ताजा खबरें | व्यावसायिक कोयला खनन नीति पर केंद्र कर रहा झारखंड सरकार को समझाने की कोशिश

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नयी दिल्ली, 15 मार्च केंद्र सरकार ने सोमवार को कहा कि घरेलू उत्पादन और आयात पर निर्भरता कम करने के मकसद से तैयार की गई व्यावसायिक कोयला खनन नीति के फायदों के बारे में वह झारखंड सरकार को समझाने की कोशिश कर रही है।

केंद्रीय कोयला मंत्री प्रल्हाद जोशी ने राज्यसभा में प्रश्नकाल के दौरान कहा कि देश में कोयले के सबसे बड़े भंडार होने के बावजूद उसे ऊर्जा उत्पादन के लिए तापीय कोयले के आयात पर निर्भर रहना पड़ता है जो किसी अभिशाप से कम नहीं है।

उन्होंने कहा कि आयात पर निर्भरता का कारण कोयला खदानों के आवंटन पर प्रतिबंध है।

पूरक प्रश्नों के जवाब में उन्होंने कहा कि राज्यों के साथ मशविरे के बाद केंद्र सरकार व्यावसायिक कोयला खनन नीति लेकर आई है जिसके तहत कोयला खदानों को नीलामी के जरिए निजी निवेशकों के लिए खोल दिया जाता है।

जोशी ने कहा, ‘‘हमने राज्य सरकारों से मशविरा किया है। यहां तक कि हमने झारखंड सरकार से भी मशविरा किया है। प्रारंभ में उन्होंने इसकी सराहना की लेकिन बाद में उन्होंने इसका विरोध किया। लेकिन हम राज्य सरकार के लगातार संपर्क में हैं और विचार-विमर्श कर रहे हैं।’’

उन्होंने कहा कि सरकार झारखंड सरकार को समझाने के लिए विचार विमर्श कर रही है क्योंकि यह नीति राज्य के हित में है। इससे मिलने वाला राजस्व राज्य के खाते में जाएगा ना कि केंद्र के।

केंद्रीय मंत्री झारखंड से भाजपा के सदस्य समीर ओरांव के एक सवाल का जवाब दे रहे थे। उन्होंने सवाल किया था कि इस नीति का झारखंड सरकार द्वारा विरोध किए जाने के चलते क्या सरकार को आयात में परेशानियां आ रही है।

ब्रजेन्द्र

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