जरुरी जानकारी | सीईए ने पहली तिमाही के आंकड़ों में 'सांख्यिकीय विसंगति' की आलोचना को नकारा

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on Information at LatestLY हिन्दी. मुख्य आर्थिक सलाहकार (सीईए) वी अनंत नागेश्वरन ने अप्रैल-जून तिमाही के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के आंकड़ों में ‘‘सांख्यिकीय विसंगति’’ को लेकर हो रही आलोचना को खारिज करते हुए कहा है कि जब उसी सांख्यिकीय प्राधिकरण ने 2020 की पहली तिमाही में सबसे गंभीर संकुचन की सूचना दी थी, तब विरोधियों ने उसे अपनी मंशा के अनुकूल होने की वजह से विश्वसनीय बताया था।

नयी दिल्ली, आठ सितंबर मुख्य आर्थिक सलाहकार (सीईए) वी अनंत नागेश्वरन ने अप्रैल-जून तिमाही के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के आंकड़ों में ‘‘सांख्यिकीय विसंगति’’ को लेकर हो रही आलोचना को खारिज करते हुए कहा है कि जब उसी सांख्यिकीय प्राधिकरण ने 2020 की पहली तिमाही में सबसे गंभीर संकुचन की सूचना दी थी, तब विरोधियों ने उसे अपनी मंशा के अनुकूल होने की वजह से विश्वसनीय बताया था।

हाल ही में जारी आंकड़ों के मुताबिक, देश की आर्थिक वृद्धि दर चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में 7.8 प्रतिशत रही। एक साल पहले की समान तिमाही में यह 13.1 प्रतिशत रही थी।

नागेश्वरन ने एक लेख में कहा, ‘‘वित्त वर्ष 2023-24 की पहली तिमाही में 2.8 प्रतिशत की विसंगति एक ‘प्लस’ चिन्ह है। यह इंगित करता है कि व्यय पक्ष ने आय पक्ष का केवल 97.2 प्रतिशत ब्योरा दिया है। इसका मतलब यह नहीं है कि 2.8 प्रतिशत, जिसका ब्योरा नहीं दिया गया, उसका वजूद ही नहीं है।’’

इस लेख के सह-लेखक एवं वरिष्ठ सरकारी अर्थशास्त्री राजीव मिश्रा ने कहा, ‘‘यह आंकड़ा अस्तित्व में है और आगामी तिमाहियों में इसकी व्याख्या की जा सकती है। इसी तरह, पिछली आठ तिमाहियों में नकारात्मक विसंगतियां देखी गई हैं। इसका मतलब है कि व्यय पक्ष की अधिक व्याख्या की गई है और इसमें सामंजस्य बैठाने की जरूरत है।’’

लेख के मुताबिक लंबी अवधि में नकारात्मक और सकारात्मक पहलू एक-दूसरे को संतुलित करते हैं। वित्त वर्ष 2011-12 की पहली तिमाही और वित्त वर्ष 2023-24 की पहली तिमाही के बीच, दोनों दृष्टिकोणों (आय व व्यय) के बीच वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद (तिमाही-दर-तिमाही) का सीएजीआर 5.3 प्रतिशत वार्षिक था।

लेख के अनुसार, ‘‘ऐसी स्थिति में यह कहना सही नहीं है कि जीडीपी को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया गया है। आय पक्ष का दृष्टिकोण हमेशा व्यय पक्ष से अधिक नहीं रहा है। 2011-12 से 6.4 प्रतिशत से (-) 4.8 प्रतिशत के बीच विसंगतियों का उचित वितरण हुआ। नवीनतम तिमाही की विसंगति इसके भीतर ही निहित है। इसे सत्यापित करना आसान है।’’

मुख्य आर्थिक सलाहकार (सीईए) की इन टिप्पणियों को केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोशल मीडिया मंच एक्स (पूर्व नाम ट्विटर) के अपने आधिकारिक खाते पर भी साझा किया है।

यह लेख भारत के आर्थिक प्रदर्शन पर शुरू हुई बहस के संदर्भ में लिखा गया है। प्रिंसटन यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर एवं अर्थशास्त्री अशोक मोडी ने वित्त वर्ष 2023-24 की पहली तिमाही के लिए देश की जीडीपी वृद्धि दर के बारे में चिंता जाहिर की थी।

प्रोजेक्ट सिंडिकेट ने ‘‘भारत की नकली वृद्धि गाथा’’ शीर्षक वाला यह लेख साझा किया था। इस लेख में प्रोफेसर मोडी ने कहा था, ‘‘ भारतीय अधिकारी असुविधाजनक व्यापक आर्थिक तथ्यों को कम महत्व दे रहे हैं ताकि वे जी20 शिखर सम्मेलन की मेजबानी से पहले आकर्षक शीर्षक वाले आंकड़ों का जश्न मना सकें। हालांकि अधिकतर भारतीयों की बढ़ती जद्दोजहद को छुपाने में वे एक निंदनीय और खतरनाक खेल खेल रहे हैं।’’

उन्होंने अपने लेख में यह दलील दी है कि राष्ट्रीय सांख्यिकीय कार्यालय (एनएसओ) चुनिंदा आंकड़ों का इस्तेमाल कर रहा है, जिसकी अधिक व्यापक रूप से जांच करने पर, पिछले महीने सरकार द्वारा घोषित 7.8 प्रतिशत की तुलना में जीडीपी वृद्धि दर काफी कम नजर आती है।

उन्होंने कहा कि वास्तव में वृद्धि कम है, असमानताएं बढ़ रही हैं और नौकरी की कमी गंभीर समस्या बनी हुई है।

इसके पहले नागेश्वरन ने पिछले हफ्ते कहा था कि मानसूनी बारिश कम रहने के बावजूद चालू वित्त वर्ष में आर्थिक वृद्धि दर 6.5 प्रतिशत रहेगी।

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