देश की खबरें | भाजपा ने केरल सरकार से श्रद्धालुओं को ‘बलि तर्पणम’ के लिए कोविड प्रतिबंधों से छूट देने का किया आग्रह

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. केरल में भाजपा ने राज्य की वाम मोर्चा सरकार से आग्रह किया है कि वह श्रद्धालुओं को ‘बलि तर्पणम’ अनुष्ठान करने के लिए कोविड-19 की स्थिति के मद्देनजर राज्य में लगाए गए लॉकडाउन प्रतिबंधों से छूट दे।

तिरुवनंतपुरम, छह अगस्त केरल में भाजपा ने राज्य की वाम मोर्चा सरकार से आग्रह किया है कि वह श्रद्धालुओं को ‘बलि तर्पणम’ अनुष्ठान करने के लिए कोविड-19 की स्थिति के मद्देनजर राज्य में लगाए गए लॉकडाउन प्रतिबंधों से छूट दे।

पूर्वजों को श्रद्धांजलि देने के लिए वार्षिक हिंदू अनुष्ठान, ‘बलि तर्पणम’ इस वर्ष रविवार (8 अगस्त) को है।

राज्य सरकार ने हालांकि हाल ही में लॉकडाउन प्रतिबंधों में ढील दी थी और दुकानों और अन्य प्रतिष्ठानों को सप्ताह में छह दिन संचालित करने की अनुमति दी थी, लेकिन रविवार को प्रतिबंध जारी रखने का निर्णय लिया गया था।

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष के सुरेंद्रन ने कहा कि श्रद्धालुओं को अनुष्ठान करने के लिए पाबंदियों के साथ अनुमति दी जानी चाहिए क्योंकि सरकार पहले ही कई अन्य प्रतिबंधों को हटा चुकी है।

उन्होंने कहा, ‘‘सरकार के लिए किसी भी मंदिर में बलि तर्पणम करने की अनुमति से इनकार करना सही नहीं है।’’

भाजपा नेता ने यह भी मांग की कि राज्य में शीर्ष मंदिर निकाय त्रावणकोर देवस्वओम बोर्ड (टीडीबी) स्वयं के प्रबंधन के तहत आने वाले मंदिरों और स्नान घाटों पर उन लोगों के लिए व्यवस्था करे, जो उस दिन अपने घरों में अनुष्ठान नहीं कर सकते।

उन्होंने एक बयान में प्राधिकारियों से हिंदू संगठनों को वार्षिक अनुष्ठान करने के लिए श्रद्धालुओं के लिए आवश्यक सुविधाओं की व्यवस्था करने की अनुमति देने का भी आग्रह किया।

टीडीबी ने हाल ही में कोरोना वायरस के प्रसार का हवाला देते हुए इस साल अपने तीर्थस्थलों में 'बलि तर्पणम' से परहेज करने का फैसला किया था।

प्राधिकारियों ने कहा कि यह निर्णय इस आकलन के आधार पर लिया गया है कि सामाजिक दूरी के मानदंडों और अन्य महामारी प्रोटोकॉल का पालन करके अनुष्ठान करना मुश्किल होगा।

टीडीबी अधिकारियों ने कहा कि मंदिरों के स्नान घाटों पर ‘बलि तर्पणम’ करने के लिए भक्तों के प्रवेश से संक्रमण का प्रसार बढ़ सकता है। टीडीबी अधिकारियों ने कहा कि निर्णय लेने से पहले संबंधित मंदिरों के तंत्रियों (प्रधान पुजारी) के साथ चर्चा की गई थी।

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