जरुरी जानकारी | सीबीआई ने 1,964 करोड़ रुपये की बैंक धोखाधड़ी मामले में वीजा पावर पर मामला दर्ज किया
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नयी दिल्ली, 24 अगस्त केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) ने 1,964 करोड़ रुपये की कथित बैंक धोखाधड़ी के मामले में वीजा पावर और उसके तत्कालीन चेयरमैन विशंभर सरन के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। अधिकारियों ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी।
अधिकारियों ने कहा कि एजेंसी ने यह कार्रवाई 14 ऋणदाताओं के गठजोड़ के सदस्यों में से एक पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) की शिकायत पर शुरू की थी। ऋणदाताओं के गठजोड़ ने 1,964 करोड़ रुपये का सावधि ऋण मंजूर किया था। पीएनबी इस गठजोड़ का अग्रणी बैंक था और उसने 394 करोड़ रुपये का ऋण स्वीकृत किया था।
उन्होंने कहा कि बैंक ने आरोप लगाया है कि कंपनी और आरोपी अधिकारियों - चेयरमैन सरन और निदेशक.. विकास अग्रवाल और सुब्रतो त्रिवेदी ने छत्तीसगढ़ के रायगढ़ में 1,200 मेगावाट की उत्पादन क्षमता के साथ कोयला आधारित ताप बिजली परियोजना के विकास के लिए कर्ज को बैंक से संपर्क किया था। एफआईआर में विकास अग्रवाल और सुब्रतो त्रिवेदी को आरोपी बनाया गया है।
एफआईआर के अनुसार, “पता चला है कि आरोपी व्यक्तियों ने मिलीभगत करके और एक-दूसरे के साथ आपराधिक साजिश के तहत बैंकों को एनपीए की तारीख से 1,964 करोड़ रुपये और ब्याज का नुकसान पहुंचाया।”
परियोजना को 600-600 मेगावाट के दो चरणों में क्रियान्वित किया गया था और इसे ऋणदाताओं के गठजोड़ के माध्यम से वित्तपोषित किया जाना था।
इस खाते को 2015-16 के बीच बैंकों द्वारा गैर-निष्पादित परिसंपत्ति (एनपीए) घोषित कर दिया गया था क्योंकि परियोजना प्रवर्तकों के अपना-अपना हिस्सा पाने में असफल होने, कोयला सुविधा की समाप्ति, बिजली खरीद समझौते की समाप्ति, पर्यावरण मंजूरी में देरी और अन्य कारणों से लक्ष्य हासिल करने में विफल रही थी।
पीएनबी की शिकायत में कहा गया है, “स्पष्ट है कि आरोपी व्यक्तियों ने हेराफेरी करते हुए सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (पीएसबी) के खिलाफ साजिश रची और भारतीय दंड संहिता के कई प्रावधानों के तहत विभिन्न अपराध किए।”
उन्होंने बताया कि पीएनबी ने पहले ही आरोपी व्यक्तियों के खिलाफ ‘लुक-आउट सर्कुलर’ जारी कर दिया है।
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