विदेश की खबरें | चीन, भारत गलवान घाटी में हुए संघर्ष से उत्पन्न ‘गंभीर मामले’ से ’उचित तरीके’ से निपटेंगे: अधिकारी
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on world at LatestLY हिन्दी. चीन के एक शीर्ष अधिकारी ने बृहस्पतिवार को कहा कि गलवान घाटी में संघर्ष से उत्पन्न ‘‘गंभीर मामले’’ से भारत और चीन ‘‘उचित तरीके’’ से निपटेंगे तथा दोनों पक्ष जल्द से जल्द तनाव कम करने के लिए कूटनीतिक एवं सैन्य तंत्रों के माध्यम से एक-दूसरे के संपर्क और समन्वय में हैं।
बीजिंग, 18 जून चीन के एक शीर्ष अधिकारी ने बृहस्पतिवार को कहा कि गलवान घाटी में संघर्ष से उत्पन्न ‘‘गंभीर मामले’’ से भारत और चीन ‘‘उचित तरीके’’ से निपटेंगे तथा दोनों पक्ष जल्द से जल्द तनाव कम करने के लिए कूटनीतिक एवं सैन्य तंत्रों के माध्यम से एक-दूसरे के संपर्क और समन्वय में हैं।
गलवान घाटी में सोमवार की रात चीनी सैनिकों के साथ झड़प में कम से कम 20 भारतीय सैनिक शहीद हो गए थे। चीन के अधिकारिक मीडिया ने बीजिंग के सैनिकों के हताहत होने की बात भी स्वीकार की है, लेकिन कितने सैनिक मारे गए या घायल हुए, यह उल्लेख नहीं किया है।
चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता झाओ लिजान ने बृहस्पतिवार को कहा कि इस घटना के बाद दोनों पक्ष मामले पर कूटनीतिक एवं सैन्य तंत्रों के माध्यम से एक-दूसरे के संपर्क और समन्वय में हैं।
अधिकारी ने कहा, ‘‘दोनों पक्ष घाटी (गलवान) में संघर्ष से उत्पन्न गंभीर मामले से उचित तरीके से निपटने, कमांडर स्तर की वार्ता में सर्वसम्मति पर संयुक्त रूप से नजर रखने और तनाव को जल्द से जल्द कम करने तथा शांति एवं स्थिरता की रक्षा करने पर सहमत हैं।’’
झाओ ने कहा, ‘‘वर्तमान में, कुल मिलाकर स्थिति स्थिर एवं नियंत्रण योग्य है। हमारा मानना है कि दोनों देशों के नेताओं के बीच बनी सर्वसम्मति के तहत दोनों पक्ष संबंधित मामले से लिपट सकते हैं, सीमावर्ती क्षेत्रों में संयुक्त रूप से शांति और स्थिरता की रक्षा कर सकते हैं और द्विपक्षीय संबंधों के ठोस विकास के लिए काम कर सकते हैं।’’
चीन के विदेश मंत्री वांग यी ने बुधवार को विदेश मंत्री एस जयशंकर से बात की थी और दोनों पक्ष ‘‘जल्द से जल्द’’ तनाव को ‘‘कम करने’’ तथा दोनों देशों के बीच समझौते के तहत सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति एवं स्थिरता बनाए रखने पर सहमत हुए थे।
वांग और जयशंकर के बीच टेलीफोन पर हुई बातचीत के बाद चीनी विदेश मंत्रालय द्वारा बुधवार को जारी संपूर्ण बयान को प्रवक्ता ने मीडिया ब्रीफिंग के दौरान पढ़ा।
बातचीत के दौरान जयशंकर ने गलवान घाटी में हुए हिंसक संघर्ष पर वांग को भारत की कड़ी आपत्ति से अवगत कराया और कहा कि अभूतपूर्व घटनाक्रम का ‘‘द्विपक्षीय संबंधों’’ पर गंभीर असर पड़ेगा।
नयी दिल्ली में विदेश मंत्रालय द्वारा जारी बयान में कहा गया कि जयशंकर ने चीन से अपनी कार्रवाइयों का पुन: आकलन करने और सुधारात्मक कदम उठाने को कहा।
जयशंकर ने वांग के साथ बातचीत में कहा, ‘‘चीनी पक्ष ने पूर्व नियोजित और योजनाबद्ध कार्रवाई की जो हिंसा और सैनिकों के हताहत होने के लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार है। यह यथास्थिति को न बदलने को लेकर हमारे बीच हुए समझौतों का उल्लंघन कर जमीनी तथ्यों को बदलने का इरादा प्रतीत होता है।’’
चीन के विदेश मंत्रालय ने यहां एक बयान में कहा कि दोनों पक्ष गलवान घाटी में संघर्ष से उत्पन्न गंभीर स्थिति से ‘‘उचित तरीके’’ से निपटने, दोनों पक्षों के बीच सैन्य स्तर की बैठकों में बनी सर्वसम्मति का संयुक्त रूप से पालन करने, ‘‘जमीन पर तनाव को जल्द से जल्द कम करने’’ और दोनों देशों के बीच अब तक हुए समझौतों के अनुरूप सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति एवं स्थिरता बनाए रखने पर सहमत हैं।
गलवान घाटी और पैंगोंग सो, डेमचोक और दौलत बेग ओल्डी सहित पूर्वी लद्दाख के कुछ अन्य क्षेत्रों में बड़ी संख्या में दोनों देशों के सैनिक पिछले पांच सप्ताह से आमने-सामने तैनात हैं।
सोमवार को हुआ संघर्ष नाथू ला में 1967 में हुई उस झड़प के बाद सबसे बड़ा संघर्ष है जिसमें चीन के 300 से अधिक सैनिक मारे गए थे और भारत के लगभग 80 जवान शहीद हो गए थे।
(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)