देश की खबरें | भाजपा सरकार की नव-उदारवादी नीतियों से केवल कॉरपोरेट्स, अरबपतियों को फायदा : विजयन

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कोच्चि, 17 जनवरी केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन ने मंगलवार को केंद्र में सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की “नव-उदारवादी आर्थिक नीतियों” की आलोचना करते हुए कहा कि केवल कॉरपोरेट और अरबपतियों को इनका लाभ मिल रहा है।

विजयन ने कहा कि संगठित क्षेत्र में नौकरियों में भारी कमी आई है, जबकि केंद्र सरकार में 10 लाख से अधिक रिक्त पदों को भरने के लिए कोई कदम नहीं उठाया गया है।

विजयन ने यहां वामपंथी अराजपत्रित अधिकारी (एनजीओ) संघ के हीरक जयंती समारोह को संबोधित करते हुए कहा, “भाजपा के शासन में, हमारे देश में कॉरपोरेट फल-फूल रहे हैं। अरबपतियों की संख्या भी बढ़ रही है। लेकिन हमारा देश वैश्विक भूख सूचकांक में 107वें स्थान पर है और गरीबी सूचकांक में हम 131वें स्थान पर हैं। ये सूचकांक दिखाते हैं कि हमारे देश में स्थिति खराब हुई है।”

उन्होंने भाजपा सरकार से कॉरपोरेट की मदद के लिए नीतियां बनाने के बजाय देश के गरीबों और निचले तबके के उत्थान पर अधिक ध्यान देने का आग्रह किया।

वरिष्ठ माकपा नेता ने केंद्र सरकार पर आरोप लगाया कि वह आर्थिक रूप से केरल सरकार का“गला घोंटने” की कोशिश कर रही है।

उन्होंने कहा कि राज्य सरकार गरीबों के लाभ के लिए एक वैकल्पिक नीति लाने का प्रयास कर रही है।

वाम नेता ने कहा, “आपने इस देश के अधिकांश लोगों जोकि आम जन हैं, के लिए क्या किया है? सरकार को लोगों के कल्याण पर ध्यान देना चाहिए। लेकिन हमारे देश में सरकार कॉरपोरेट के लिए है न कि गरीबों के लिए। केरल एक वैकल्पिक नीति लाने का प्रयास कर रहा है, लेकिन केंद्र इसके खिलाफ है और राज्य का आर्थिक रूप से गला घोंटने की कोशिश कर रहा है।”

विजयन ने कहा कि पिछले आठ वर्षों में नौकरी के आकांक्षी सिर्फ 0.33 प्रतिशत को ही नौकरी मिल सकी है, जबकि बाकी लोग बेरोजगार हैं।

उन्होंने कहा, “केंद्र सरकार से संबंद्ध क्षेत्रों में देश भर में 10 लाख से अधिक पद खाली पड़े हैं। पिछले आठ वर्षों में, केवल 0.33 प्रतिशत नौकरी चाहने वालों को देश में नौकरी मिली। बाकी लोग बेरोजगार हैं। हमारे देश में असंगठित क्षेत्र में कार्यरत 82 प्रतिशत श्रमिकों के पास नौकरी की सुरक्षा या अन्य लाभ नहीं हैं।”

विजयन ने कहा कि संगठित क्षेत्र में काम करने वाले लोगों की संख्या में भी भारी कमी आई है।

विजयन ने कहा, “सामान्यतौर पर, वृद्धि होनी चाहिए। 2016-17 में, केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों में 11.29 लाख कर्मचारी थे। 2021 में, यह घटकर 8.62 लाख कर्मचारी रह गए। इसका मतलब है कि पांच वर्षों में, भारत में 2.68 लाख नौकरियां चली गईं। ऐसा इसलिए है क्योंकि केंद्र को नौकरी देने में कोई दिलचस्पी नहीं है।”

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