देश की खबरें | सीएए, एनआरसी के खिलाफ प्रदर्शन में कथित रूप से शामिल दो लोगों की गिरफ्तारी पर रोक लगाई

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने सीएए, एनआरसी और एनपीआर के खिलाफ विरोध प्रदर्शन में कथित तौर पर हिस्सा लेने वाले दो व्यक्तियों की गिरफ्तारी पर सोमवार को रोक लगा दी। इन लोगों पर राजद्रोह का अपराध करने और राष्ट्रीय अखंडता को नुकसान पहुंचाने वाली बातें करने का आरोप है।

एनडीआरएफ/प्रतीकात्मक तस्वीर (Photo Credits: ANI)

प्रयागराज, 10 नवंबर इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने सीएए, एनआरसी और एनपीआर के खिलाफ विरोध प्रदर्शन में कथित तौर पर हिस्सा लेने वाले दो व्यक्तियों की गिरफ्तारी पर सोमवार को रोक लगा दी। इन लोगों पर राजद्रोह का अपराध करने और राष्ट्रीय अखंडता को नुकसान पहुंचाने वाली बातें करने का आरोप है।

प्रयागराज के अहमद अली और शुबैबुर द्वारा दायर रिट याचिका पर यह आदेश पारित करते हुए न्यायमूर्ति बच्चू लाल और न्यायमूर्ति सुभाष चंद्र शर्मा की खंडपीठ ने निर्देश दिया कि पुलिस की रिपोर्ट सौंपे जाने तक उक्त मामले में इन याचिकाकर्ताओं को गिरफ्तार नहीं किया जाएगा, बशर्ते वे जांच में सहयोग करें।

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याचिकाकर्ताओं द्वारा यह रिट याचिका 6 मार्च, 2020 को प्रयागराज जिले के करेली पुलिस थाने में दर्ज की गई प्राथमिकी रद्द करने की मांग करते हुए दायर की गई थी।

प्राथमिकी में यह आरोप लगाया गया था कि याचिकाकर्ताओं ने सीएए, एनसीआर और एनपीआर के खिलाफ विरोध प्रदर्शन में हिस्सा लिया।

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याचिका में आरोप लगाया गया है कि प्राथमिकी में इन याचिकाकर्ताओं को नामजद नहीं किया गया था। दूसरे याचिकाकर्ता-शुबैबुर का नाम करेली थाने के एसएचओ संतोष कुमार दूबे के दूसरे बयान में प्रकाश में आया। इसके बाद, गिरफ्तार सह आरोपी फजल खान ने इन याचिकाकर्ताओं के नाम का खुलासा किया।

इसमें कहा गया है कि इसलिए, कथित अपराध के साथ याचिकाकर्ताओं को जोड़ने के लिए अकाट्य साक्ष्य नहीं हैं। इसमें कहा गया है कि ना ही याचिकाकर्ताओं ने यह कथित अपराध किया और ना वे कथित घटना में शामिल थे। केवल उत्पीड़न के उद्देश्य से याचिकाकर्ताओं को इस मामले में झूठा फंसाया गया है।

अदालत ने यह कहते हुए प्राथमिकी रद्द करने से इनकार कर दिया कि इस मामले के तथ्यों और परिस्थितियों पर विचार करते हुए अदालत को प्राथमिकी रद्द करने का कोई आधार नहीं दिखता।

हालांकि, अदालत ने इस मामले के खास तथ्यों और परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए और पक्षों के वकीलों की दलीलों पर विचार करते हुए इस रिट याचिका का निपटारा किया और निर्देश दिया कि पुलिस रिपोर्ट सौंपे जाने तक याचिकाकर्ताओं को गिरफ्तार नहीं किया जाएगा, बशर्ते वे जांच में सहयोग करें।

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