देश की खबरें | भीमा कोरेगांव मामला: शीर्ष अदालत ने नवलखा मामले में दिल्ली उच्च न्यायालय का आदेश निरस्त किया
Get Latest हिन्दी समाचार, Breaking News on India at LatestLY हिन्दी. उच्चतम न्यायालय ने भीमा कोरेगांव मामले के संबंध में मानवाधिकार कार्यकर्ता गौतम नवलखा को दिल्ली से मुंबई स्थानांतरित करने से संबंधित न्यायिक रिकार्ड पेश करने का एनआईए को निर्देश देने संबंधी दिल्ली उच्च न्यायालय का आदेश सोमवार को निरस्त कर दिया। न्यायालय ने कहा, ‘‘यह बंबई की अदालतों के अधिकार क्षेत्र का मामला है जो ऐसे आवेदन पर विचार कर सकती हैं।’’
नयी दिल्ली, छह जुलाई उच्चतम न्यायालय ने भीमा कोरेगांव मामले के संबंध में मानवाधिकार कार्यकर्ता गौतम नवलखा को दिल्ली से मुंबई स्थानांतरित करने से संबंधित न्यायिक रिकार्ड पेश करने का एनआईए को निर्देश देने संबंधी दिल्ली उच्च न्यायालय का आदेश सोमवार को निरस्त कर दिया। न्यायालय ने कहा, ‘‘यह बंबई की अदालतों के अधिकार क्षेत्र का मामला है जो ऐसे आवेदन पर विचार कर सकती हैं।’’
शीर्ष अदालत ने कहा कि नवलखा ने गलत सोच के आधार पर जोखिम उठाते हुये अग्रिम जमानत के लिये सीधे दिल्ली उच्च न्यायालय में आवेदन दाखिल किया और शीर्ष अदालत के आठ अप्रैल, 2020 के आदेश की भावना के मद्देनजर जउच्च न्यायालय द्वारा की गयी पूरी कवायद अनावश्यक थी।
न्यायमूर्ति अरूण मिश्रा, न्यायमूर्ति नवीन सिन्हा और न्यायमूर्ति इन्दिरा बनर्जी की पीठ ने कहा कि दिल्ली उच्च न्यायालय को पहले तो नवलखा की जमानत अर्जी पर विचार नहीं करना चाहिए था और इसमें की गयी टिप्पणियों को निकाला जाता है।’’
पीठ ने राष्ट्रीय जांच एजेन्सी की अपील पर अपने आदेश में कहा, ‘‘अब चूंकि प्रतिवादी (गौतम नवलखा) बंबई पहुंच गये हैं, उन्हें बंबई की सक्षम अदालत में आवेदन करने की स्वतंत्रता है। अत: इस मामले में शुरू की गयी कार्यवाही और टिप्पणियों सहित उक्त आदेश निरस्त करते हैं। इस मामले में सिर्फ बंबई की अदालतों को ही अधिकार है, जो आवेदन पर विचार कर सकती हैं।’’
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शीर्ष अदालत ने कहा कि इस मामले में आत्मसमर्पण का समय बढ़ाने के लिये नवलखा के आवेदन पर उसके आठ अप्रैल के आदेश को पढ़ने से यह स्पष्ट होता है कि आरोपी को अधिकार क्षेत्र वाली अदालत के समक्ष राहत के लिये आवेदन करने की स्वतंत्रता दी गयी थी क्योंकि बंबई की अदालतें काम कर रही थीं।
पीठ ने कहा कि इस न्यायालय के उपरोक्त आदेश एकदम स्पष्ट है और न्यायालय ने एक सप्ताह का समय दिया था क्योंकि बंबई की अदालत को ही किसी भी आवेदन पर विचार करने का अधिकार था।
पीठ ने कहा कि अगर इस न्यायालय के आठ अप्रैल के आदेश में किसी प्रकार के सुधार की आवश्यकता थी तो प्रतिवादी (नवलखा) को इस न्यायालय में आवेदन करना चाहिए था जो उन्होंने नहीं किया।
