देश की खबरें | बिहार शराबबंदी कानून: न्यायालय ने विशेष अदालतों के बुनियादी ढांचा निर्माण के लिए राज्य को कार्ययोजना बताने को कहा
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को बिहार सरकार से विशेष अदालतों के बुनियादी ढांचे के निर्माण के लिए समयसीमा तय करने को कहा, जो बिहार मद्यनिषेध और उत्पाद अधिनियम के तहत मामलों की सुनवाई करेगी।
नयी दिल्ली, नौ दिसंबर उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को बिहार सरकार से विशेष अदालतों के बुनियादी ढांचे के निर्माण के लिए समयसीमा तय करने को कहा, जो बिहार मद्यनिषेध और उत्पाद अधिनियम के तहत मामलों की सुनवाई करेगी।
न्यायमूर्ति संजय के. कौल और न्यायमूर्ति ए. एस. ओका की पीठ को बताया गया कि राज्य द्वारा 2019 में 74 विशेष अदालतें स्थापित की गई हैं और पटना उच्च न्यायालय ने पिछले साल 27 सितंबर को एक पत्र के माध्यम से विशेष अदालतों के लिए भवनों के निर्माण के नक्शे को मंजूरी दी है।
शीर्ष अदालत बिहार में 2016 में लागू शराबबंदी कानून से जुड़े एक मामले की सुनवाई कर रही है। इस मामले में न्यायमित्र के रूप में शीर्ष अदालत की सहायता कर रहे अधिवक्ता गौरव अग्रवाल ने एक और मुद्दा उठाया और कहा कि शराब के सेवन के लिए दंड से संबंधित अधिनियम की धारा 37 के तहत ‘‘शराब सेवन के मामलों’’ में सुनवाई के लिए एक कार्यकारी मजिस्ट्रेट को न्यायिक मजिस्ट्रेट का अधिकार दिया जा सकता है।
अग्रवाल ने शीर्ष अदालत में सुनवाई के लिए पेश अपने लिखित नोट में कहा कि राज्य सरकार ने इस साल अप्रैल में उच्च न्यायालय से 38 जिलों के जिलाधिकारियों को न्यायिक मजिस्ट्रेट के अधिकार प्रदान करने का अनुरोध किया था लेकिन उच्च न्यायालय ने प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया था।
नोट में कहा गया है कि बिहार के अतिरिक्त मुख्य सचिव ने 13 जून, 2022 को उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल को एक पत्र लिखा था जिसमें शराब सेवन के मामलों के संबंध में न्यायिक मजिस्ट्रेट को विशेष अदालतों के समान अधिकार प्रदान करने के लिए कहा गया था।
इसमें कहा गया है कि इस साल सितंबर में राज्य सरकार ने फिर से उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार जनरल को एक पत्र लिखा कि धारा 37 के तहत मामलों को न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वारा देखा जा सकता है और इस मामले पर उच्च न्यायालय द्वारा विचार किया जा रहा है।
न्यायमित्र ने कहा कि राज्य को निर्देश दिया जा सकता है कि वह प्रत्येक जिले में विशेष अदालतों के लिए बुनियादी ढांचे के निर्माण के संबंध में अपनी कार्य योजना बताए।
पीठ ने कहा, ‘‘बिहार राज्य के वकील विशेष अदालतों के निर्माण को लेकर समय सीमा निर्धारित करने के लिए निर्देश प्राप्त करें।’’
न्यायमित्र ने कहा कि अगर न्यायिक मजिस्ट्रेट को विशेष अदालतों के रूप में नामित किया जाता है, तो संभवत: न्यायिक मजिस्ट्रेट, कर्मचारियों और अदालत कक्षों के अतिरिक्त पदों के सृजन की आवश्यकता होगी।
राज्य के वकील ने इन मुद्दों पर जवाब देने के लिए कुछ समय मांगा और पीठ ने मामले में सुनवाई के लिए 23 जनवरी की तारीख तय की।
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