नयी दिल्ली, 16 दिसंबर केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण (कैट) ने दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के जराचिकित्सा (जेरियाट्रिक मेडिसिन) विभाग में सहायक प्रोफेसर के नियमित पद पर चयन नहीं होने के खिलाफ एक चिकित्सक की याचिका पर केंद्र सरकर से रुख स्पष्ट करने के लिए कहा है।
अधिकारण ने डॉ. विजय कुमार की याचिका पर केंद्र और एम्स को नोटिस जारी किया है। याचिकाकर्ता ने दावा किया कि मनमाने तरीके से उसका चयन नहीं करने के फैसले को रद्द किया जा सकता है।
अधिकरण ने 14 दिसंबर के एक आदेश में कहा, ‘‘हम प्रतिवादियों को नोटिस जारी करते हैं, जिसका जवाब पांच फरवरी, 2024 तक देना है। वीएसआर कृष्णा और प्रदीप कुमार शर्मा, विद्वान वकील अपने संबंधित प्रतिवादियों की ओर से नोटिस स्वीकार करें।’’
याचिका में कहा गया है कि दिल्ली स्थित एम्स की ओर से वर्ष 2021 में विभिन्न विभाग के संकाय के कई नियमित पदों के लिए विज्ञापन जारी हुआ था। इसमें कहा गया है कि याचिकाकर्ता अभ्यर्थी ने खुद को पद के लिए योग्य पाकर अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) श्रेणी के तहत साहयक प्रोफेसर पद के लिए आवेदन किया था, लेकिन उसका चयन नहीं किया गया।
इसके बाद याचिकाकर्ता ने अपनी शिकायत के साथ संस्थान के शासी निकाय से संपर्क किया, लेकिन उसकी शिकायत को खारिज कर दिया गया।
याचिका में कहा गया है कि जिस दिन एम्स द्वारा विज्ञापन जारी किया गया था, आवेदक पहले से ही वहां अनुबंध पर जराचिकित्सा विभाग में सहायक प्रोफेसर के रूप में संविदा पर काम कर रहा था।
वकील राजेंद्र यादव के जरिये दायर याचिका में कहा गया, ‘‘पद के लिए निर्धारित पात्रता मानदंडों को पूरा करने वाले आवेदक को नौ अक्टूबर, 2022 को साक्षात्कार के लिए बुलाया गया था। लेकिन स्थायी चयन समिति ने ओबीसी श्रेणी के तहत जराचिकित्सा विभाग में सहायक प्रोफेसर के पद के लिए उनके नाम की सिफारिश नहीं की और उक्त पद रिक्त रखने का फैसला किया गया।’’
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