देश की खबरें | बंबई उच्च न्यायालय और महाराष्ट्र की निचली अदालतों में प्रत्यक्ष तरीके से सुनवाई शुरू
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मुंबई, एक दिसंबर बंबई उच्च न्यायालय और पुणे को छोड़कर सभी अधीनस्थ अदालतों में करीब आठ महीने के बाद मंगलवार से मामलों की सुनवाई पारंपरिक तरीके से अदालत कक्ष में आमने-सामने उपस्थित होकर शुरू हुई।
उल्लेखनीय है कि कोरोना वायरस की महामारी शुरू होने के बाद से अदालतें वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिये मामलों की ऑनलाइन सुनवाई कर रही थीं।
अब उच्च न्यायालय सहित सभी अदालतें रोजाना साढ़े चार घंटे सामान्य तरीके से बैठेंगी। उच्च न्यायालय ने 27 नवंबर को पुणे जिला अदालत को छोड़ राज्य की बाकी अदालतों में प्रत्यक्ष तरीके से सुनवाई शुरू करने का फैसला किया था।
हालांकि, राज्य में कोविड-19 के बढ़ते मामलों और आंशिक लॉकडाउन रहने के मद्देनजर वकीलों के निकायों ने उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश से जनवरी तक मामलों की ऑनलाइन सुनवाई जारी रखने का अनुरोध किया है।
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बंबई बार एसोसिएशन और एडवोकेट्स एसोसिएशन ऑफ वेस्टर्न इंडिया ने मुख्य न्यायाधीश दीपांकर दत्ता को दिए अभिवेदन में कहा कि वे अदालतों में प्रत्यक्ष सुनवाई को बहाल करने की जरूरत को समझते हैं लेकिन यह चरणबद्ध तरीके से होना चाहिए।
उच्च न्यायालय के वरिष्ठ न्यायाधीशों, दो एसोसिएशन के वरिष्ठ अधिवक्ताओं, महाधिवक्ता आशुतोष कुंभकोणी ने मंगलवार सुबह इस मुद्दे पर बैठक की।
बैठक का हिस्सा रहे एक वकील ने बाद में बताया कि मुख्य न्यायाधीश दत्ता ने वकीलों की शिकायतों को सुना और भरोसा दिया कि इस मामले में पर उचित फैसला लिया जाएगा।
वकीलों ने अपने प्रतिवेदन में अनुरोध किया कि उन्हें ऑनलाइन सुनवाई में पेश होने का विकल्प दिया जाए।
वहीं, कई वकीलों ने अदालतों में प्रत्यक्ष सुनवाई को बहाल करने का समर्थन किया और कहा कि अगर सामाजिक दूरी और मास्क पहनने का एहतियात बरता जाए, तो उन्हें कोई आपत्ति नहीं है।
उच्च न्यायालय में मंगलवार को वकीलों को बगल के कमरे में तबतक इंतजार करने को कहा गया जबतक उनका मामला अदालत में सुनवाई के लिए नहीं आया।
अदालत में कुर्सियां दूर-दूर रखी गई थीं और पुलिसकर्मी प्रवेश द्वार पर तैनात थे और परिसर में दाखिल होने वाले लोगों के शरीर का तापमान जांचने के बाद ही प्रवेश करने की अनुमति दे रहे थे।
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