देश की खबरें | बिहार पुलिस ने भाड़े के हत्यारों का डेटाबेस बनाने के लिए समर्पित प्रकोष्ठ गठित किया
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पटना, 16 जुलाई बिहार पुलिस ने राज्य में सक्रिय भाड़े के हत्यारों का डाटाबेस तैयार करने के लिए एक 'प्रकोष्ठ' का गठन किया है, ताकि ऐसे अपराधियों पर नजर रखी जा सके।
नया प्रकोष्ठ बिहार पुलिस के विशेष कार्य बल (एसटीएफ) के तहत गठित किया गया है।
अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (मुख्यालय) कुंदन कृष्णन ने यहां संवाददाताओं से कहा, "राज्य में गंभीर अपराधों की हालिया घटनाओं के विश्लेषण से पता चला है कि कुछ युवा पैसे लेकर हत्या करने में में लिप्त हैं। भाड़े के हत्यारों पर नजर रखने के लिए एक नया प्रकोष्ठ गठित किया गया है। इन भाड़े के हत्यारों का एक डेटाबेस रखा जाएगा ताकि उनकी गतिविधियों की जांच की जा सके और भविष्य में उन्हें पकड़ा जा सके।"
कृष्णन ने बताया कि हर भाड़े के हत्यारों का पूरा रिकॉर्ड तैयार किया जाएगा। उन्होंने कहा, " प्रकोष्ठ उनका शारीरिक विवरण, तस्वीरें, नाम, पता और अन्य ब्यौरा रखेगा ताकि जेल से बाहर आने के बाद भी उनकी गतिविधियों पर नज़र रखी जा सके। ज़िलों के पुलिसकर्मियों को ऐसे भाड़े के हत्यारों पर नज़र रखने के लिए कहा गया है।"
अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (एडीजी) ने कहा, "पुलिस ने अपराध से धन अर्जित करने वाले 1,290 व्यक्तियों की पहचान की है और उनकी संपत्ति बहुत जल्द जब्त कर ली जाएगी।"
उन्होंने यह भी बताया कि राज्य पुलिस ने जघन्य अपराधों के मामलों में त्वरित सुनवाई और दोषसिद्धि सुनिश्चित करने के लिए फास्ट ट्रैक अदालतें (एफटीसी) शुरू करने का प्रस्ताव भेजा है। उन्होंने बताया कि 2012-13 तक, जब तक एफटीसी कार्यरत नहीं थे, लगभग 2,000 लोगों को आजीवन कारावास की सजा मिली थी।
उन्होंने कहा, "मुठभेड़ें, अपराध रोकने का समाधान नहीं है। हमें जांच में तेजी लानी होगी, समय पर आरोप-पत्र तैयार करने होंगे, त्वरित सुनवाई सुनिश्चित करनी होगी और दोषसिद्धि सुनिश्चित करने पर ध्यान केंद्रित करना होगा।"
वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि एसटीएफ के अंतर्गत स्वापक प्रकोष्ठ पहले से ही कार्यरत है, लेकिन इसे और मजबूत करने के लिए, बिहार पुलिस एक अलग 'स्वापक और निषेध प्रभाग' स्थापित करने की योजना बना रही है, जिसके लिए राज्य सरकार को एक प्रस्ताव भेजा जाएगा।
राज्य में नक्सली गतिविधियों पर टिप्पणी करते हुए एडीजी ने कहा, "राज्य में नक्सली गतिविधियों में उल्लेखनीय कमी आई है। गयाजी, औरंगाबाद, मुंगेर, जमुई जिलों से नक्सलियों का सफाया हो गया है, जिन्हें कभी माओवादी गतिविधियों का गढ़ माना जाता था। वर्तमान में मुंगेर और जमुई जिलों में केवल तीन सशस्त्र नक्सली समूह सक्रिय हैं। एसटीएफ ने साल के शुरुआकी छह महीनों में 82 नक्सलियों को गिरफ्तार किया है।"
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