देश की खबरें | केंद्र को निशाना बनाने संबंधी प्रस्ताव पारित करने पर कर्नाटक विस में भाजपा, जद (एस) का प्रदर्शन

Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. कर्नाटक विधानसभा में केंद्र सरकार को निशाना बनाने संबंधी प्रस्ताव पारित किये जाने पर विपक्षी दलों भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और जनता दल (सेक्युलर) ने राज्य में सत्तारूढ़ कांग्रेस सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया, जिसके कारण शुक्रवार को सदन की कार्यवाही बाधित हुई और इसे स्थगित करना पड़ा।

बेंगलुरु, 23 फरवरी कर्नाटक विधानसभा में केंद्र सरकार को निशाना बनाने संबंधी प्रस्ताव पारित किये जाने पर विपक्षी दलों भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और जनता दल (सेक्युलर) ने राज्य में सत्तारूढ़ कांग्रेस सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया, जिसके कारण शुक्रवार को सदन की कार्यवाही बाधित हुई और इसे स्थगित करना पड़ा।

इस बीच, विधानसभा की कार्य मंत्रणा समिति (बीएसी) ने विधानसभा अध्यक्ष यू.टी. खादर की अध्यक्षता में हुई बैठक में सत्र की अवधि एक दिन बढ़ाकर सोमवार तक करने का फैसला किया। सत्र आज तक के लिए निर्धारित था।

विपक्ष की मांग है कि सरकार इन प्रस्तावों को वापस ले।

नेता प्रतिपक्ष आर. अशोक ने बृहस्पतिवार को सरकार द्वारा पेश और पारित किए गए प्रस्तावों को ‘‘झूठा, काल्पनिक और राजनीति से प्रेरित’’ करार देते हुये इसकी निंदा की और एक ‘‘जवाबी प्रस्ताव’’ पढ़ा। उन्होंने सरकार पर आरोप लगाया कि वह अपनी विफलताओं को छिपाने के लिए केंद्र पर दोष मढ़ रही है।

विपक्ष का प्रस्ताव क्योंकि उचित प्रक्रियाओं का पालन किये बिना और विधानसभा अध्यक्ष की सहमति के बिना पढ़ा गया इसीलिए इस पर विचार नहीं किया गया या मतदान नहीं कराया गया।

राज्य सरकार ने बृहस्पतिवार को प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार से यह सुनिश्चित करने का आग्रह किया था कि वित्तीय संसाधनों के आवंटन में राज्य के साथ कोई अन्याय न हो और किसानों को उनकी सभी फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) मिले और इसे सुनिश्चित करने के वास्ते एक कानून बनाने का भी आग्रह किया।

शुक्रवार को जैसे ही सदन की बैठक शुरू हुई तो भाजपा और जद(एस) सदस्य सदन के आसन के निकट आ गए।

अशोक ने कहा कि बीएससी की बैठक में चर्चा किये बिना ही केंद्र सरकार के खिलाफ एकतरफा प्रस्ताव लाये गये। उन्होंने कहा कि एजेंडे में भी इसका जिक्र नहीं था।

उन्होंने प्रस्तावों को वापस लेने की मांग करते हुए कहा, ‘‘सदन में बहुमत होने के बावजूद सरकार गुपचुप तरीके से प्रस्ताव क्यों लेकर आई? वे एजेंडे में इसका उल्लेख कर सकते थे और प्रक्रिया के तहत खुले तौर पर प्रस्ताव पेश कर सकते थे और हम भी प्रस्तावों के खिलाफ अपना पक्ष और आपत्तियां रख सकते थे।’’

उन्होंने कहा, ‘‘विधानसभा और इसके नियमों का अपमान किया गया है।’’

कानून एवं संसदीय कार्य मंत्री एच. के. पाटिल ने सरकार के इस कदम का बचाव करते हुए कहा कि यह प्रस्ताव कर्नाटक और उसके लोगों के हित को ध्यान में रखते हुए पारित किया गया था। उन्होंने कहा कि यह राज्य के साथ हुए अन्याय के खिलाफ है और तथ्यों तथा आंकड़ों के साथ है।

पाटिल ने कहा कि कानून के मुताबिक प्रस्ताव पेश और पारित किया गया है और इसे वापस लेने का कोई सवाल ही नहीं है।

सदन में हंगामा जारी रहने पर अध्यक्ष ने सदन की कार्यवाही सोमवार तक के लिए स्थगित कर दी।

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