देश की खबरें | बीएसएनएल-जेडटीई कथित घोटाला : बीएसएनएल को अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू करने का निर्देश
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. दिल्ली उच्च न्यायालय ने भारत संचार निगम लिमिटेड (बीएसएनएल) को जीएसएम टेलीफोन मोबाइल लाइनों के खरीद आदेश जारी करने से पहले अनुचित निविदाएं तैयार करने और योजना में कमी के आरोपी अधिकारियों के खिलाफ केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) के सुझाव के अनुसार विभागीय कार्रवाई शुरू करने का निर्देश दिया है।
नयी दिल्ली, 10 फरवरी दिल्ली उच्च न्यायालय ने भारत संचार निगम लिमिटेड (बीएसएनएल) को जीएसएम टेलीफोन मोबाइल लाइनों के खरीद आदेश जारी करने से पहले अनुचित निविदाएं तैयार करने और योजना में कमी के आरोपी अधिकारियों के खिलाफ केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) के सुझाव के अनुसार विभागीय कार्रवाई शुरू करने का निर्देश दिया है।
उच्च न्यायालय ने स्पष्ट किया कि उसने बीएसएनएल के अधिकारियों पर लगाए गए आरोपों के गुण-दोष पर कोई राय व्यक्त नहीं की है और टेलीकॉम कंपनी द्वारा शुरू की गई किसी भी कार्रवाई को उसके गुण-दोष के आधार पर अंतिम तार्किक निर्णय तक ले जाया जाए।
अदालत का यह आदेश एक याचिका का निपटारा करने के दौरान आया जिसमें आरोप लगाया गया था कि बीएसएनएल के अधिकारियों ने फर्जी दस्तावेज बनाकर एक चीनी फर्म की सहायक कंपनी को अनधिकृत भुगतान जारी कर सरकारी खजाने को करीब 1,000 करोड़ रुपये का नुकसान पहुंचाया।
अदालत के निर्देश पर सीबीआई ने शुरुआती जांच के लिए मामला दर्ज किया। जांच पूरी होने के बाद उसने अदालत के समक्ष स्थिति रिपोर्ट दाखिल की। स्थिति रिपोर्ट के अवलोकन के बाद अदालत को सीबीआई द्वारा दाखिल स्थिति रिपोर्ट को खारिज करने और आगे कोई निर्देश पारित करने का कोई कारण नजर नहीं आया।
न्यायमूर्ति सतीश चंद्र शर्मा एवं न्यायमूर्ति सुब्रमण्यम प्रसाद ने बृहस्पतिवार को पारित एक आदेश में कहा, ‘‘यह अदालत सीबीआई के अनुरोध पर आरोपी अधिकारियों के खिलाफ बीएसएनएल को विभागीय कार्रवाई शुरू करने का निर्देश देती है। अदालत यह स्पष्ट करती है कि उसने बीएसएनएल के अधिकारियों पर लगाए गए आरोपों के गुण-दोष पर कोई राय नहीं रखी है। बीएसएनएल द्वारा शुरू की गई किसी भी कार्रवाई को इसके गुण-दोष के आधार पर तार्किक निर्णय तक पहुंचाया जाए।’’
उच्च न्यायालय ने कहा कि लतिका कुमारी मामले में उच्चतम न्यायालय के आदेश के अनुसार सीबीआई को निर्देश दिया जाता है कि शिकायत को बंद करने और आगे कार्रवाई न करने के कारणों का खुलासा करते हुए याचिकाकर्ता को इसे बंद किए जाने की प्रविष्टि की एक प्रति प्रदान की जाए।
अदालत ने याचिकाकर्ता एनजीओ टेलीकॉम वाचडॉग को कानून के अनुसार कानूनी उपायों का सहारा लेने की स्वतंत्रता दी।
(यह सिंडिकेटेड न्यूज़ फीड से अनएडिटेड और ऑटो-जेनरेटेड स्टोरी है, ऐसी संभावना है कि लेटेस्टली स्टाफ द्वारा इसमें कोई बदलाव या एडिट नहीं किया गया है)