देश की खबरें | बद्रीनाथ के मुख्य पुजारी ने जोशीमठ, हिमालयी क्षेत्र को प्रभावित करने वाले कार्य रोकने का आग्रह किया
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कन्नूर (केरल), 15 जनवरी उत्तराखंड के जोशीमठ में भूमि धंसने पर चिंता व्यक्त करते हुए प्रसिद्ध बद्रीनाथ मंदिर के रावल या प्रमुख पुजारी ईश्वरप्रसाद नंबूदरी ने जोशीमठ में प्रकृति और लोगों को नुकसान पहुंचाने वाली परियोजनाओं को रोकने का अधिकारियों से अनुरोध किया है।
करीब 1,830 मीटर की ऊंचाई पर स्थित 17,000 की आबादी वाले जोशीमठ में सैकड़ों घरों और इमारतों में दरारें आने के लिए साफ तौर पर जमीन धंसने को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है। जोशीमठ हिंदू और सिख तीर्थस्थलों के लिए एक महत्वपूर्ण प्रवेश द्वार के रूप में कार्य करता है और हिमालय के हिस्सों में पर्वतारोहियों को भी आकर्षित करता है।
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) द्वारा जारी उपग्रह तस्वीरों से जोशीमठ में भूमि धंसने की चिंता शुक्रवार को और बढ़ गई, जिसमें दिखाया गया कि जोशीमठ 12 दिनों में 5.4 सेंटीमीटर धंस गया।
सिमटती धरती की तस्वीरों के कारण हंगामा खड़ा हो गया। राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एनडीएमए) और उत्तराखंड सरकार ने अंतरिक्ष एजेंसी और कई सरकारी संस्थानों को निर्देश दिया है कि वे जोशीमठ की स्थिति पर मीडिया के साथ बातचीत न करें या सोशल मीडिया पर जानकारी साझा न करें।
रावल ने कहा, ‘‘हम धरती माता की पूजा करते हैं। जोशीमठ में विकास चिंता का विषय है। पृथ्वी की दृष्टि से हानिकारक विकास परियोजनाओं को रोका जाना चाहिए। ऐसी किसी परियोजना का कोई मतलब नहीं है कि जो पारिस्थितिक रूप से नाजुक धरती और यहां के लोगों के लिए समस्या पैदा करे।’’
बद्रीनाथ के रावल उत्तरी केरल के नंबूदरी हैं। दीक्षा की इस परंपरा की शुरुआत सदियों पहले स्वयं ऋषि श्री शंकराचार्य ने शुरू की थी।
रावल ने ‘पीटीआई-’ से कहा कि लोगों के जीवन की रक्षा करते हुए विकास कार्यों को लागू किया जाना चाहिए। गत वर्ष 19 नवंबर को सर्दियों के मौसम से पहले बद्रीनाथ मंदिर के कपाट बंद होने के बाद रावल अपने गृह राज्य लौटे हैं।
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