जरुरी जानकारी | बोफा, यूबीएस का अनुमान, अक्टूबर तक नीतिगत दर में होगी 0.50 से 0.75 प्रतिशत की कटौती
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on Information at LatestLY हिन्दी. विदेशी ब्रोकरेज कंपनियों का कहना है कि रिजर्व बैंक अक्टूबर तक रेपो दर में 0.5 से 0.75 प्रतिशत की कटौती कर सकता है। इसका कारण खुदरा मुद्रास्फीति के दिसंबर तक गिरकर 2 से 2.5 प्रतिशत पर पहुंचने की संभावना है क्योंकि जीडीपी समेत अर्थव्यवस्था के सभी कारक कमजोर बने हुए हैं।
मुंबई, 14 जुलाई विदेशी ब्रोकरेज कंपनियों का कहना है कि रिजर्व बैंक अक्टूबर तक रेपो दर में 0.5 से 0.75 प्रतिशत की कटौती कर सकता है। इसका कारण खुदरा मुद्रास्फीति के दिसंबर तक गिरकर 2 से 2.5 प्रतिशत पर पहुंचने की संभावना है क्योंकि जीडीपी समेत अर्थव्यवस्था के सभी कारक कमजोर बने हुए हैं।
बैंक ऑफ अमेरिका (बोफा) का अनुमान है कि आरबीआई रेपो दर में 0.75 प्रतिशत तक कटौती कर सकता है। इसमें से 6 अगस्त को मौद्रिक नीति समीक्षा में 0.25 प्रतिशत और 0.50 प्रतिशत की कटौती अक्टूबर तक होने की उम्मीद है।
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वहीं स्विट्जरलैंड के यूबीएस का कहना है कि केंद्रीय बैंक चालू वित्त वर्ष के अंत तक रेपो दर में 0.50 प्रतिशत की कटौती कर सकता है। इसका कारण दिसंबर तक मुद्रास्फीति के घटकर 2.0 से 2.5 प्रतिशत के स्तर पर पहुंचने का अनुमान है।
जून में खुदरा मुद्रास्फीति 6.1 प्रतिशत रही जो बाजार की 5.2 प्रतिशत की उम्मीद से अधिक है। लेकिन यह मई में 6.3 प्रतिशत और अप्रैल में 7.2 प्रतिशत के मुकाबले कम है। जुलाई में इसके 6.4 प्रतिशत रहने की संभावना है।
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बोफा ने एक रिपोर्ट में कहा, ‘‘हमारा अनुमान है कि मुद्रास्फीति चलू वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में घटकर 2.5 प्रतिशत पर आ जाएगी। इसका कारण जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) में गिरावट, तंग मुद्रा आपूर्ति, अच्छी बारिश, सीमित आयातित मुद्रास्फीति और राजकोषीय स्थिति के मोर्चे पर सीमित गिरावट जैसे कारक हैं।’’
रिपोर्ट में बोफा के अर्थशास्त्रियों ने मंगलवार को कहा, ‘‘इसीलिए हमारा मानना है कि आरबीआई पांच अगस्त को रेपो दर में 0.25 प्रतिशत और अक्टूबर में मौद्रिक नीति समीक्षा में 0.50 प्रतिशत की कटौती कर सकता है।’’
वहीं यूबीएस ने रिपोर्ट में कहा कि निकट भविष्य में तेजी के बावजूद हमारा अनुमान है कि उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति दिसंबर में 2 से 2.5 प्रतिशत रह सकती है। इसको देखते हुए हमारा मानना है कि आरबीआई 2020-21 में नीतिगत दर में 0.5 प्रतिशत की और कटौती कर सकता है जिससे रेपो दर 3.5 प्रतिशत पर आ जाएगी।’’
यूबीएस ने कहा कि जून में महंगाई में वृद्धि का कारण आपूर्ति संबंधी बाधाओं के साथ परिवहन लागत में बढ़ोतरी है। सरकार के पेट्रोल और डीजल के दाम में वृद्धि से परिवहन लागत महंगी हुई है।
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