देश की खबरें | प्रियंक खरगे के बयान पर निर्वाचन आयोग पहुंची भाजपा
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नयी दिल्ली, दो मई भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने मंगलवार को निर्वाचन आयोग के समक्ष बजरंग दल के खिलाफ कड़ी कार्रवाई को लेकर कांग्रेस द्वारा किये गये वादे और उसके नेता प्रियंक खरगे द्वारा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को 'नालायक' कहने का मुद्दा उठाया।
निर्वाचन आयोग में भाजपा प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करने वाले केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने आरएसएस से संबद्ध विश्व हिंदू परिषद की युवा शाखा बजरंग दल को भगवान हनुमान के प्रति समर्पित और लोगों की सेवा करने वाला संगठन बताते हुए कहा कि इस पर कांग्रेस का हमला 'शर्मनाक' है।
उन्होंने संवाददाताओं से कहा कि यह दिखाता है कि कांग्रेस केवल तुष्टिकरण में विश्वास करती है।
यह पूछे जाने पर कि क्या पार्टी ने निर्वाचन आयोग के समक्ष यह मुद्दा उठाया, उन्होंने कहा कि समाज को बांटने के उद्देश्य से कांग्रेस की हर 'आपत्तिजनक' टिप्पणी और कार्रवाई को उठाया गया।
पार्टी सूत्रों ने कहा कि बजरंग दल का मुद्दा निर्वाचन आयोग के समक्ष मौखिक रूप से उठाया गया था।
प्रतिनिधिमंडल में भाजपा सांसद अनिल बलूनी और पार्टी पदाधिकारी ओम पाठक शामिल थे।
गोयल ने दावा किया कि कांग्रेस बौखला गई है क्योंकि भाजपा 10 मई को होने वाले चुनाव में जीत दर्ज करने जा रही है और इसलिए विपक्षी पार्टी अब कानून-व्यवस्था की स्थिति को बिगाड़ने और अंतिम उपाय के रूप में समाज को विभाजित करने की कोशिश कर रही है।
कांग्रेस पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि उसके अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने पहले मोदी को 'जहरीला सांप' कहा और उनके विधायक-पुत्र ने अब उन्हें 'नालायक' कहकर एक और आपत्तिजनक टिप्पणी की है।
उन्होंने कहा, ''हमने मांग की है कि चुनाव आयोग इन सभी मामलों में कड़ी कार्रवाई करे।"
भाजपा के वरिष्ठ नेता ने गृह मंत्री अमित शाह और पार्टी अध्यक्ष जे पी नड्डा जैसे सत्तारूढ़ पार्टी के नेताओं के खिलाफ ''नफरत भरे भाषण'' की कांग्रेस की शिकायत को भी खारिज कर दिया और कहा कि उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा और अखंडता के मुद्दे उठाए हैं।
उन्होंने कहा कि कांग्रेस मोदी और भारत की छवि खराब करने की कोशिश कर रही है क्योंकि उनके नेतृत्व में देश की प्रतिष्ठा बढ़ी है।
कांग्रेस के घोषणापत्र में कहा गया है, ‘‘हमारा मानना है कि कानून और संविधान पवित्र हैं। कोई व्यक्ति या बजरंग दल, पीएफआई और नफरत एवं शत्रुता फैलाने वाले दूसरे संगठन, चाहे वह बहुसंख्यकों के बीच के हों या अल्पसंख्यकों के बीच के हों, वे कानून और संविधान का उल्लंघन नहीं कर सकते। हम ऐसे संगठनों पर कानून के तहत प्रतिबंध लगाने समेत निर्णायक कार्रवाई करेंगे।’’
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