देश की खबरें | बृंदा करात ने मणिपुर दौरे के बाद राष्ट्रपति को ज्ञापन सौंपा, राहत शिविर समेत कई मुद्दे उठाए

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) नेता बृंदा करात ने मणिपुर के तीन दिवसीय दौरे के बाद शुक्रवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को एक ज्ञापन सौंपा।

नयी दिल्ली, 18 अगस्त मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) नेता बृंदा करात ने मणिपुर के तीन दिवसीय दौरे के बाद शुक्रवार को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को एक ज्ञापन सौंपा।

करात ने मुर्मू को सौंपे गए ज्ञापन में राहत शिविरों की खराब स्थिति, सरकार के प्रति विश्वास की कमी और राजनीतिक इच्छाशक्ति की कमी जैसे कुछ मुद्दे उठाये हैं।

आल इंडिया डेमोक्रेटिक वूमेंस एसोसिएशन (एआईडीडब्ल्यूए) के एक प्रतिनिधिमंडल ने 9-11 अगस्त तक मणिपुर राज्य का दौरा किया और दंगों से प्रभावित हुए लोगों से मुलाकात की।

ज्ञापन में एआईडीडब्ल्यूए ने महिलाओं में असुरक्षा और निराशा की भावना से अवगत कराया। समूह ने यह भी उल्लेख किया कि राज्यपाल अनुसुइया उइके ने कई पीड़ितों से सीधे बातचीत की है और संबंधित अधिकारियों को अपनी सिफारिशें दी हैं। समूह ने कहा कि इसके सदस्यों ने उइके से भी मुलाकात की।

ज्ञापन में कहा गया है, ‘‘हालांकि, हमने जो देखा और अनुभव किया उससे पता चलता है कि ज़मीनी स्थिति और लोगों के दिलों में कोई बदलाव नहीं हुआ है। हम मणिपुर में स्थिति की गंभीरता को राज्य का दौरा करने और वहां के लोगों, विशेषकर महिलाओं से बातचीत करने के बाद ही समझ सकते हैं।’’

इसमें आगे कहा गया है कि जो समुदाय एक-दूसरे के साथ शांति से रहते थे, उनके बीच विभाजन गहरा है और दोनों पक्षों में "भय, अविश्वास और संदेह" है।

समूह ने ज्ञापन में कहा, ‘‘लगभग 5,000 कॉलोनी और कई गांव जलकर राख हो गए हैं। दोनों समुदायों के हजारों लोग अपने घर छोड़कर चले गए हैं और राहत शिविरों में रह रहे हैं। आदिवासियों को हिंसा का खामियाजा भुगतना पड़ा है।’’

इसमें कहा गया है कि समूह ने यौन हिंसा की पीड़ितों से मुलाकात की और ये वे युवा आदिवासी महिलाएं और उनके परिवार हैं ‘‘जिन्होंने अपने ऊपर हुए अत्याचारों के बारे में बताया।’’

ज्ञापन में कहा गया है, ‘‘वे निराश हैं क्योंकि अब तक न्याय का कोई संकेत नहीं है। कुछ लोगों को लगा कि उच्चतम न्यायालय के हस्तक्षेप से मदद मिलेगी। हालांकि, कुछ मुद्दे हैं जिनके तत्काल समाधान की आवश्यकता है।’’

इसमें कहा गया है, ‘‘उदाहरण के लिए, जिस युवती के साथ सामूहिक बलात्कार किया गया और उसकी मां ने हमें बताया कि वे कम से कम अपने प्रियजनों के शव देखना चाहते हैं और सम्मानजनक तरीके से अंतिम संस्कार करना चाहते हैं। महिला के बेटे और पति को बेरहमी से मार डाला गया, जब वे पीड़िता को बचाने की कोशिश कर रहे थे।’’

एआईडीडब्ल्यूए ने अनुरोध किया कि राष्ट्रपति सरकार को इसकी तात्कालिकता के बारे में बताएं। उन्होंने इस बात पर भी प्रकाश डाला कि बीरेन सिंह सरकार की "निष्क्रियता" और संवैधानिक कर्तव्य के विमुख होने ने मणिपुर के लोगों को नाराज कर दिया है।

इसमें कहा गया है, ‘‘सरकार, प्रशासन और पुलिस के विश्वासघात ने लोगों के सद्भाव और एकता को गंभीर रूप से क्षति पहुंचायी है। सबसे महत्वपूर्ण आवश्यकता राजनीतिक समाधान की है, लेकिन लोगों को लगता है कि इसके लिए पहला कदम मुख्यमंत्री को हटाना है।’’

समूह ने राहत शिविरों की भयानक स्थिति पर भी प्रकाश डाला और कहा कि पूरे मणिपुर में फैले 350 ऐसे शिविरों में 55,000 से अधिक लोग हैं। ज्ञापन में कहा गया है कि वे तीन महीने से अधिक समय से इन राहत शिविरों में रह रहे हैं और कोई समाधान नजर नहीं आ रहा है।

इसमें कहा गया है, ‘‘लोग इन शिविरों में गंभीर स्थिति में रह रहे हैं। बारिश ने स्थिति को और भी खराब कर दिया है। उन्हें नहीं पता कि वे कभी अपने घर वापस जा पाएंगे या नहीं। वहां बूढ़े लोग, बच्चे और गर्भवती महिलाएं हैं।’’

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