देश की खबरें | गार्गी कॉलेज छेड़छाड़ मामले में छह हफ्ते में आरोपपत्र दाखिल किए जाएंगे : पुलिस ने अदालत से कहा

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. दिल्ली पुलिस ने शुक्रवार को दिल्ली उच्च न्यायालय को बताया कि वह फरवरी 2020 में गार्गी कॉलेज में एक सांस्कृतिक उत्सव के दौरान छात्राओं के साथ कथित छेड़छाड़ के मामले में छह सप्ताह के भीतर आरोपपत्र दाखिल करेगी।

नयी दिल्ली, चार नवंबर दिल्ली पुलिस ने शुक्रवार को दिल्ली उच्च न्यायालय को बताया कि वह फरवरी 2020 में गार्गी कॉलेज में एक सांस्कृतिक उत्सव के दौरान छात्राओं के साथ कथित छेड़छाड़ के मामले में छह सप्ताह के भीतर आरोपपत्र दाखिल करेगी।

मुख्य न्यायाधीश सतीश चंद्र शर्मा और न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद की पीठ वकील एम एल शर्मा की याचिका पर सुनवाई कर रही थी जिन्होंने इस घटना की अदालत की निगरानी में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) की जांच के लिए निर्देश देने का अनुरोध किया है।

अदालत को सूचित किया गया कि इस मामले में 18 लोगों को गिरफ्तार किया गया था और सभी सीसीटीवी फुटेज जब्त कर लिए गए थे। आरोपपत्र दाखिल करने में देरी हो रही है क्योंकि विद्यार्थी महामारी की शुरुआत के बाद घर चले गए थे। पीठ ने दिल्ली पुलिस को अपना जवाब दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय दिया और एजेंसी से मामले में आरोपपत्र दाखिल करने को कहा।

सरकार की तरफ से पेश अतिरिक्त स्थायी वकील नंदिता राव ने अदालत को बताया कि मामले में 450 लोगों की जांच की गई और दंड प्रक्रिया संहिता (सीआरपीसी) की धारा 161 (पुलिस द्वारा गवाहों से पूछताछ) के तहत लड़कियों के बयान दर्ज किए गए।

उन्होंने कहा, ‘‘आरोपपत्र दाखिल करने में इसलिए देरी हुई है क्योंकि यह घटना कॉलेज में हुई थी और फिर कोविड के कारण सभी लड़कियां अपने गृह नगर वापस चली गई थीं। इसलिए हम सीआरपीसी की (धारा) 164 (मजिस्ट्रेट के समक्ष बयानों की रिकॉर्डिंग) के तहत बयान दर्ज कराने का प्रयास कर रहे हैं...छह सप्ताह के भीतर इसे दाखिल किया जाएगा।’’

अदालत ने मामले में प्रतिवादी की वकील को जवाब दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय दिया।

छह फरवरी, 2020 को लोगों के एक समूह ने ‘रेवेरी’ फेस्ट के दौरान गार्गी कॉलेज में तोड़-फोड़ की और कथित तौर पर उपस्थित छात्राओं से छेड़छाड़ की। छात्राओं ने दावा किया था कि घटना के समय सुरक्षा अधिकारियों ने कोई कदम नहीं उठाया।

यह घटना तब सामने आई जब कुछ छात्राओं ने इंस्टाग्राम पर घटना को बयां किया और आरोप लगाया कि सुरक्षाकर्मियों ने उपद्रवी समूहों को नियंत्रित करने के लिए कुछ नहीं किया।

घटना के बाद याचिकाकर्ता ने दायर जनहित याचिका में आरोप लगाया कि यह दिल्ली चुनाव की पृष्ठभूमि में रची गई एक सुनियोजित राजनीतिक और आपराधिक साजिश थी और घटना के बाद कोई कार्रवाई नहीं की गई। अदालत की निगरानी में सीबीआई जांच की मांग के अलावा, याचिकाकर्ता ने कॉलेज परिसर के सभी वीडियो रिकॉर्डिंग और सीसीटीवी कैमरे के फुटेज को सुरक्षित रखने के साथ-साथ जिम्मेदार लोगों की गिरफ्तारी की मांग की है।

पुलिस के अनुसार, भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 452 (बिना अनुमति के प्रवेश करना, किसी व्यक्ति को चोट पहुंचाना, गलत तरीके से रोककर रखना), 354 (महिला की मर्यादा भंग करने के इरादे से हमला), 509 (महिला की गरिमा को भंग करने के इरादे से आपत्तिजनक शब्दों का इस्तेमाल, अपमानजनक इशारे करना) के साथ 34 (समान मंशा) के तहत मामला दर्ज किया गया था। मामले की अगली सुनवाई 18 जनवरी को होगी।

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