देश की खबरें | पीएफआई पर प्रतिबंध का समर्थन नहीं किया जा सकता: ओवैसी

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हैदराबाद, 28 सितंबर ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहाद-उल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने बुधवार को कहा कि उन्होंने हालांकि हमेशा पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (पीएफआई) के दृष्टिकोण का विरोध किया है, लेकिन संगठन पर प्रतिबंध का समर्थन नहीं किया जा सकता।

सरकार ने आतंकी गतिविधियों में कथित तौर पर संलिप्तता और आईएसआईएस जैसे आतंकवादी संगठनों से ‘‘संबंध’’ होने के कारण पीएफआई और उससे संबद्ध कई अन्य संगठनों पर बुधवार को पांच साल का प्रतिबंध लगा दिया।

ओवैसी ने यहां संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘‘मैंने हमेशा पीएफआई के कट्टरपंथी दृष्टिकोण का विरोध किया है, मैंने हमेशा लोकतांत्रिक दृष्टिकोण का समर्थन किया है। पीएफआई पर इस प्रतिबंध का समर्थन नहीं किया जा सकता क्योंकि संगठन के कुछ व्यक्तियों द्वारा किये गये अपराध का यह मतलब नहीं है कि संगठन को ही प्रतिबंधित कर दिया जाये। उच्चतम न्यायालय ने यह भी माना है कि किसी संगठन के साथ संबद्ध होना किसी को दोषी ठहराने के लिए पर्याप्त नहीं है।’’

उन्होंने पूछा, ‘‘पीएफआई पर प्रतिबंध लगाया जाता है लेकिन ख्वाजा अजमेरी बम धमाकों के दोषियों से जुड़े संगठनों पर प्रतिबंध क्यों नहीं लगाया जाता है? सरकार ने दक्षिणपंथी बहुसंख्यक संगठनों पर प्रतिबंध क्यों नहीं लगाया?’’

राजस्थान के अजमेर में सूफी संत ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह में 2007 में हुए बम विस्फोट में तीन तीर्थयात्री मारे गए थे और 15 घायल हो गए थे। जयपुर में राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (एनआईए) की एक विशेष अदालत ने बाद में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के दो पूर्व सदस्यों को बम विस्फोट में शामिल होने के लिए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।

उन्होंने आरोप लगाया, ‘‘इस तरह का ‘‘कठोर प्रतिबंध’’ खतरनाक है क्योंकि यह किसी भी उस मुसलमान पर रोक लगाता है जो अपने मन की बात कहना चाहता है। जिस तरह से भारतीय चुनाव प्राधिकारी फासीवाद की तरफ बढ़ रहे हैं, अब हर मुसलमान को ‘‘काले कानून’’ गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (यूएपीए) के तहत गिरफ्तार किया जाएगा।’’

ओवैसी ने कहा, ‘‘अदालतों द्वारा बरी किए जाने से पहले मुस्लिमों ने दशकों तक का समय जेल में बिताया है। मैं हमेशा यूएपीए का विरोध करता हूं और करता रहूंगा, क्योंकि यूएपीए हमारे संविधान के मूल ढांचे के खिलाफ है।’’

उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने इसे सख्त बनाने के लिए यूएपीए में संशोधन किया और जब भाजपा ने इसे और अधिक कठोर बनाने के लिए कानून में संशोधन किया, तो उस समय भी कांग्रेस ने इसका समर्थन किया।

केरल के पत्रकार सिद्दीकी कप्पन के मामले का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि आतंकवाद विरोधी कानून के तहत जमानत मिलने में दो साल लगते हैं।

कप्पन को अक्टूबर, 2020 में उत्तर प्रदेश के हाथरस जाते समय गिरफ्तार किया गया था, जहां कथित तौर पर बलात्कार के बाद एक दलित महिला की मौत हो गई थी।

इस बीच तेलंगाना में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के मुख्य प्रवक्ता के. कृष्णा सागर राव ने आरोप लगाया कि गैर-भाजपा राज्य सरकारों ने वर्षों से ‘‘अल्पसंख्यक तुष्टीकरण की अपनी राजनीतिक मजबूरी के चलते’’ पीएफआई जैसे खतरनाक संगठनों को राष्ट्रीय स्तर पर विकसित होने दिया है।

उन्होंने एक बयान में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में एक मजबूत सरकार ही राष्ट्रीय सुरक्षा के हित में पीएफआई और उससे जुड़े संगठनों पर प्रतिबंध लगाने जैसी निर्णायक कार्रवाई कर सकती है।

राव ने कहा, ‘‘मोदी सरकार द्वारा समय पर की गई यह सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करेगी कि भारत में सांप्रदायिक और धार्मिक वैमनस्य पैदा करने संबंधी घृणित एजेंडे को आगे बढ़ाने के लिए विभाजनकारी ताकतें सामाजिक संगठनों की आड़ में राष्ट्रव्यापी नेटवर्क का निर्माण नहीं कर पाएं।’’

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