देश की खबरें | भूस्वामियों को अनिश्चितकाल तक भूमि के उपयोग से वंचित नहीं किया जा सकता: न्यायालय
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. उच्चतम न्यायालय ने हाल में कहा है कि किसी भूस्वामी को अनिश्चित काल तक भूमि के उपयोग से वंचित नहीं किया जा सकता।
नयी दिल्ली, 26 फरवरी उच्चतम न्यायालय ने हाल में कहा है कि किसी भूस्वामी को अनिश्चित काल तक भूमि के उपयोग से वंचित नहीं किया जा सकता।
न्यायमूर्ति जे बी पारदीवाला और न्यायमूर्ति आर महादेवन की पीठ ने बंबई उच्च न्यायालय के एक आदेश को खारिज करते हुए यह टिप्पणी की।
पीठ ने कहा, "भूस्वामी को कई वर्षों तक भूमि के उपयोग से वंचित नहीं किया जा सकता। किसी भूस्वामी पर किसी खास तरीके से भूमि का उपयोग न करने का प्रतिबंध लगाए जाने के बाद उस प्रतिबंध को अनिश्चित काल तक बरकरार नहीं रखा जा सकता।"
पीठ ने महाराष्ट्र क्षेत्रीय एवं नगर नियोजन अधिनियम, 1966 की धारा 127 का हवाला देते हुए कहा कि पिछले 33 वर्षों से विकास योजना में भूखंड को आरक्षित रखना कोई समझदारी नहीं है।
अदालत ने कहा कि प्राधिकरण ने न केवल मूल मालिकों को भूमि का उपयोग करने से रोका, बल्कि खरीदारों को भी अब भूमि का उपयोग करने की अनुमति नहीं दे रहा है।
पीठ ने कहा, "महाराष्ट्र क्षेत्रीय एवं नगर नियोजन अधिनियम, 1966 की धारा 126 के तहत भूमि अधिग्रहण के लिए कानून में दस वर्ष की अवधि निर्धारित की गई है। महाराष्ट्र अधिनियम 42, 2015 द्वारा संशोधन से पहले भूमि अधिग्रहण के लिए नोटिस देने के लिए भूमि मालिक को एक अतिरिक्त वर्ष दिया जाता है। ऐसी समयसीमा उचित है और राज्य या राज्य के अधीन अधिकारियों द्वारा इसका पालन किया जाना चाहिए।"
शीर्ष अदालत एक मामले की सुनवाई कर रही थी जिसमें एक खाली भूखंड के मालिकों ने 2.47 हेक्टेयर के विकास के लिए भूमि विकास योजना प्रस्तुत की थी।
योजना को मंजूरी दे दी गई थी और शेष क्षेत्र को अधिनियम के तहत 1993 में संशोधित विकास योजना में एक निजी स्कूल के लिए आरक्षित दिखाया गया था।
हालांकि, 1993 से 2006 तक महाराष्ट्र के अधिकारियों द्वारा निजी स्कूल के लिए संपत्ति अधिग्रहण करने के लिए कोई कार्रवाई नहीं की गई।
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