देश की खबरें | सीबीआई ने दिल्ली आबकारी नीति ‘भ्रष्टाचार’ मामले में कुछ आरोपियों को तलब किया
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने दिल्ली में आबकारी नीति के क्रियान्वयन में कथित भ्रष्टाचार के मामले में कई आरोपियों को शनिवार को समन भेज पूछताछ के लिए तलब किया। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।
नयी दिल्ली, 20 अगस्त केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने दिल्ली में आबकारी नीति के क्रियान्वयन में कथित भ्रष्टाचार के मामले में कई आरोपियों को शनिवार को समन भेज पूछताछ के लिए तलब किया। अधिकारियों ने यह जानकारी दी।
अधिकारियों ने शनिवार को बताया कि दिल्ली के उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया के आवास सहित 31 स्थानों पर की गई छापेमारी के दौरान जब्त दस्तावेजों की एजेंसी जांच कर रही है।
उन्होंने बताया कि दस्तावेजों और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के साथ-साथ बैंक लेनदेन की जांच एक बार पूरी होने के बाद अन्य आरोपियों को भी समन भेजे जाएंगे।
विशेष अदालत के समक्ष बुधवार को सीबीआई द्वारा दायर प्राथमिकी की प्रति वित्तीय मामलों की जांच एजेंसी प्रवर्तन निदेशालय को भी साझा की जा रही है जो धनशोधन के आरोपों की जांच करेगी।
गौरतलब है कि सीबीआई ने शुक्रवार को सिसोदिया के आवास के साथ-साथ कुछ नौकरशाहों व कारोबारियों के ठिकानों सहित 31 स्थानों पर छापेमारी की कार्रवाई की थी।
आम आदमी पार्टी (आप) ने छापेमारी की निंदा की। पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक व दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने दावा किया कि एजेंसी को उनकी पार्टी के नेताओं को प्रताड़ित करने के लिए ‘‘ऊपर से निर्देश’’ दिए गए हैं।
वहीं, भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने दिल्ली सरकार को आबकारी नीति पर पाक साफ होने की चुनौती दी।
सीबीआई द्वारा करोड़ों रुपये के दो भुगतानों की जांच की जा रही है जो कथित तौर पर सिसोदिया के ‘करीबी सहयोगियों’’ को इंडोस्प्रिट्स के मालिक समीर महेंद्रू द्वारा किये गए। महेंद्रू शराब करोबारी है और वह उन शराब कारोबारियों में से एक है जो आबकारी नीति बनाने और लागू करने में हुई कथित अनियमितताओं में सक्रिय रूप से संलिप्त थे।
केंद्रीय एजेंसी ने प्राथमिकी में आरोप लगाया है कि सिसोदिया के कथित ‘‘करीबी सहयोगी’’ व गुरुग्राम स्थित बडी रिटेल प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक अमित अरोड़ा, दिनेश अरोड़ा और अर्जुन पांडे ‘‘शराब लाइसेंसधारियों से अवैध रूप से प्राप्त धन के प्रबंधन और उसे आरोपी नौकरशाहों तक पहुंचाने में सक्रिय रूप से संलिप्त थे।’’
उल्लेखनीय है कि शु्क्रवार का तलाशी अभियान करीब 15 घंटे तक चला और सीबीआई की टीम देर रात करीब 11 बजे सिसोदिया के घर से गई।
अधिकारियों ने बताया कि सीबीआई ने आप नेता सिसोदिया, भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) अधिकारी व पूर्व आबकारी आयुक्त आरव गोपी कृष्ण के आवास के साथ-साथ 29 अन्य स्थानों की तलाशी ली। उन्होंने बताया कि केंद्रीय एजेंसी ने यह कार्रवाई पिछले साल नवंबर में आबकारी नीति बनाने और लागू करने में कथित भ्रष्टाचार एवं रिश्वतखोरी के आरोपों के सिलसिले में प्राथमिकी दर्ज करने के बाद की।
दिल्ली के उप राज्यपाल वी के सक्सेना द्वारा मामले की जांच सीबीआई से कराने की अनुशंसा के बाद यह नीति इस साल जुलाई में वापस ले ली गई थी।
सीबीआई ने 17 अगस्त को प्राथमिकी दर्ज की।
सीबीआई ने मनीष सिसोदिया, कृष्ण, पूर्व आबकारी उपायुक्त आनंद तिवारी और सहायक आबकारी आयुक्त पंकज भटनागर सहित नौकरशाहों, नौ कारोबारियों और दो कंपनियों सहित 15 लोगों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता के तहत आपराधिक षड्यंत्र और भ्रष्टाचार रोधी कानून की धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की है।
सिसोदिया ने छापेमारी के बाद शुक्रवार को संवाददाताओं से कहा था, ‘‘सुबह सीबीआई की टीम पहुंची और पूरे घर की तलाशी ली। मेरे परिवार और मैंने उन्हें पूरा सहयोग दिया। उन्होंने मेरा कंप्यूटर और मोबाइल फोन जब्त कर लिया। वे कुछ फाइल भी ले गए।’’
सिसोदिया ने आरोप लगाया कि अरविंद केजरीवाल सरकार को दिल्ली में ‘‘अच्छा काम करने’’ से रोकने के लिए केंद्र सरकार एजेंसी का दुरुपयोग कर रही है।
सीबीआई ने बुधवार को विशेष अदालत के समक्ष प्राथमिकी दर्ज करने के बाद शुक्रवार को सुबह आठ बजे सात राज्यों में छापेमारी की कार्रवाई शुरू की थी।
अधिकारियों ने बताया कि यह कार्रवाई दिल्ली, गुरुग्राम (हरियाणा), चंडीगढ़, मुंबई (महाराष्ट्र), हैदराबाद (तेलंगाना), लखनऊ (उत्तर प्रदेश), बेंगलुरु (कर्नाटक) के 31 ठिकानों पर की गई और इस दौरान ‘‘दस्तावेज, डिजिटल रिकॉर्ड आदि जब्त किए गए।’’
सीबीआई ने एक ‘सूत्र से मिली सूचना के हवाले’ से प्राथमिकी में आरोप लगाया है कि सिसोदिया और अन्य आरोपी लोक सेवकों ने ‘‘निविदा के बाद लाइसेंसधारियों को अनुचित लाभ देने के इरादे से’’ सक्षम प्राधिकारी की मंजूरी के बिना आबकारी नीति 2021-22 से संबंधित निर्णय लिया।
सीबीआई के प्रवक्ता ने शुक्रवार को एक बयान में कहा, ‘‘यह आरोप लगाया गया है कि आबकारी नीति में संशोधन, लाइसेंसधारियों को अनुचित लाभ देने, लाइसेंस शुल्क में छूट/कमी, बिना मंजूरी के एल-1 लाइसेंस के विस्तार संबंधी अनियमितताएं की गईं।’’
(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)