नयी दिल्ली, 27 फरवरी महाकुंभ में नहीं जाने के लिए लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने बृहस्पतिवार को कांग्रेस की ‘‘ओछी राजनीति’’ को नकारे जाने का आह्वान किया और आरोप लगाया कि नेहरू-गांधी परिवार के सदस्य चुनाव से पहले सिर्फ देश के ‘‘बहुसंख्यक समाज’’ को मूर्ख बनाने के लिए मंदिरों में जाते हैं।
भाजपा आईटी विभाग के प्रमुख अमित मालवीय ने कहा कि प्रयागराज में हाल में संपन्न महाकुंभ के आयोजन ने यह साबित कर दिया है कि इस देश में सनातन के सम्मान के लिए यदि कोई दल या नेतृत्व खड़ा है, तो वह भाजपा और प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ही हैं।
बुधवार को महाशिवरात्रि के मौके पर 45 दिवसीय महाकुंभ का समापन लाखों श्रद्धालुओं द्वारा संगम में डुबकी लगाने के साथ हुआ।
मालवीय ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि देश और दुनिया के कोने-कोने से 66 करोड़ से अधिक लोगों ने आस्था के इस महापर्व में भाग लिया, लेकिन कई दशकों तक देश पर शासन करने वाली ‘‘कांग्रेस पार्टी के युवराज’’ राहुल गांधी महाकुंभ में नहीं गये।
मालवीय ने कहा, ‘‘एक ईसाई मां और पारसी पिता के पुत्र का हिंदू समाज के इस प्राचीन पर्व पर आस्था न रखना स्वाभाविक है। राहुल गांधी 500 वर्षों के लंबे संघर्ष के बाद बने रामलला मंदिर (अयोध्या) में भी अब तक नहीं गए। यह उनका निजी फैसला हो सकता है और हमें इसका सम्मान करना चाहिए।’’
उन्होंने कहा, ‘‘लेकिन जब यही राहुल गांधी, उनकी बहन प्रियंका गांधी वाद्रा और मां सोनिया गांधी चुनाव से पहले मंदिर जाने का स्वांग रचते हैं, तो (उन्हें) इसे अब बंद कर देना चाहिए।’’
उन्होंने कहा, ‘‘देश के बहुसंख्यक समाज को मूर्ख बनाकर राजनीति करने की कांग्रेस की इस घटिया प्रवृत्ति को पूरी तरह नकारने का समय आ गया है।’’
मालवीय ने आरोप लगाया कि ऐसा पहली बार नहीं है जब नेहरू-गांधी परिवार के किसी व्यक्ति ने हिंदू समाज के महाआयोजन को इस तरह ‘‘अपमानित’’ किया हो। उन्होंने कहा कि 1954 में स्वतंत्र भारत का पहला कुंभ इलाहाबाद (अब प्रयागराज) में आयोजित हुआ था और उस समय कुंभ में अनुमानित 40-50 लाख लोग शामिल हुए थे।
मालवीय ने कहा कि तत्कालीन राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद के साथ प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू भी कुंभ में आए थे। उन्होंने कहा, ‘‘राजेंद्र प्रसाद ने संगम क्षेत्र में एक महीने तक कल्पवास भी किया था।’’
मालवीय ने कहा, ‘‘लेखक पी वी राजगोपाल अपनी पुस्तक ‘मैं नेहरू का साया था’ में लिखते हैं- ‘‘सभी ने संगम में डुबकी लगाई, लेकिन नेहरू ने स्नान करना तो दूर, अपने ऊपर गंगाजल भी नहीं छिड़का।’’
भाजपा नेता ने आरोप लगाया कि हिंदुओं को धोखा देना कांग्रेस और नेहरू-गांधी परिवार की ‘‘पुरानी आदत’’ रही है। उन्होंने कहा, ‘‘उनकी इस जहरीली मानसिकता को उजागर करना जरूरी है।’’
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