ताजा खबरें | आम बजट को भाजपा ने बताया सर्वस्पर्शी, विपक्ष ने कहा अवसरवादी

नयी दिल्ली, 10 फरवरी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने शुक्रवार को कहा कि केंद्र सरकार द्वारा पेश किया किया गया 2023-24 का आम बजट कांग्रेस की पूर्ववर्ती सरकारों की तरह चुनावी नहीं बल्कि सर्वस्पर्शी और सर्वव्यापी है। वहीं विपक्ष ने बजट को अवसरवादी, सच्चाई से दूर और आम आदमी की परेशनियों पर पर्दा डालने वाला बताया।

राज्यसभा में आम बजट पर चर्चा की शुरुआत करते हुए भाजपा के अरुण सिंह ने कहा कि चाहे लद्दाख के दूर-दराज के गांव हों या अरुणाचल प्रदेश में सीमावर्ती गांव या कश्मीर के अनंतनाग और कन्याकुमारी के गांव तक सभी क्षेत्रों के लिए इस बजट में कुछ न कुछ है।

उन्होंने कहा कि इस बजट में देश के इन क्षेत्रों के भी व्यक्तियों का ध्यान रखा गया है इसलिए पूरा देश एक स्वर से इस बजट के लिए प्रधानमंत्री मोदी का अभिनंदन कर रहा है। उन्होंने कहा, ‘‘यह बजट सर्वोपरि और सर्वव्यापी है।’’

सिंह ने कहा कि जब संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) के कार्यकाल के अंतिम वर्ष में 2013-14 का बजट आया था उस समय एक वामपंथी नेता ने उसे ‘‘लॉलीपॉप’’, चुनावी बजट और प्रतीकात्मक बजट करार दिया था।

उन्होंने कहा, ‘‘वर्ष 2024 में लोकसभा का चुनाव होने वाला है लेकिन इस बजट के बारे में किसी ने एक शब्द नहीं कहा है कि यह चुनावी बजट है या लोकलुभावन बजट है। यह बजट देश के लिए, समाज के लिए, सभी व्यक्तियों का बजट है।’’

भाजपा सदस्य ने कहा कि आज सबसे अधिक प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) भारत में आ रहा है और पिछले सिर्फ ढाई साल में 887 अरब डॉलर का एफडीआई भारत में आया है।

उन्होंने कहा कि एक तरफ जहां आस पड़ोस के देश ‘‘कंगाली’’ के दौर से गुजर रहे हैं वहीं भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 572 अरब डॉलर है।

उन्होंने कहा कि भारत के बजट के बारे में विदेशी पत्रिकाओं ने भी कहा है कि भारत अर्थव्यवस्था के मामले में एक उभरता हुआ स्थान है। उन्होंने कहा कि कोविड जैसी महामारी और वैश्विक उथलपुथल के बावजूद आज भारत विश्व की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है।

उन्होंने कहा, ‘‘आज यह परिवर्तन आया कि भारत बोलता है तो दुनिया सुनती है।’’

सिंह ने कहा कि भाजपा की सरकार की नीतियों के केंद्र बिंदु में गरीब और देश का शोषित व वंचित होता है।

उन्होंने दावा किया कि इन्हीं नीतियों की वजह से 2019 के आम चुनाव में भाजपा को पांच करोड़ वोट अधिक मिले और 2024 का जो चुनाव होगा उसमें मोदी के नाम से 5 करोड़ वोट अधिक मिलेंगे।

उन्होंने कहा कि एक तरफ दुनिया के ताकतवर देशों की अर्थव्यवस्था तबाह हो गई और वे महंगाई की मार से उबर नहीं सके वहीं दूसरी ओर प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व की वजह से भारत में महंगाई को लगभग-लगभग नियंत्रण में रखा गया।

उन्होंने कहा कि भारत की आर्थिक विकास की गति भी अमेरिकी और यूरोपीय देशों के मुकाबले बेहतर स्थिति में है।

