देश की खबरें | कॉलेज प्राचार्य पर जातिगत टिप्प्णी को लेकर एससी-एसटी कानून के तहत मामला नहीं बनता : दिल्ली पुलिस
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. दिल्ली पुलिस ने यहां एक अदालत को सूचित किया है कि दिल्ली विश्वविद्यालय के एक कॉलेज के प्राचार्य के खिलाफ एक बर्खास्त प्रोफेसर के खिलाफ कथित जातिवादी टिप्पणी करने को लेकर अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत और भादंसं के तहत आपराधिक साजिश का कोई मामला नहीं बनता है।
नयी दिल्ली, 10 सितंबर दिल्ली पुलिस ने यहां एक अदालत को सूचित किया है कि दिल्ली विश्वविद्यालय के एक कॉलेज के प्राचार्य के खिलाफ एक बर्खास्त प्रोफेसर के खिलाफ कथित जातिवादी टिप्पणी करने को लेकर अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (अत्याचार निवारण) अधिनियम के तहत और भादंसं के तहत आपराधिक साजिश का कोई मामला नहीं बनता है।
पुलिस ने दिल्ली विश्वविद्यालय की एक बर्खास्त सहायक प्रोफेसर की शिकायत पर दायर की गई कार्रवाई रिपोर्ट (एटीआर) में अदालत को यह जानकारी दी।
महिला सहायक प्रोफेसर का आरोप है कि प्राचार्य ने चार प्रोफेसरों के साथ मिलकर जातिगत दुर्भावना को बढ़ावा देते हुए जाली दस्तावेज और झूठे रिकॉर्ड बनाकर उन्हें सेवा से बर्खास्त करने की साजिश रची थी।
अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश चारू अग्रवाल के समक्ष नौ सितंबर को दायर एटीआर में पुलिस ने कहा कि प्राचार्य के खिलाफ एससी/एसटी अधिनियम की धारा तीन के तहत या भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) के तहत आपराधिक साजिश, आपराधिक धमकी अथवा फर्जी साक्ष्य गढ़ने का कोई मामला नहीं बनता है।
पुलिस ने आगे कहा कि शिकायत प्राचार्य, चार प्रोफेसरों और अन्य ज्ञात और अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ है, फिर भी शिकायत में प्राचार्य को छोड़कर किसी भी व्यक्ति के खिलाफ एक भी शब्द का उल्लेख नहीं किया गया है।
पुलिस निरीक्षक राजीव शाह ने कहा कि शिकायतकर्ता पहले ही राष्ट्रीय अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति आयोग, राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग, अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति कल्याण के लिए संसदीय समिति से संपर्क कर चुकी है लेकिन अब तक उसके पक्ष में कोई आदेश या राय नहीं आई है।
पुलिस ने अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश को यह भी बताया कि शिकायतकर्ता ने दिल्ली उच्च न्यायालय का दरवाजा भी खटखटाया था लेकिन उसकी सभी याचिकाएं खारिज कर दी गईं।
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