबान देश पीआरसी के सैन्य अभियानों में अहम भूमिका निभा सकते हैं क्योंकि चीनी अधिकारी अक्सर यह स्वीकारते हैं कि मेजबान देश के साथ दीर्घकालिक संबंध उसके सैन्य अड्डों की सफलता के लिए अहम है।’’

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