प्रधानमंत्री राहत कोष में जमानत राशि जमा करने का आदेश नहीं दिया जा सकता: मप्र उच्च न्यायालय

न्यायमूर्ति सुजय पॉल की एकल पीठ ने मंगलवार को उक्त आदेश भोपाल के उन दो लोगों से संबंधित मामले में दिया जिनपर तबलीगी जमात के लोगों को छिपाने का आरोप है। उन्हें निचली अदालत ने जमानत राशि प्रधानमंत्री राहत कोष में जमा करने का आदेश दिया था।

जमात

जबलपुर, (मप्र) 13 मई मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने अपने एक अहम फैसले में कहा है कि निचली अदालत जमानत राशि को प्रधानमंत्री राहत कोष में जमा करने का आदेश नहीं दे सकती।

न्यायमूर्ति सुजय पॉल की एकल पीठ ने मंगलवार को उक्त आदेश भोपाल के उन दो लोगों से संबंधित मामले में दिया जिनपर तबलीगी जमात के लोगों को छिपाने का आरोप है। उन्हें निचली अदालत ने जमानत राशि प्रधानमंत्री राहत कोष में जमा करने का आदेश दिया था।

इस आदेश के खिलाफ उच्च न्यायालय में याचिका दायर की गई थी।

मामला भोपाल के इस्लामपुरा क्षेत्र निवासी फहद अहमद और इस्लामपुरा की ही ईदा सेठ मस्जिद के मौलवी हफीज मोहम्मद हसीन से संबंधित है। दोनों के खिलाफ भोपाल की तलैया थाना पुलिस ने भादंसं, आपदा प्रबंधन अधिनियम और विदेशी कानून की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है।

दोनों पर आरोप है कि कोरोना महामारी को रोकने के लिए सरकार द्वारा परामर्श जारी होने के बाद भी उन्होंने किर्गिस्तान, उज्बेकिस्तान और कजाकिस्तान से आए तबलीगियों को मस्जिद में ठहराकर धार्मिक गतिविधियां कराईं।

इससे वहां कोरोना संक्रमण के खतरे को देखते हुए तलैया थाना पुलिस ने 28 अप्रैल को उन्हें गिरफ्तार कर लिया था।

इस मामले में भोपाल की एडीजे अदालत ने गत 30 अप्रैल को आरोपियों को जमानत देते हुए कहा था कि दोनों प्रधानमंत्री राहत कोष में 25-25 हजार रुपये की राशि जमा करें।

जमानत आदेश में लगाई गई इस शर्त को उच्च न्यायालय में चुनौती दी गई थी जिसने

वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से हुई सुनवाई के बाद अपना आदेश दिया।

मामले में आरोपियों की ओर से अधिवक्ता अंकित सक्सेना ने पैरवी की।

(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, लेटेस्टली स्टाफ ने इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया है)

Share Now

\