देश की खबरें | केन्द्र ने न्यायालय से कहा: जम्मू कश्मीर में 4जी इंटरनेट की बहाली के बारे मे बयानों पर गौर करेंगे
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. केन्द्र ने मंगलवार को उच्चतम न्यायालय ने कहा कि वह जम्मू कश्मीर के उपराज्यपाल और भाजपा नेता राम माधव के उन बयानों की सत्यता का पता लगायेगा जिनके अनुसार घाटी में 4जी इंटरनेट सेवा बहाल की जा सकती है। केन्द्र ने इसके साथ ही गैर सरकारी संगठन की याचिका पर जवाब दाखिल करने के लिये कुछ समय देने का अनुरोध किया।
नयी दिल्ली, 28 जुलाई केन्द्र ने मंगलवार को उच्चतम न्यायालय ने कहा कि वह जम्मू कश्मीर के उपराज्यपाल और भाजपा नेता राम माधव के उन बयानों की सत्यता का पता लगायेगा जिनके अनुसार घाटी में 4जी इंटरनेट सेवा बहाल की जा सकती है। केन्द्र ने इसके साथ ही गैर सरकारी संगठन की याचिका पर जवाब दाखिल करने के लिये कुछ समय देने का अनुरोध किया।
न्यायमूर्ति एन वी रमण, न्यायमूर्ति आर सुभाष रेड्डी और न्यायमूर्ति बी आर गवई की पीठ ने गैर सरकारी संगठन फाउन्डेशन फॉर प्रोफेशनल्स की अवमानना याचिका पर सुनवाई सात अगस्त के लिये स्थगित कर दी।
जम्मू कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देने संबंधी संविधान के अनुच्छेद 370 के ज्यादातर प्रावधान खत्म करने और राज्य को दो केन्द्र शासित प्रदेशों में विभक्त करने की केन्द्र सरकार की अगस्त, 2019 में घोषणा के समय से ही यहां 4जी इंटरनेट सेवायें निलंबित हैं।
शीर्ष अदालत में मंगलवार को सुनवाई शुरू होते ही जम्मू कश्मीर प्रशासन की ओर से सॉलिसीटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि उन्हें केन्द्र के जवाब पर याचिकाकर्ता का लंबा-चौड़ा प्रत्युत्तर मिला है, जिसके अनुसार 4जी इंटरनेट सेवा पर पाबंदियों की विशेष समिति ने समीक्षा की है।
उन्होंने कहा कि याचिकाकर्ता के हलफनामे का जवाब देने के लिये उन्हें कुछ वक्त दिया जाये।
गैर सरकारी संगठन की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता हुजेफा अहमदी ने मेहता के अनुरोध का विरोध नहीं किया और कहा कि उन्हें सोमवार की शाम को ही जवाबी हलफनामे की प्रति दी गयी है।
उन्होंने कहा कि जम्मू कश्मीर के उपराज्यपाल ने हाल ही में बयान दिया था कि घाटी में 4जी इंटरनेट सेवा बहाल की जा सकती है। उन्होंने कहा कि इसी तरह का बयान भाजपा नेता राम माधव ने भी दिया था।
अहमदी ने कहा कि इन बयानों पर गौर किया जाना चाहिए।
केन्द्र की ओर से अटॉर्नी जनरल के के वेणुगोपाल ने पीठ से कहा कि इन बयानों का सत्यापन करने की आवश्यकता है।
इस पर पीठ ने कहा कि वह अवमानना याचिका पांच अगस्त के लिये सूचीबद्ध कर रही है।
लेकिन मेहता ने कहा कि पांच अगस्त के बजाये किसी और दिन सुनवाई की जाये क्योंकि पांच अगस्त को ही इंटरनेट पर पाबंदी लगाई गयी थी।
पीठ ने इस अनुरोध को स्वीकार करते हुये अवमानना याचिका सात अगस्त के लिये सूचीबद्ध कर दी।
केंद्र सरकार और जम्मू कश्मीर प्रशासन ने 16 जुलाई को न्यायालय को सूचित कियाा था कि इस केंद्र शासित प्रदेश में 4जी इंटरनेट सेवा बहाल करने के मुद्दे पर शीर्ष अदालत के निर्देश के अनुसार एक विशेष समिति का गठन किया जा चुका हे।
अटॉर्नी जनरल के के वेणुगोपाल ने जम्मू कश्मीर में आतंकवादी घटनाएं बढ़ने का दावा करते हुये कहा था कि प्रशासन के अधिकारियों के विरुद्ध कोई अवमानना का मामला नहीं बनता क्योंकि उन्होंने शीर्ष अदालत के 11 मई के निर्देशों का पालन किया है।
न्यायालय ने 11 मई को जम्मू कश्मीर में 4जी इंटरनेट सेवाओं को बहाल करने की याचिकाओं पर विचार करने के लिए केंद्रीय गृह सचिव की अध्यक्षता में ‘विशेष समिति’ के गठन का आदेश दिया था।
शीर्ष अदालत केंद्रीय गृह सचिव अैर जम्मू कश्मीर प्रशासन के मुख्य सचिव के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही शुरू करने के लिये गैर सरकारी संगठन की याचिका पर सुनवाई कर रही है।
उन पर केंद्रशासित प्रदेश में 4जी इंटरनेट सेवाएं बहाल करने के बारे में विचार करने के लिए विशेष समिति बनाने के न्यायालय के 11 मई के आदेश की जानबूझ कर अवज्ञा करने का आरोप लगाते हुए फाउंडेशन फॉर मीडिया प्रोफेशनल्स ने यह याचिका दायर की है।
अनूप
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