देश की खबरें | पीपीई किट खरीद पर कैग रिपोर्ट: कांग्रेस ने एलडीएफ सरकार पर हमला तेज किया

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. कांग्रेस ने कोविड-19 महामारी के दौरान व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण (पीपीई) किटों की खरीद में अनियमितताओं की ओर इशारा करने वाली नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की रिपोर्ट को लेकर बुधवार को केरल सरकार पर हमला तेज किया और जानना चाहा कि ‘‘अगर यह भ्रष्टाचार नहीं है तो क्या है?’’

तिरुवनंतपुरम, 21 जनवरी कांग्रेस ने कोविड-19 महामारी के दौरान व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण (पीपीई) किटों की खरीद में अनियमितताओं की ओर इशारा करने वाली नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की रिपोर्ट को लेकर बुधवार को केरल सरकार पर हमला तेज किया और जानना चाहा कि ‘‘अगर यह भ्रष्टाचार नहीं है तो क्या है?’’

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता रमेश चेन्निथला ने आलोचना करते हुए कहा कि वामपंथी सरकार ने बढ़ी हुई दरों पर पीपीई किट खरीदी और इसकी जानकारी मुख्यमंत्री पिनराई विजयन को थी।

उन्होंने यहां संवाददाताओं से कहा, ‘‘ पीपीई किट कम दरों पर खरीदने के ऑर्डर रद्द कर दिए गए और उन्हें अत्यधिक बढ़ी हुई दरों पर खरीदा गया। अगर यह भ्रष्टाचार नहीं है तो क्या है? तत्कालीन स्वास्थ्य मंत्री के के शैलजा का कहना है कि यह मुख्यमंत्री की जानकारी में था। इसलिए अगर यह मुख्यमंत्री की जानकारी में किया गया है तो क्या यह भ्रष्टाचार नहीं है?’’

राज्य के पूर्व वित्त मंत्री थॉमस इसाक ने वामपंथी सरकार के कार्यों का बचाव करते हुए प्रश्न किया कि किस आधार पर कैग ने यह दावा किया है कि किट कम दरों पर उपलब्ध थीं।

उन्होंने कहा, ‘‘ वे कम दर पर किसी गुणवत्ता वाले सामान के बारे में बात कर रहे हैं? किस डेटा के आधार पर वे तुलना कर रहे हैं? यह सरकार पर कीचड़ उछालने का प्रयास है। कैग को हिसाब रखना चाहिए। भाजपा ने इस संस्था (कैग) को नष्ट कर दिया है। वे सभी संवैधानिक संस्थाओं और प्राधिकरणों को नष्ट कर रहे हैं।’’

दरअसल मंगलवार को राज्य विधानसभा में पेश की गई कैग रिपोर्ट में आरोप लगाया गया कि पीपीई किट की खरीद में अनियमितताओं के कारण राज्य को 10.23 करोड़ रुपये का अतिरिक्त व्यय करना पड़ा।

रिपोर्ट में कहा गया कि राज्य संचालित केरल मेडिकल सर्विसेज कॉर्पोरेशन लिमिटेड (केएमएससीएल) ने मानदंडों का उल्लंघन करते हुए अग्रिम धनराशि के रूप में पीपीई किट के खरीद मूल्य का शत प्रतिशत भुगतान करके महाराष्ट्र के सैन फार्मा को अनुचित लाभ पहुंचाया।

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