विदेश की खबरें | बीबीसी कार्यालयों के सर्वे की वैश्विक मीडिया संस्थाओं ने की आलोचना
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न्यूयॉर्क, 14 फरवरी वैश्विक मीडिया संस्थाओं और मानवाधिकार संगठनों ने मंगलवार को नयी दिल्ली और मुंबई में बीबीसी के कार्यालयों पर भारत सरकार के आयकर विभाग के सर्वे की निंदा करते हुए कहा है कि डराने की नीयत से यह कार्रवाई की गई है और यह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का खुला अपमान है।
आयकर विभाग ने कहा है कि कथित कर चोरी की जांच के सिलसिले में यह कार्रवाई की गई है।
ब्रिटिश ब्रॉडकास्टिंग कॉरपोरेशन (बीबीसी) ने भारतीय आयकर विभाग की कार्रवाई पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि वह प्राधिकारियों के साथ पूरा सहयोग कर रहा है और आशा करता है कि हालात “जल्द से जल्द” सामान्य हो जाएंगे।
न्यूयॉर्क स्थित स्वतंत्र गैर-लाभकारी संस्था कमिटी टू प्रोटेक्ट जर्नलिस्ट (सीपीजे) ने भारत सरकार से पत्रकारों का उत्पीड़न रोकने का आग्रह किया।
सीपीजे के एशिया कार्यक्रम के समन्वयक बेह ली यी ने कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आलोचना वाले एक वृत्तचित्र के मद्देनजर बीबीसी के भारत कार्यालयों पर छापा मारने से डराने की बू आती है।”
पेरिस में स्थित संस्था रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स (आरएसएफ) ने ट्वीट किया, “नरेंद्र मोदी के बारे में वृत्तचित्र की सेंसरशिप के तीन सप्ताह बाद भारत में बीबीसी के कार्यालयों पर आयकर अधिकारियों की छापेमारी अपमानजनक प्रतिशोध जाहिर होता है। आरएसएफ किसी भी आलोचना को दबाने के भारत सरकार के इन प्रयासों की निंदा करता है।”
एमनेस्टी इंटरनेशनल ने ट्वीट किया: “ये छापे अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का घोर अपमान हैं।”
ब्रिटेन स्थित मानवाधिकार संगठन ‘साउथ एशिया सॉलिडैरिटी ग्रुप’ ने इसे “स्पष्ट रूप से बदले की कार्रवाई” करार दिया।
ग्रुप की प्रवक्ता मुक्ति शाह ने कहा, “ वृत्तचित्र की स्क्रीनिंग पर सरकारी प्रतिबंध के बाद यह छापेमारी स्पष्ट करती है कि मोदी सरकार उन सभी पर हमला करेगी जो नरेंद्र मोदी, भाजपा और उनके करीबी लोगों की आलोचना करते हैं।”
बीबीसी द्वारा दो कड़ियों वाला वृत्तचित्र ‘इंडिया: द मोदी क्वेश्चन’ प्रसारित किए जाने के कुछ हफ्तों बाद विभाग ने यह कार्रवाई की है।
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