देश की खबरें | बाल देखभाल केन्द्रों को हर बच्चे के लिये औसतन छह लाख रुपये विदेशी चंदा मिला: एनसीपीआर

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एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

नयी दिल्ली, 18 नवंबर राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (एनसीपीसीआर) ने कहा है कि गैर-सरकारी संगठनों द्वारा चलाए जा रहे 600 से अधिक बाल देखभाल केन्द्रों को 2018-19 में प्रति बच्चा छह लाख रुपये तक विदेशी चंदा प्राप्त हुआ है, जो कि औसत खर्च के मुकाबले काफी अधिक है। इन केन्द्रों में कुल 28 हजार बच्चे हैं।

शीर्ष बाल अधिकार निकाय एनसीपीसीआर ने यह जानकारी देते हुए संभावित वित्तीय अनियमितताओं पर चिंता व्यक्त की।

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आयोग के अध्यक्ष प्रियांक कानूनगो के अनुसार सूचना के यादृच्छिक विश्लेषण के मुताबिक आयोग ने पाया है कि 2018-19 में उन्हें प्रति बच्चा औसतन 2.12 लाख से 6.60 लाख रुपये तक की धनराशि मिली है।

आयोग ने कहा कि अब वह इन गैर-सरकारी संगठनों के विदेशी चंदे और खर्च का पता लगाने के लिये देशभर में कवायद शुरू करने की योजना बना रहा है। इस कवायद के तहत गृह मंत्रालय की विदेशी चंदा नियमन अधिनियम (एफसीआरए) वेबसाइट पर उपलब्ध आंकड़ों का इस्तेमाल किया गया है।

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बाल संरक्षण योजना के अनुसार सभी आवर्ती खर्चों को मिलाकर हर बच्चे पर प्रतिवर्ष 60 हजार रुपये खर्च होने चाहिये।

कानूनगो ने कहा, ''एनजीओ द्वारा इतनी बड़ी मात्रा में धन एकत्रित किये जाने से कोष के संभावित गबन को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। हम देशव्यापी कवायद शुरू करके उसी के अनुसार कार्रवाई करेंगे। ''

आयोग के अनुसार आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, केरल, कर्नाटक और तमिलनाडु के बाल देखभाल केन्द्रों के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया है।

आयोग के मुताबिक आंध्र प्रदेश में एनजीओ द्वारा चलाए जा रहे 145 बाल देखभाल केन्द्रों को 6,202 बच्चों के लिये 409 करोड़ रुपये प्राप्त हुए हैं। इस लिहाज से एक बच्चे पर प्रतिवर्ष 6.6 लाख रुपये खर्च होने चाहिये।

तेलंगाना में ऐसे 67 केन्द्रों को 3,735 बच्चों के लिये 145 करोड़ रुपये मिले हैं, जिसके तहत एक बच्चे पर 3.88 लाख रुपये खर्च होने चाहिये।

केरल में 107 केन्द्रों को 4,242 बच्चों के लिये 85.39 करोड़ रुपये हासिल हुए हैं, जिसका मतलब है कि एक बच्चे पर 2.01 लाख रुपये खर्च होने चाहिये।

कर्नाटक में 45 केन्द्रों को 3,111 बच्चों के लिये 66.62 करोड़ रुपये मिले हैं। एक बच्चे पर 2.14 लाख रुपये खर्च होने चाहिये।

तमिलनाडु में 274 केन्द्रों को 1,172 बच्चों के लिये 248 करोड़ रुपये मिले हैं, जिसके अनुसार एक बच्चे पर 2.12 लाख रुपये खर्च होने चाहिये।

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