जरुरी जानकारी | भूमि सीमा साझा करने वाले देशों के बोलीदाताओं के पंजीकरण के प्रारूप में बदलाव

नयी दिल्ली, एक मई भारत ने सार्वजनिक खरीद के लिये भूमि सीमा साझा करने वाले देशों से बोली लगाने वाली इकाइयों के लिये आवेदन के प्रारूप को संशोधित किया है। इसमें वे इकाइयां भी शामिल हैं, जिनका उन देशों में लाभकारी स्वामित्व है।

इसके अनुसार, आवेदकों को सूचित किया जाता है कि अब उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी) में संयुक्त सचिव (सार्वजनिक खरीद विभाग) के कार्यालय में निर्धारित प्रारूप में आवेदन भौतिक रूप में जमा करना आवश्यक है।

डीपीआईआईटी के कार्यालय ज्ञापन में कहा गया है कि संशोधन के तहत अगर विनिर्माता, सेवा प्रदाता, ठेकेदार तथा प्रौद्योगिकी हस्तांतरण करने वाली इकाई अलग हैं, तो बोलीदाता को उन सबके बारे में पूरा ब्योरा देना होगा।

प्रौद्योगिकी हस्तांतरण (टीओटी) व्यवस्था होने की स्थिति में उन्हें संवेदनशील क्षेत्रों और प्रौद्योगिकियों के बारे में ब्योरा भी साझा करना होगा।

संवेदनशील क्षेत्रों को दो समूह में वर्गीकृत किया गया है। इसमें एक परमाणु ऊर्जा, रक्षा तथा अंतरिक्ष तथा अन्य हैं। तथा नागर विमानन, इलेक्ट्रॉनिक्स, कृषि और औषधि को दूसरी श्रेणी में रखा गया है।

बोलीदाता को जो ब्योरा देना है, उसमें कंपनी के नाम और बोलीदाता कंपनी के वास्तविक लाभार्थी व्यक्ति का नाम, जिस देश में पंजीकरण है उसका नाम, बोलीदाता तथा लाभार्थी व्यक्ति के बीच मध्यस्थ कंपनियों के बारे में जानकारी, उनके बीच रिश्ते आदि की जानकारी शामिल होगी।

उल्लेखनीय है कि सरकार ने अप्रैल, 2020 में भूमि सीमा साझा करने वाले देशों से आने वाले विदेशी निवेश के लिये पहले से मंजूरी को अनिवार्य कर दिया था। इसका मकसद कोविड-19 महामारी के बीच घरेलू कंपनियों की स्थिति का फायदा उठाकर उसके अधिग्रहण के अवसर पर रोक लगाना था।

भारत के साथ भूमि सीमा साझा करने वाले देश चीन, बांग्लादेश, पाकिस्तान, भूटान, नेपाल, म्यामां और अफगानिस्तान हैं। उस निर्णय के तहत इन देशों से एफडीआई प्रस्ताव को भारत में किसी भी क्षेत्र में निवेश के लिये सरकार की मंजूरी की जरूरत है।

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