बिहार ने एफआरबीएम एक्ट के तहत रिण सीमा को तीन प्रतिशत से बढ़ाकर चार प्रतिशत करने की मांग की

उन्होंने कहा इसके साथ ही पहली बार सरकार ने रिजर्व बैंक से राज्य के सिंकिंग फंड की राशि से पुराने ऋण की 7,035 करोड़ किस्त के भुगतान की मांग की है। इस कोष का गठन भविष्य की देनदारियों के लिये धन बचाने के लिये किया जाता है।

पटना, 23 अप्रैल बिहार के उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने बृहस्पतिवार को कहा कि प्रदेश के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार सहित अन्य राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने केन्द्र सरकार से वित्तीय जवाबदेही एवं बजट प्रबंधन कानून (एफआरबीएम एक्ट) के तहत सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) के 3 प्रतिशत तक ऋण लेने की सीमा को बढ़ा कर 4 प्रतिशत करने की मांग की है।

उन्होंने कहा इसके साथ ही पहली बार सरकार ने रिजर्व बैंक से राज्य के सिंकिंग फंड की राशि से पुराने ऋण की 7,035 करोड़ किस्त के भुगतान की मांग की है। इस कोष का गठन भविष्य की देनदारियों के लिये धन बचाने के लिये किया जाता है।

सुशील मोदी ने कहा कि पिछले वर्ष की आर्थिक सुस्ती व वर्तमान लॉकडाउन के दौर में नगण्य राजस्व संग्रह के कारण केन्द्र व बिहार सहित अन्य राज्य सरकारें भीषण वित्तीय संकट के दौर से गुजर रही हैं। ऐसे में, बिहार के मुख्यमंत्री सहित अन्य राज्यों ने केन्द्र सरकार से एफआरबीएम एक्ट के तहत सकल राज्य घरेलू उत्पाद (जीएसडीपी) के 3 प्रतिशत तक ऋण लेने की सीमा को बढ़ा कर 4 प्रतिशत करने की मांग की है।

इसके साथ ही पहली बार सरकार ने आरबीआई से राज्य के सिंकिंग फंड की राशि से पुराने ऋण की किस्त 7,035 करोड़ रूपये के भुगतान की मांग की है।

उन्होंने कहा कि आर्थिक सुस्ती के कारण पिछले वर्ष 2019-20 में केन्द्रीय करों के कम संग्रह होने के कारण बिहार को केन्द्रीय करों की हिस्सेदारी में प्रस्तावित राशि से 25 हजार करोड़ रूपये कम प्राप्त हुआ। बल्कि यह 2018-19 से भी 10 हजार करोड़ रूपये कम रहा है।

ज्ञातव्य है कि 2009 में राज्य सरकार ने सिंकिंग फंड का गठन किया था जिसमें प्रतिवर्ष लोकऋण व अन्य बकाया दायित्व के 0.5 प्रतिशत की राशि निवेश किया जाता है। इस कोष में अभी 7,683.02 करोड़ रूपये जमा है, जिसमें मूलधन 5740.12 करोड़ रूपये व उसकी ब्याज राशि 1,942.90 रूपये करोड़ है। आरबीआई से उसी फंड से पुराने ऋण के मूलधन के इस साल की किस्त वापसी की मांग की गई है।

सुशील ने कहा कि वित्तीय वर्ष 2020-21 में केन्द्र सरकार ने बिहार को जीएसडीपी के 3 प्रतिशत के तहत 26,419 करोड़ रूपये ऋण उगाही की अनुमति दी है जिससे 21,188.42 करोड़ रूपये का कर्ज बाजार से लिया जा सकता है। अगर जीएसडीपी के 4 प्रतिशत तक ऋण लेने की अनुमति मिलती है तो बिहार अतिरिक्त 6,461 करोड़ रूपये का कर्ज ले सकता है।

अनवर

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