देश की खबरें | प्रयोगशालाओं के अन्य जांच करने के आधार पर आरटीपीसीआर जांच की सीमा तय करने को जायज नहीं ठहरा सकते: अदालत
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कोच्चि, छह अगस्त केरल उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को कहा कि राज्य सरकार और उसका चिकित्सा सेवा निगम, केएमएससी इस आधार पर आरटी-पीसीआर जांच दर 500 रुपये तय करने को उचित नहीं ठहरा सकते कि निजी प्रयोगशालाएं अन्य जांच कर रही हैं और वे उनसे लाभ कमा सकती हैं।
न्यायमूर्ति टी आर रवि ने कहा, ‘‘आप यह नहीं कह सकते कि वे (प्रयोगशालाएं) अन्य व्यवसाय नहीं कर सकते। अन्य व्यवसाय करना ऐसी कीमत तय करने का कारण नहीं हो सकता जो जांच करने में प्रयोगशालाओं की लागत से कम हो।’’
न्यायमूर्ति रवि ने यह टिप्पणी राज्य सरकार के 30 अप्रैल के आदेश को चुनौती देने वाली कई निजी प्रयोगशालाओं की ओर से दायर अर्जियों पर सुनवाई के दौरान की। इन आदेश के तहत आरटी-पीसीआर जांच की दरों को 1,700 रुपये से घटाकर 500 रुपये कर दिया गया है।
निजी प्रयोगशालाओं ने कहा कि भले ही उनकी जरूरत की 115 वस्तुओं में से 45 की आपूर्ति केरल चिकित्सा सेवा निगम (केएमएससी) करता है, लेकिन प्रत्येक जांच पर उनका खर्च 600 रुपये से अधिक होगा और यह इस बात का संकेत है कि मूल्य सीमा निर्धारित करते समय एजेंसी ने दिमाग नहीं लगाया ।
केएमएससी ने सुनवाई की पिछली तारीख को अदालत से कहा था कि वह जांच के लिए प्रयोगशालाओं द्वारा अनुरोधित 115 वस्तुओं में से केवल 45 की आपूर्ति कर सकती है।
प्रयोगशालाओं ने यह भी कहा कि नमूना संग्रह के दौरान उपयोग की जानी वाली पीपीई किट की कीमत वर्तमान में सरकार द्वारा निर्धारित मूल्य के अनुसार लगभग 300 रुपये है और वह भी आरटी-पीसीआर जांच दरों का एक हिस्सा है।
उन्होंने अदालत को बताया कि सरकार ने समय-समय पर पीपीई किट की कीमत में बढ़ोतरी की है।
दूसरी ओर केएमएससी ने लैब के दावों को खारिज किया।
राज्य सरकार और केएसएमसी दोनों ने कहा कि उन्होंने प्रयोगशालाओं को सर्वोत्तम संभव पेशकश की है।
अदालत ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद मामले में अपना आदेश सुरक्षित रख लिया।
केएमएससी ने अदालत को बताया था कि कुछ प्रयोगशालाओं ने अलग अलग मशीनें लगाई हैं और इसके लिए उन्हें अलग अलग प्रतिक्रयाशील द्रव्य (रिएजेंट्स) की जरूरत होगी, जिनकी अल्प मात्रा में खरीद मुश्किल है।
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