उन्होंने कहा कि आज बैंकों की इतनी स्थिति सुधर गई है कि वे अपने पैरों पर खड़े नहीं हैं बल्कि दौड़ रहे हैं।

चर्चा में हिस्सा लेते हुए तृणमूल कांग्रेस के शांतनु सेन ने कहा कि बजट ऐसे समय में आया है जब सरकार पर एक व्यवसायी का साथ देने का गंभीर आरोप लगा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने संसद के दोनों सदनों में तीन घंटे तक भाषण दिया लेकिन उसका कोई उल्लेख नहीं किया।

उन्होंने बजट को अवसरवादी, सच्चाई से दूर और आम आदमी की परेशनियों पर पर्दा डालने वाला बताया। उन्होंने कहा कि इस बजट में महंगाई के बारे में एक शब्द भी नहीं बोला गया है जबकि पेट्रोल व डीजल की कीमतें आसमान छू रही हैं और देश का हर व्यक्ति इससे परेशान है।

उन्होंने कहा कि 1960 में अगर किसी वस्तु की कीमत 100 रुपये थी तो 2022 में उसकी कीमत 7800 रुपये तक पहुंच गई है।

सेन ने कहा कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमन ने बजट को समावेशी बताया है लेकिन यह कितना समावेशी है इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि अल्संख्यक कल्याण के बजट में 38 प्रतिशत की कटौती कर दी गई है।

उन्होंने कहा कि देश में बेरोजगारी चरम पर है लेकिन बजट में इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया गया है।

तृणमूल सदस्य ने कहा कि भारत आज वैश्विक भुखमरी सूचकांक में 121 देशों में 107वें स्थान पर है जबकि स्वास्थ्य के क्षेत्र में भी बजट नहीं बढ़ाया गया है। उन्होंने कहा कि शिक्षा के बजट में भी कोई खास वृद्धि नहीं की गई है।

द्रविड़ मुनेत्र कषगम के मोहम्मद अब्दुल्ला ने कहा कि 2014 में जब भाजपा के नेतृत्व में केंद्र सरकार बनी थी तब लोगों को उम्मीद थी कि यह ‘‘अमेजिंग सरकार’’ होगी लेकिन अंत में यह सरकार ‘‘आमेजन सरकार’’ साबित हुई जो सब कुछ बेचती है, जो उसे दिख जाता है।

उन्होंने बजट को कमजोर बताया और कहा कि इसमें समानता की कमी है, बेरोजगारी के संकट से निपटने का कोई उपाय नहीं है और महंगाई पर लगाम के लिए कोई कदम नहीं है।

उन्होंने कहा कि सरकार ने कहा है कि यह अमृत काल का बजट है लेकिन ‘‘मेरे हिसाब तो यह राहु काल का बजट’’ है।

बीजू जनता दल के सुजीत कुमार ने बजट की सराहना की और कहा कि यह पांच ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था का ‘‘ब्लूप्रिंट’’ है।

उन्होंने समाजिक क्षेत्र में आवंटन कम करने पर चिंता जताई और कहा कि सरकार ने सप्तऋषि की जो प्राथमिकताओं की घोषणा की है, उसमें शिक्षा का उल्लेख ना होना चिंताजनक है।

उन्होंने तेंदू पत्ता पर जीएसटी की दर कम करने की मांग की और कहा कि आपदाओं से मुकाबले के लिए ओड़िसा सरकार को आर्थिक मदद करनी चाहिए।

चर्चा में अगप के बीरेंद्र प्रसाद बैश्य, भाजपा के इरन्न कडाडी, तृणमूल कांग्रेस के जवाहर सरकार और शांता छेत्री, बीजद के अमर पटनायक, निर्दलीय अजीत भुइयां, बसपा के रामजी ने भी भाग लिया

चर्चा के दौरान विपक्ष के ज्यादातर दलों के सदस्य सदन में मौजूद नहीं थे

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