जरुरी जानकारी | पूंजीगत व्यय, महाकुंभ पर अतिरिक्त व्यय से मार्च तिमाही में जीडीपी वृद्धि 7.6 प्रतिशत तक होगी: सीईए

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नयी दिल्ली, 28 फरवरी मुख्य आर्थिक सलाहकार (सीईए) वी अनंत नागेश्वरन ने शुक्रवार को कहा कि सरकारी पूंजीगत व्यय में उल्लेखनीय वृद्धि और महाकुंभ से जुड़े अतिरिक्त खर्च से चौथी तिमाही (जनवरी-मार्च) में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर 7.6 प्रतिशत रहने की उम्मीद है। यह चालू वित्त वर्ष (2024-25) में 6.5 प्रतिशत की कुल आर्थिक वृद्धि हासिल करने के लिए जरूरी है।

तीसरी तिमाही के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के आंकड़ों पर संवाददाताओं से उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) द्वारा जारी आंकड़े अच्छे संकेत दे रहे हैं और चालू वित्त वर्ष के लिए संशोधित 6.5 प्रतिशत जीडीपी अनुमान यथार्थवादी है।

दिसंबर तिमाही के दौरान भारत की आर्थिक वृद्धि दर घटकर 6.2 प्रतिशत रही, जो एक साल पहले इसी समय 9.5 प्रतिशत थी। इसका मुख्य कारण कृषि को छोड़कर अन्य सभी क्षेत्रों का खराब प्रदर्शन था।

एनएसओ ने चालू वित्त वर्ष के लिए दूसरा अग्रिम अनुमान भी जारी किया और आर्थिक वृद्धि दर 6.5 प्रतिशत रहने का अनुमान लगाया, जबकि जनवरी में जारी पहले अग्रिम अनुमान में 6.4 प्रतिशत वृद्धि का अनुमान लगाया गया था।

भारत के सकल घरेलू उत्पाद को 6.5 प्रतिशत की वृद्धि दर हासिल करने के लिए चौथी तिमाही में 7.6 प्रतिशत की दर से बढ़ना होगा, जो विशेषज्ञों के अनुसार आशावादी है।

नागेश्वरन ने कहा कि 7.6 प्रतिशत की वृद्धि यथार्थवादी है और इसे चौथी तिमाही के दौरान हासिल किया जा सकता है।

उन्होंने कहा, “कुछ अच्छी प्रगति हुई है, जैसे कि सरकारी पूंजीगत व्यय में उल्लेखनीय वृद्धि और महाकुंभ में लोगों की बढ़ती संख्या के कारण अतिरिक्त व्यय का बढ़ना।”

उन्होंने कहा कि बाहरी नकारात्मक कारकों के बीच, वृद्धिशील सकारात्मक कारक भी हैं, जो चौथी तिमाही में 7.6 प्रतिशत की वृद्धि के लिए एक अच्छा मामला बनाते हैं।

मुख्य आर्थिक सलाहकार ने कहा कि निर्यात में वृद्धि और सरकारी एवं निजी व्यय में वृद्धि से वित्त वर्ष की अंतिम तिमाही में आर्थिक रफ्तार कायम रहने की उम्मीद है।

नागेश्वरन ने कहा कि दिसंबर तिमाही में सरकारी व्यय बहाल होने, निर्माण क्षेत्र का मूल्यवर्धन होने, मजबूत ग्रामीण मांग आने और सेवा निर्यात बढ़ने से आर्थिक गतिविधियों में तेजी रही। हालांकि शहरी उपभोग में नरमी बनी हुई है।

शेयर बाजार में गिरावट के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि अन्य स्थानों की तुलना में भारतीय अर्थव्यवस्था की दीर्घकालिक संभावनाओं और भारतीय बाजार के ऐतिहासिक ‘ट्रैक रिकॉर्ड’ को देखते हुए किसी को अल्पकालिक आंकड़ों का हद से ज्यादा विश्लेषण करने की जरूरत नहीं है।

उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था चालू वित्त वर्ष (2024-25) में 4,000 अरब डॉलर को पार करने के मुहाने पर है।

मौजूदा कीमतों पर जीडीपी वर्ष 2024-25 में 331.03 लाख करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंचने का अनुमान है, जबकि 2023-24 में यह 301.23 लाख करोड़ रुपये होगा, जो 9.9 प्रतिशत की वृद्धि दर दर्शाता है।

मुद्रास्फीति के बारे में नागेश्वरन ने कहा कि इसमें गिरावट का रुख है।

उन्होंने कहा कि निकट भविष्य में वैश्विक आर्थिक परिदृश्य धीमी गति से घट रही मुद्रास्फीति के बीच प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं की व्यापार नीतियों से प्रभावित है।

नागेश्वरन ने कहा कि अनिश्चित वैश्विक परिदृश्य के बावजूद भारत की आर्थिक गति बरकरार रहने की उम्मीद है, जो मजबूत ग्रामीण मांग और शहरी खपत में सुधार से प्रेरित है।

उन्होंने कहा कि मजबूत खरीफ उत्पादन और बेहतर रबी बुवाई, जलाशयों के उच्च स्तर और सब्जियों की कीमतों में मौसमी सर्दियों के सुधार के साथ, भविष्य में खाद्य मुद्रास्फीति के लिए अच्छे संकेत हैं।

उन्होंने कहा कि केंद्रीय बजट में कृषि, एमएसएमई (सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम), निवेश और निर्यात पर जोर दिए जाने से भारत की मध्यम अवधि की आर्थिक संभावनाएं बेहतर होने की संभावना है।

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