देश की खबरें | केन्द्र और राज्य का संवेदनशील क्षेत्रों में कोयला खदानों पर अधिकार नहीं : न्यायालय

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को कहा कि अगर कोई इलाका पारिस्थितिकी दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्र में आता है तो केन्द्र या राज्य का उसके दायरे में आने वाली खदानों पर अधिकार नहीं होगा।

एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

नयी दिल्ली, 30 सितंबर उच्चतम न्यायालय ने बुधवार को कहा कि अगर कोई इलाका पारिस्थितिकी दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्र में आता है तो केन्द्र या राज्य का उसके दायरे में आने वाली खदानों पर अधिकार नहीं होगा।

शीर्ष अदालत ने केन्द्र द्वारा झारखंड में वाणिज्यिक खनन के लिये कोयला खदानों की नीलामी के फैसले के खिलाफ राज्य सरकार के वाद पर सुनवाई के दौरान यह टिप्पणी की।

यह भी पढ़े | Aadhaar-Ration Card Linking: आधार-राशन कार्ड लिंक करने की आज है अंतिम तारीख, यहां देखें दोनों को लिंक करने का आसान ऑनलाइन और ऑफलाइन तरीका.

शीर्ष अदालत ने कहा कि पहली नजर में राज्य में कोयला खदानों की नीलामी करने का अधिकार केन्द्र सरकार को है। लेकिन यह पता लगाने के लिये विशेषज्ञों को भेजना होगा कि क्या अमुक क्षेत्र पारिस्थितिकी दृष्टि से संवेदनशील है या नहीं ।

प्रधान न्यायाधीश एस ए बोबडे, न्यायमूर्ति ए एस बोपन्ना और न्यायमूर्ति वी रामासुब्रमणियन की पीठ ने वीडियो कांफ्रेंस के माध्यम से झारखंड सरकार के वाद पर सुनवाई के दौरान केन्द्र सरकार को एक सप्ताह के भीतर हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया। इस हलफनामे में यह स्पष्ट करना होगा कि क्या ये क्षेत्र पारिस्थितिकी दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्र में हैं या नहीं।

यह भी पढ़े | Hathras Gangrape Case: अभिषेक बनर्जी ने कहा-यदि पीएम मोदी में कोई मानवता बची है तो दलितों के लिये बोलें.

हालांकि, सुनवाई के दौरान पीठ ने टिप्पणी की कि, ‘‘इस समय हम इस सवाल पर विचार नहीं कर रहे हैं कि क्या केन्द्र या झारखंड को खनन का अधिकार है या नहीं। अगर इलाका पारिस्थितिकी दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्र में हुआ तो केन्द्र या राज्य सरकार को खदानों पर कोई अधिकार नहीं होगा।’’

पीठ ने कहा , ‘‘हम यह निर्णय करने के विशेषज्ञ नहीं हैं कि अमुक क्षेत्र पारिस्थितिकी दृष्टि से संवेदनशील है या नहीं। हम इसके लिये कुछ विशेषज्ञ भेजेंगे।’’

झारखंड सरकार की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता एफ एस नरिमन ने कहा कि कोयला खदानों की नीलामी कुछ महीने के लिये स्थगित की जा सकती है और संविधान के अनुच्छेद 131 के तहत दायर उनके वाद पर निर्णय की जरूरत है।

राज्य सरकार की ओर से ही एक अन्य वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि राज्य में आदिवासियों की बड़ी आबादी है और करीब 30 प्रतिशत वन क्षेत्र है और यह पारिस्थितिकी दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्र में आता है।

सिंघवी ने कहा, ‘‘मैं कोयला खदानों की नीलामी को चुनौती दे रहा हूं क्योंकि यह जनहित के खिलाफ है न कि खदान और खनिज (विकास एवं विनियमन) कानून को।

पीठ ने सिंघवी से सवाल किया कि वह यह कैसे कह सकते हैं कि एमएएड कानून इस आधार पर इस राज्य में लागू नहीं होगा क्योंकि यह अधिसूचित इलाका है।

पीठ ने कहा, ‘‘पहली नजर में केन्द्र सरकार को कोयला खदानों को नीलाम करने का अधिकार है। ’’ पीठ ने सिंघवी से सवाल किया कि कानून के तहत पारिस्थितिकी दृष्टि से संवेदनशील इलाकों में खदान पट्टे पर नहीं दी जा सकती हैं।

सिंघवी ने कहा कि पारिस्थितिकी दृष्टि से संवेदनशील इलाकों से दूर छोटे क्षेत्र में खनन किया जा सकता है।

पीठ ने सिंघवी से साक्ष्य पेश करने के लिये कहा कि ये इलाके पारिस्थितिकी दृष्टि से संवेदनशील है। इस पर नरिमन ने हजारीबाग वन्यजीव अभ्यारण्य सहित अनेक इलाकों का जिक्र किया जिन्हें पारिस्थितिकी दृष्टि से संवेदनशील बताया गया है।

केन्द्र की ओर से अटार्नी जनरल के के वेणुगोपाल ने कहा कि वाद दायर करने से 14 दिन पहले ही उन्होंने एक याचिका दायर कर हमसे झारखंड में कोयला खदानों की नीलामी छह महीने या वैश्विक निवेश जलवायु सुधार होने तक स्थगित करने का अनुरोध किया था ताकि झारखंड प्राकृतिक संसाधनों का अधिकतम लाभ प्राप्त कर सके।

पीठ ने कहा कि इस समय वह इस सवाल पर विचार नहीं कर रही कि केन्द्र या झारखंड को खनन का अधिकार है लेकिन अगर इलाका पारिस्थितिकी दृष्टि से संवेदनशील हुआ तो किसी को भी खदानों पर अधिकार नहीं होगा।

पीठ ने कहा, ‘‘हमारा अनुभव बताता है कि लोग पारिस्थितिकी दृष्टि से संवेदनशील इलाकों का दोहन करना चाहते हैं और अगर इलाके पारिस्थितिकी दृष्टि से संवेदनशील हुये तो हम किसी को भी खनन की इजाजत नहीं देंगे।’’

वेणुगोपाल ने कहा कि ये इलाके पारिस्थितिकी दृष्टि से संवेदनशील क्षेत्र में नहीं आते हैं और वह इस संबंध में हलफनामा दाखिल करेंगे।

इस पर पीठ ने सुनवाई दो सप्ताह के लिये स्थगित कर दी और केन्द्र से कहा कि वह एक सप्ताह के भीतर हलफनामा दाखिल करे। पीठ ने राज्य सरकार को इसके बाद इसका जवाब दाखिल करने की भी अनुमति प्रदान की।

शीर्ष अदालत ने वाणिज्यिक मकसद के लिये खदानों को नीलाम करने के केन्द्र के फैसले को चुनौती देने वाली झारखंड सरकार की याचिकाओं पर 14 जुलाई को केन्द्र को नोटिस जारी किया था।

अनूप

(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)

Share Now

\