शीर्ष अदालत ने इससे पहले दिल्ली उच्च न्यायालय के 27 मई के आदेश पर रोक लगा दी थी। उच्च न्यायालय ने अपने आदेश में गौतम नवलखा को तिहाड़ जेल से मुंबई ले जाने में दिखाई गयी जल्दबाजी के लिये राष्ट्रीय जांच एजेन्सी को आड़े हाथ लिया था।
सालिसीटर जनरल तुषार मेहता ने सोमवार को न्यायालय में सुनवाई के दौरान कहा कि शीर्ष अदालत के आदेश पर जब नवलखा ने आत्मसमर्पण किया तो उस वक्त दिल्ली में लॉकडाउन था। उन्होंने कहा कि एनआईए ने बाद में मुंबई की विशेष अदालत में आवेदन करके दिल्ली की तिहाड़ जेल में न्यायिक हिरासत में बंद गौतम नवलखा को पेश करने के लिये आवश्यक वारंट जारी करने का अनुरोध किया।
मेहता ने कहा कि इस वारंट के आधार पर नवलखा को मुंबई की अदालत में पेश किया गया और दिल्ली उच्च न्यायालय को इसकी जानकारी भी दी गयी।
उन्होंने कहा कि दिल्ली में लॉकडाउन खत्म होने के बाद नवलखा को मुंबई ले जाया गया । उहोंने कहा कि राष्ट्रीय जांच एजेन्सी के बारे में उच्च न्यायालय की टिप्पणियां अनावश्यक थीं।
नवलखा की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने कहा कि उच्च न्यायालय ने क्या किया था। उसने न तो कोई जमानत दी और न ही किसी तरह की राहत दी। उच्च न्यायालय ने तो सिर्फ संबंधित अधिकारी को हलफनामा दाखिल करने के लिये कहा था।
हालांकि, पीठ ने कहा कि उच्च न्यायालय को इस याचिका पर विचार ही नहीं करना चाहिए था।
पीठ ने सिब्बल से कहा, ‘‘इस तरह के मामले में कोई उच्च न्यायालय हस्तक्षेप कैसे कर सकता है? आप हमारे पास आ सकते थे या फिर मुंबई में एनआईए की संबंधित अदालत में जा सकते थे।’’
शीर्ष अदालत ने 19 जून को अप्रसन्नता व्यक्त करते हुये उच्च न्यायालय द्वारा नवलखा की जमानत याचिका पर विचार करने पर सवाल उठाये थे जबकि इस तरह की राहत के लिये उनकी याचिका पहले ही खारिज की जा चुकी थी और उन्हें निश्चित तारीख के भीतर आत्मसमर्पण करने का निर्देश दिया गया था।
शीर्ष अदालत ने 16 मार्च को नवलखा की अग्रिम जमानत याचिका खारिज करते हुये उन्हें तीन सप्ताह के भीतर आत्मसमर्पण करने का आदेश दिया था। इस आदेश का पालन करते हुये नवलखा ने 14 अप्रैल को आत्मसमर्पण कर दिया था और इसके बाद से वह तिहाड़ जेल में बंद थे। नवलखा को 26 मई को ट्रेन से मुंबई ले जाया गया था।
गौतम नवलखा को कोरेगांव भीमा गांव में एक जनवरी, 2018 को हुयी हिंसा के सिलसिले में पुणे पुलिस ने अगस्त, 2018 को गिरफ्तार किया था।
पुणे पुलिस का आरोप था कि 31 दिसंबर 2017 को पुणे में आयोजित एलगार परिषद में भड़काने वाले बयान दिये गये थे जिसकी वजह से अगले दिन कोरेगांव भीमा में हिंसा भड़क उठी थी। पुलिस का आरोप था कि इस समागम को माओवादियों का समर्थन प्राप्त था।
अनूप
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