कन्नूर (केरल), 15 मार्च केरल के एक कलाकार को यहां के स्थानीय मंदिर उत्सवों में परंपरागत कला के प्रदर्शन के लिए “प्रतिबंध” का सामना करना पड़ रहा है क्योंकि उसके बेटे ने उत्तरी केरल के इस जिले के करीवेलूर में एक मुस्लिम महिला से शादी की है।
विगत 37 वर्षों से प्रसिद्ध 'पूरक्कली-मराथुकली' कला की प्रस्तुति दे रहे कलाकार विनोद पणिकर ने आरोप लगाया कि कुछ स्थानीय मंदिरों के प्रबंधन ने उन्हें सूचित किया कि वह पारंपरिक कला का प्रदर्शन नहीं कर सकते क्योंकि वह उसी घर में रहते हैं जहां उनकी गैर-हिंदू बहू रहती है जो रीति-रिवाजों और परंपराओं के खिलाफ है।
यहां के थिया समुदाय के एक मंदिर की प्रबंधन समिति ने उन्हें यहां तक कह दिया कि यदि वह अपने घर, जहां गैर-हिंदू महिला रहती है, वहां से किसी अन्य स्थान पर चले जाते हैं तो उन्हें अनुष्ठान करने की अनुमति दी जाएगी।
कलाकार ने कहा कि उन्होंने उनकी मांग को खारिज कर दिया। इसके बाद मंदिर प्रशासन ने हाल ही में एक अन्य कलाकार के साथ अनुष्ठान किया।
पणिकर ने कहा, “मैंने उन्हें स्पष्ट रूप से कहा है कि मैं अपने बेटे और बहू को छोड़ना या किसी अन्य घर में स्थानांतरित नहीं करना चाहता हूं। मैं लगभग चार दशकों से अनुष्ठान कला का प्रदर्शन कर रहा हूं और इस अपमान को सहना पीड़ादायक है।”
मंदिर समिति ने हालांकि यह कहते हुए कार्रवाई को उचित ठहराया कि अनुष्ठान एक कलाकार को उस घर से प्रदर्शन के लिए आमंत्रित करने की अनुमति नहीं देता जहां एक गैर-हिंदू व्यक्ति रहता है।
उन्होंने यह भी कहा कि उन्होंने (मंदिर समिति ने) कोई प्रतिबंध नहीं लगाया, लेकिन केवल पणिकर को सूचित किया कि अनुष्ठानों का उल्लंघन नहीं किया जा सकता है।
“पुरक्कली” एक पारंपरिक नृत्य अनुष्ठान है जो पुरुषों द्वारा नौ दिवसीय पूरम उत्सव के दौरान भगवती मंदिरों और मालाबार (उत्तरी केरल) के पवित्र उपवनों में किया जाता है।
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